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माह भर में मॉडल बस स्टैंड के 40 बस माह हो गई खराब
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प्रतापगढ़। वर्कशाप के कर्मचारियों की लापरवाही की वजह से माहभर के भीतर मॉडल बस स्टैंड की 40 बसें सड़क पर चलने लायक नहीं बची हैं। इनमें से दस बसें ऐसी हैं जिनका इंजन सीज हो गया है। दस बसों की स्टेयरिंग जाम हो गई। 20 बसों की बैटरी खराब हो गई है। इससे ये बसें रास्ते में कहीं भी बंद हो जाती है। बसों को स्टार्ट करने के लिए यात्रियों से धक्का दिलाना पड़ता है।
परिवहन निगम ने विधानसभा चुनाव से पहले प्रतापगढ़ बस स्टैंड की 64 बसों की मरम्मत कराई थी। विधानसभा चुनाव कराने के बाद होली के त्योहार तक बसों का लगातार संचालन किया गया। इस दौरान वर्कशाप के कर्मचारियों ने बसों की सर्विसिंग की तरफ ध्यान नहीं दिया। इसका नतीजा यह हुआ कि निगम की 64 बसों में से 40 खराब हो चुकी हैं। इनमें दस का इंजन सीज हो गया है वहीं, दस बसों की स्टेयरिंग जाम हो गई है।
सड़क पर बस लेकर निकलते समय चालक सहमे रहते हैं। 20 बसों की बैटरी खराब हो गई है। रोडवेज कर्मचारियों को पहले इन बसों को धक्का देकर चालू कराना पड़ता है। चालक किसी तरह सड़क पर लेकर निकल जाते हैं तो रास्ते में फिर बसों के बंद होने की आशंका बनी रहती है।
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चालक खड़े कर देते हैं हाथ, कार्रवाई का भय दिखाते हैं अफसर
खटारा हो चुकी बसों को लेकर चलने से चालक और परिचालक डरे रहते हैं। खटारा बसों को डिपो से बाहर निकालने से इनकार कर देते हैं। वर्कशाप के कर्मचारी और स्टेशन अधीक्षक कार्रवाई का भय दिखाकर जबरन बस को लेकर लंबी दूरी पर जाने के लिए कहते हैं। इससे चालक और परिचालक परेशान होते हैं।
जो बसें खटारा हैं उनकी मरम्मत के लिए वर्कशाप के इंचार्ज को निर्देश दिया गया है। जिनका इंजन सीज हो गया है, उनकी मरम्मत कराने के लिए कहा गया है।
पीके कटिहार, एआरएम, रोडवेज
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परिवहन निगम ने विधानसभा चुनाव से पहले प्रतापगढ़ बस स्टैंड की 64 बसों की मरम्मत कराई थी। विधानसभा चुनाव कराने के बाद होली के त्योहार तक बसों का लगातार संचालन किया गया। इस दौरान वर्कशाप के कर्मचारियों ने बसों की सर्विसिंग की तरफ ध्यान नहीं दिया। इसका नतीजा यह हुआ कि निगम की 64 बसों में से 40 खराब हो चुकी हैं। इनमें दस का इंजन सीज हो गया है वहीं, दस बसों की स्टेयरिंग जाम हो गई है।
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सड़क पर बस लेकर निकलते समय चालक सहमे रहते हैं। 20 बसों की बैटरी खराब हो गई है। रोडवेज कर्मचारियों को पहले इन बसों को धक्का देकर चालू कराना पड़ता है। चालक किसी तरह सड़क पर लेकर निकल जाते हैं तो रास्ते में फिर बसों के बंद होने की आशंका बनी रहती है।
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चालक खड़े कर देते हैं हाथ, कार्रवाई का भय दिखाते हैं अफसर
खटारा हो चुकी बसों को लेकर चलने से चालक और परिचालक डरे रहते हैं। खटारा बसों को डिपो से बाहर निकालने से इनकार कर देते हैं। वर्कशाप के कर्मचारी और स्टेशन अधीक्षक कार्रवाई का भय दिखाकर जबरन बस को लेकर लंबी दूरी पर जाने के लिए कहते हैं। इससे चालक और परिचालक परेशान होते हैं।
जो बसें खटारा हैं उनकी मरम्मत के लिए वर्कशाप के इंचार्ज को निर्देश दिया गया है। जिनका इंजन सीज हो गया है, उनकी मरम्मत कराने के लिए कहा गया है।
पीके कटिहार, एआरएम, रोडवेज