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परीक्षा केंद्रों पर नहीं लगे सीसीटीवी कैमरे, कैसे रुकेगी नकल

Fri, 19 Jan 2018 07:52 PM IST
Updated Fri, 19 Jan 2018 07:52 PM IST
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परीक्षा केंद्रों पर नहीं लगे सीसीटीवी कैमरे, कैसे रुकेगी नकल
केंद्रों पर नहीं लगे सीसीटीवी कैमरे, कैसे रुकेगी नकल
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कुछ परीक्षा केंद्रों पर खानापूर्ति के लिए लगवाए गए कैमरे
जिले के 222 परीक्षा केंद्रों पर होंगी यूपी बोर्ड की परीक्षाएं
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडियट की परीक्षाएं इस बार सीसीटीवी कैमरे की नजर में कराने की योजना है, लेकिन कई परीक्षा केंद्रों पर अभी कैमरे ही नहीं लगाए गए हैं। ऐसे में विभाग के नकलविहीन परीक्षा कराने के दावे पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिन केंद्रों पर कैमरे लगवाए भी गए हैं, वहां सिर्फ खानापूर्ति की गई है।
नकलविहीन परीक्षा को लेकर विभाग की ओर शिक्षासत्र की शुरुआत से ही तैयारी हो रही है। इस बार परीक्षार्थियों की संख्या के अनुरूप केंद्र व्यवस्थापकों की तैनाती की जाएगी। 200 छात्रों पर एक व्यवस्थापक की नजर रहेगी। जिले में कुल 222 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। नकलविहीन परीक्षा कराने के लिए विभाग की ओर से शुरू से ही सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने के निर्देश दिए जा रहे हैं। इसे लेकर कई बार बैठक भी हो चुकी है। विभागीय अधिकारियों द्वारा प्रधानाचार्यों को निर्देशित भी किया जा चुका है। विभाग ने शिक्षासत्र की शुरुआत में ही आदेश दिया था कि विद्यालय इसकी व्यवस्था आकस्मिक व्यय मद से कराकर रिपोर्ट दें। मगर अब भी अधिकांश परीक्षा केंद्र ऐसे हैं, जहां सीसीटीवी कैमरे नहीं लगाए गए हैं। जिन केंद्रों ने सीसीटीवी कैमरे की रिपेार्ट भेजी है, उनका दायरा महज प्रधानाचार्य के चैंबर व परिसर के बाहर तक ही सीमित है। कक्ष तक कैमरे नहीं लग सके हैं। जिला विद्यालय निरीक्षक डा. बृजेश मिश्र का दावा है कि सीसीटीवी कैमरे लगाने का निर्देश दिया गया है। रिपोर्ट शत प्रतिशत केंद्रों पर लगाए जाने की है।
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इनसेट---------------
बीते साल हुई थी नकल
2016-2017 सत्र की बोर्ड परीक्षा में नकल माफिया ने खेल किया था। लाख प्रयास के बाद भी नकल माफिया पर शिकंजा कसने में प्रशासन नाकाम साबित रहा। परीक्षा के अंतिम चरण तक नकल माफिया हावी रहे। अब इस सत्र में पिछले सत्र के मुकाबले कड़ी व्यवस्था का दावा किया जा रहा है, लेकिन इसकी हकीकत तो परीक्षा के दौरान ही पता चलेगी।
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बारिश न हुई तो प्रभावित होगी गेहूं की पैदावार
प्रतापगढ़। दो-तीन से मौसम का मिजाज बदल गया है। धूप व बढ़ते तापमान से गेहूं की फसल पर संकट मंडरा रहा है। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक ठंड देर से शुरू होकर जल्द खत्म हो रही है। मौसम का रुख यदि ऐसे ही रहा और बारिश न हुई तो पैदावार पर असर पड़ेगा। करीब 35 प्रतिशत पैदावार घट सकती है।

गेहूं की बुवाई के लिए 15 नंबर तक का समय उपर्युक्त माना जाता है। इस समयावधि में बुवाई करने से पैदावार अच्छी होती है। इसे ध्यान में रखकर जिलेभर के अधिकांश किसानों ने बुवाई की थी। नवंबर में बुवाई के बाद दिसंबर के अंतिम चरण तक पारा चढ़ा रहा। अधिकतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम 19 तक रहा। इससे गेहूं की फसल पर विपरीत असर पड़ा। जनवरी में ठंड की शुरुआत हुई। शीतलहर और कड़ाके की ठंड गेहूं के लिए फायदेमंद थी। माना जा रहा था कि मध्य फरवरी तक ऐसी ही स्थिति रहेगी, लेकिन 15 दिन में ठंड के तेवर में फिलहाल कमी आने लगी है। मकर संक्रांति के बाद मौसम का मिजाज बदल गया और धूप खिलने लगी। अधिकतम तापमान में भी वृुद्धि होने लगी। शुक्रवार को अधिकतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। जिला कृषि अधिकारी अश्वनी कुमार ने बताया कि बढ़ता तापमान गेहूं की फसल के लिए नुकसानदायक है। इससे पैदावार प्रभावित होगा। बारिश जरूरी है। फरवरी व मार्च में कम से कम तीन बार हल्की बारिश हो, तभी गेहूूं के पौधों का विकास हो सकेगा।


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