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बगैर जांच और इलाज के लौटे चार सौ मरीज
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जिला अस्पताल में तकनीकी खराबी से उपकरणों के बंद होने सूना पड़ा काउंटर।
- फोटो : PRATAPGARH
जिला अस्पताल आए 400 मरीजों को बगैर इलाज कराए घर लौटना पड़ा। सर्वर फेल होने के कारण पैथालॉजी में न तो उनका पंजीयन हो सका और न ही जांच। इससे मरीजों को परेशान होना पड़ा। जिम्मेदार इससे अनजान बने रहे और मरीज परेशान होते रहे। गंभीर मरीज प्राइवेट सेंटरों से अपनी जांच करा रहे थे।
जिला अस्पताल के पैथालॉजी में आधुनिक मशीनें लगी हैं। यहां ऑनलाइन पंजीयन से लेकर जांच तक की व्यवस्था है। मरीज पर्चा देकर कंप्यूटर में फीड कराता है। इसके बाद सैंपल लेकर जांच के लिए लैब भेजा जाता है। कंप्यूटर से मिलने वाले सीरियल नंबर के मुताबिक मरीजों को जांच रिपोर्ट दी जाती है। तकनीकी खराबी के चलते गुरुवार सुबह आठ बजे से ही सर्वर फेल रहा।
इससे जांच कराने आए 389 मरीजों का न तो पंजीयन हो सका और न ही जांच हुई। इससे मरीजों को परेशान होना पड़ा। बगैर जांच रिपोर्ट देखे डॉक्टर दवा लिखने से हाथ खड़ा कर दे रहे थे। लैब में बैठे कर्मचारी सर्वर फेल होने की जानकारी मरीजों को देते रहे। नाराज कुछ मरीजों ने हंगामा शुरू कर दिया। इस पर चिकित्सकों ने बगैर जांच रिपोर्ट देखे दवा लिखना शुरू कर दिया। गंभीर मरीज प्राइवेट सेंटर पर जाकर अपनी जांच करा रहे थे।
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इसका फायदा प्राइवेट पैथालॉजी संचालक उठा रहे थे। वे मोटी रकम वसूल रहे थे। मगर जिम्मेेदार इससे पूरी तरह अनजान बने रहे। जिला अस्पताल के सीएमएस ने बताया कि जो खामियां आई हैं उसे दूर कराने के लिए बात की गई है। मैकेनिक लगे हुए हैं। शुक्रवार को यह दिक्कत फिर सामने नहीं आएगी।
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जिला अस्पताल के पैथालॉजी में आधुनिक मशीनें लगी हैं। यहां ऑनलाइन पंजीयन से लेकर जांच तक की व्यवस्था है। मरीज पर्चा देकर कंप्यूटर में फीड कराता है। इसके बाद सैंपल लेकर जांच के लिए लैब भेजा जाता है। कंप्यूटर से मिलने वाले सीरियल नंबर के मुताबिक मरीजों को जांच रिपोर्ट दी जाती है। तकनीकी खराबी के चलते गुरुवार सुबह आठ बजे से ही सर्वर फेल रहा।
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इससे जांच कराने आए 389 मरीजों का न तो पंजीयन हो सका और न ही जांच हुई। इससे मरीजों को परेशान होना पड़ा। बगैर जांच रिपोर्ट देखे डॉक्टर दवा लिखने से हाथ खड़ा कर दे रहे थे। लैब में बैठे कर्मचारी सर्वर फेल होने की जानकारी मरीजों को देते रहे। नाराज कुछ मरीजों ने हंगामा शुरू कर दिया। इस पर चिकित्सकों ने बगैर जांच रिपोर्ट देखे दवा लिखना शुरू कर दिया। गंभीर मरीज प्राइवेट सेंटर पर जाकर अपनी जांच करा रहे थे।
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इसका फायदा प्राइवेट पैथालॉजी संचालक उठा रहे थे। वे मोटी रकम वसूल रहे थे। मगर जिम्मेेदार इससे पूरी तरह अनजान बने रहे। जिला अस्पताल के सीएमएस ने बताया कि जो खामियां आई हैं उसे दूर कराने के लिए बात की गई है। मैकेनिक लगे हुए हैं। शुक्रवार को यह दिक्कत फिर सामने नहीं आएगी।

जिला अस्पताल पैथलाजी में शार्ट सर्किट से खराब हुए उपकरणों को दुरूस्त करते इंजीनियर।- फोटो : PRATAPGARH