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50 फीसदी से ज्यादा फसलें बर्बाद
ब्यूरो/अमर उजाला प्रतापगढ़
Updated Fri, 10 Apr 2015 11:30 PM IST
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बेमौसम बरसात से अब तक शासन को भेजी गई रिपोर्ट के मुताबिक गेहूं का 50 प्रतिशत या इससे ऊपर का नुकसान नहीं हुआ जबकि 790 हेक्टेयर में बोई गई सरसो और आलू का नुकसान 50 फीसदी से ऊपर हुआ है। प्रशासन के पास प्रभावित किसानों की संख्यात्मक रिपोर्ट नहीं है। ऐसे में यह पता चल पाना मुश्किल हो गया है कि कितने किसानों की फसल बारिश से बर्बाद हुई है।
किसानों के खेत में आफत गिरा बारिश के पानी से ज्यादातर फसलें बर्बाद हो गईं। बर्बाद हुई खेती देख जिले के तमाम किसानों की चिंता में मौत हो गई। बिगड़ते हालात को देख सरकार ने प्रशासन से फसलों के नुकसान का ब्योरा मांगा। पहली बार बर्बाद हुई फसलों की लेखपालों के जरिए रिपोर्ट तैयार कराई गई। चूंकि पूर्व में शासन की गाइड लाइन थी कि 50 प्रतिशत या इससे ऊपर जिन किसानों का नुकसान होगा उसी को सहायता मिलेगी। इसी के आधार पर लेखपालों ने सर्वे रिपोर्ट तैयार की। इसमें मुआवजे के लिए जिले के किसानों को पात्र नहीं माना गया। रिपोर्ट के मुताबिक बेमौसम बारिश से 106 हेक्टेयर सरसो और 684 हेक्टेयर आलू की फसल 50 प्रतिशत से अधिक बर्बाद हुई। सूची में प्रभावित किसानों की संख्या दर्ज नहीं है।
ऐसी दशा में प्रभावित किसानों की तादाद बता पाना प्रशासन के लिए मुश्किल हो गया है। बहरहाल प्रभावित किसानों की आर्थिक सहायता के लिए प्रथम किस्त में जिले को 44 लाख 12 हजार रुपये शासन से मिले थे। दावा किया जा रहा है कि यह पैसा तीन हजार 608 किसानों के बीच बांट दिया गया है। हाल ही में मिले दो करोड़ 22 लाख 97 हजार रुपये की धनराशि सहायता के रूप में बांटने के लिए चेक तैयार किया जा रहा है।
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अब 33 से 50 प्रतिशत बर्बाद हुई फसलों का सर्वे कार्य शुरू हो गया है। यह काम सरकार के निर्देश पर किया जा रहा है। हर तहसीलदार को एडीएम ने सर्वे रिपोर्ट तत्काल देने को कहा है। बताते चलें कि शुक्रवार की शाम तक लालगंज के सिवा किसी तहसील से यह सर्वे रिपोर्ट मुख्यालय नहीं पहुंची। माना जा रहा है कि इस सर्वे में बर्बाद हुई गेहूं की फसल का अनुमानित डाटा भी दर्ज किया जाएगा।
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किसानों के खेत में आफत गिरा बारिश के पानी से ज्यादातर फसलें बर्बाद हो गईं। बर्बाद हुई खेती देख जिले के तमाम किसानों की चिंता में मौत हो गई। बिगड़ते हालात को देख सरकार ने प्रशासन से फसलों के नुकसान का ब्योरा मांगा। पहली बार बर्बाद हुई फसलों की लेखपालों के जरिए रिपोर्ट तैयार कराई गई। चूंकि पूर्व में शासन की गाइड लाइन थी कि 50 प्रतिशत या इससे ऊपर जिन किसानों का नुकसान होगा उसी को सहायता मिलेगी। इसी के आधार पर लेखपालों ने सर्वे रिपोर्ट तैयार की। इसमें मुआवजे के लिए जिले के किसानों को पात्र नहीं माना गया। रिपोर्ट के मुताबिक बेमौसम बारिश से 106 हेक्टेयर सरसो और 684 हेक्टेयर आलू की फसल 50 प्रतिशत से अधिक बर्बाद हुई। सूची में प्रभावित किसानों की संख्या दर्ज नहीं है।
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ऐसी दशा में प्रभावित किसानों की तादाद बता पाना प्रशासन के लिए मुश्किल हो गया है। बहरहाल प्रभावित किसानों की आर्थिक सहायता के लिए प्रथम किस्त में जिले को 44 लाख 12 हजार रुपये शासन से मिले थे। दावा किया जा रहा है कि यह पैसा तीन हजार 608 किसानों के बीच बांट दिया गया है। हाल ही में मिले दो करोड़ 22 लाख 97 हजार रुपये की धनराशि सहायता के रूप में बांटने के लिए चेक तैयार किया जा रहा है।
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अब 33 से 50 प्रतिशत बर्बाद हुई फसलों का सर्वे कार्य शुरू हो गया है। यह काम सरकार के निर्देश पर किया जा रहा है। हर तहसीलदार को एडीएम ने सर्वे रिपोर्ट तत्काल देने को कहा है। बताते चलें कि शुक्रवार की शाम तक लालगंज के सिवा किसी तहसील से यह सर्वे रिपोर्ट मुख्यालय नहीं पहुंची। माना जा रहा है कि इस सर्वे में बर्बाद हुई गेहूं की फसल का अनुमानित डाटा भी दर्ज किया जाएगा।