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झोलाछापों को किराए पर जगह देना भवन स्वामियों को पड़ेगा महंगा
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झोलाछापों को किराए पर जगह देना भवन स्वामियों को पड़ेगा महंगा
सीएमओ ने जारी किया आदेश, जांच के लिए नामित की टीम
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। झोलाछापों को क्लीनिक या नर्सिंगहोम खोलने के लिए दुकान या भवन देना अब लोगों को महंगा पड़ेगा। छापेमारी के दौरान पंजीकरण न मिलने पर भवन को सील कर दिया जाएगा। जिसकी जिम्मेदारी भवन स्वामी की होगी। सीएमओ ने इसके लिए आदेश जारी कर दिया है।
जनपद में ज्यादातर नर्सिंगहोम, क्लीनिक, पैथालॉजी सेंटर झोलाछाप डॉक्टर किराए के मकान या दुकान में संचालित कर रहे हैं। अधिकांश का स्वास्थ्य विभाग में पंजीकरण नहीं है। स्वास्थ्य विभाग कार्रवाई करने जाता है तो संचालक अस्पताल, क्लीनिक या फिर पैथालॉजी को खुला छोड़कर भाग लेते हैं। किराए का भवन होने के कारण स्वास्थ्य विभाग के अफसर सील नहीं कर पाते हैं। इस प्रकार से कई चिकित्सक कार्रवाई से बच जाते हैं। मगर अब स्वास्थ्य विभाग ने नया रास्ता निकाला है। ऐसे में सीएमओ ने आदेश जारी कर दिया है कि भवन स्वामी किराए पर मकान देने से पूर्व यह पहले जानकारी जुटा लें कि जिस चिकित्सक को वह अपना भवन किराए पर देने जा रहे हैं उसका स्वास्थ्य विभाग में पंजीकरण हुआ है या नहीं। अपर शोध अधिकारी आरपी चौधरी ने बताया कि सीएमओ की ओर से आदेश जारी कर दिया गया है। सभी चिकित्सक और दुकानदारों को नोटिस भेजकर बता दिया है कि यदि छापेमारी के दौरान झोलाछाप या फिर बगैर पंजीयन के चिकित्सक मरीज देखते पकड़े जाते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई के साथ ही भवन को सीज कर दिया जाएगा। इसकी जिम्मेदारी भवन स्वामियों का होगा।
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सीएमओ ने जारी किया आदेश, जांच के लिए नामित की टीम
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। झोलाछापों को क्लीनिक या नर्सिंगहोम खोलने के लिए दुकान या भवन देना अब लोगों को महंगा पड़ेगा। छापेमारी के दौरान पंजीकरण न मिलने पर भवन को सील कर दिया जाएगा। जिसकी जिम्मेदारी भवन स्वामी की होगी। सीएमओ ने इसके लिए आदेश जारी कर दिया है।
जनपद में ज्यादातर नर्सिंगहोम, क्लीनिक, पैथालॉजी सेंटर झोलाछाप डॉक्टर किराए के मकान या दुकान में संचालित कर रहे हैं। अधिकांश का स्वास्थ्य विभाग में पंजीकरण नहीं है। स्वास्थ्य विभाग कार्रवाई करने जाता है तो संचालक अस्पताल, क्लीनिक या फिर पैथालॉजी को खुला छोड़कर भाग लेते हैं। किराए का भवन होने के कारण स्वास्थ्य विभाग के अफसर सील नहीं कर पाते हैं। इस प्रकार से कई चिकित्सक कार्रवाई से बच जाते हैं। मगर अब स्वास्थ्य विभाग ने नया रास्ता निकाला है। ऐसे में सीएमओ ने आदेश जारी कर दिया है कि भवन स्वामी किराए पर मकान देने से पूर्व यह पहले जानकारी जुटा लें कि जिस चिकित्सक को वह अपना भवन किराए पर देने जा रहे हैं उसका स्वास्थ्य विभाग में पंजीकरण हुआ है या नहीं। अपर शोध अधिकारी आरपी चौधरी ने बताया कि सीएमओ की ओर से आदेश जारी कर दिया गया है। सभी चिकित्सक और दुकानदारों को नोटिस भेजकर बता दिया है कि यदि छापेमारी के दौरान झोलाछाप या फिर बगैर पंजीयन के चिकित्सक मरीज देखते पकड़े जाते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई के साथ ही भवन को सीज कर दिया जाएगा। इसकी जिम्मेदारी भवन स्वामियों का होगा।
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