{"_id":"59491e884f1c1b18778b4609","slug":"131497964168-pratapgarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"78 दुकानों में मिले 241 फर्जी राशनकार्ड 17-52-30","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
78 दुकानों में मिले 241 फर्जी राशनकार्ड 17-52-30
Updated Tue, 20 Jun 2017 06:39 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रतापगढ़। सपा राज में फर्जी राशनकार्ड बनाकर गरीबों का राशन डकारने वाले अब धीरे-धीरे बेनकाब होने लगे हैं। जिले में चल रही जांच में अभी तक 78 दुकानों के सत्यापन में करीब 241 राशनकार्ड फर्जी मिले हैं। इनमें अधिकांश राशनकार्ड कोटेदारों ने फर्जी फीड कराकर स्वयं अनाज डकार रहे थे।
राशनकार्डों के सत्यापन में धांधली उजागर होने लगी है। जिले भर में इन दिनों अभियान चलाकर इसकी जांच कराई जा रही है। विभाग में अभी तक 78 दुकानों के राशनकार्डों के सत्यापन में खुलासा हुआ है कि 241 फर्जी राशनकार्ड बनवा दिया गया था।इनमें अधिकांश कार्ड ऐेसे भी हैं, जिनकी जानकारी परिवार के सदस्यों को नहीं है। मगर उनके नाम पर आने वाला राशन काटेदार हजम कर जाते थे। अधिकांश परिवार ऐसे हैं, जो वर्षों से मुंबई और दिल्ली में रहते हैं, मगर उनके नाम दुकानदार प्रतिमाह राशन अपनी झोली में भर रहे हैं। फिलहाल सत्यापन ने राशनकार्डों के बनाने में हुई मनमानी की पोल खोल दी है। जिला पूर्ति अधिकारी मनीष विक्रम ने बताया कि जिले में युद्ध स्तर पर राशनकार्डों का सत्यापन किया जा रहा है। 30 जून तक सभी ग्राम पंचायतों की रिपोर्ट आने के बाद स्थिति साफ हो जाएगी। उन्होंने बताया कि जिस गांव में जो अपात्र हटाए जा रहे हैं, उनके स्थान पर पात्र व्यक्तियों को शामिल किया जाएगा।
विज्ञापन
राशनकार्डों के सत्यापन में धांधली उजागर होने लगी है। जिले भर में इन दिनों अभियान चलाकर इसकी जांच कराई जा रही है। विभाग में अभी तक 78 दुकानों के राशनकार्डों के सत्यापन में खुलासा हुआ है कि 241 फर्जी राशनकार्ड बनवा दिया गया था।इनमें अधिकांश कार्ड ऐेसे भी हैं, जिनकी जानकारी परिवार के सदस्यों को नहीं है। मगर उनके नाम पर आने वाला राशन काटेदार हजम कर जाते थे। अधिकांश परिवार ऐसे हैं, जो वर्षों से मुंबई और दिल्ली में रहते हैं, मगर उनके नाम दुकानदार प्रतिमाह राशन अपनी झोली में भर रहे हैं। फिलहाल सत्यापन ने राशनकार्डों के बनाने में हुई मनमानी की पोल खोल दी है। जिला पूर्ति अधिकारी मनीष विक्रम ने बताया कि जिले में युद्ध स्तर पर राशनकार्डों का सत्यापन किया जा रहा है। 30 जून तक सभी ग्राम पंचायतों की रिपोर्ट आने के बाद स्थिति साफ हो जाएगी। उन्होंने बताया कि जिस गांव में जो अपात्र हटाए जा रहे हैं, उनके स्थान पर पात्र व्यक्तियों को शामिल किया जाएगा।
विज्ञापन