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कागज पर होगी खेल व शारीरिक शिक्षा की प्रयोगात्मक परीक्षा
Updated Fri, 14 Dec 2018 11:33 PM IST
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प्रतापगढ़। माध्यमिक विद्यालयों में खेल शिक्षकों का अभाव वर्षों से बना है। पूरे सत्र में तो बच्चों को खेल शिक्षा से संबंधित किताबी ज्ञान मिला और न ही शारीरिक शिक्षा। प्रशिक्षण के नाम पर पूरे सत्र खानापूर्ति की गई। अब कालेजों में खेल व शारीरिक शिक्षा की प्रयोगात्मक परीक्षा में भी फर्ज अदायगी होने की संभावना है। शिक्षकों की टीम चार्ट बनाकर नंबर बांटने का कोरम पूरा कर परीक्षा के संपादन की रिपोर्टिंग कर फुर्सत पा लेगी। जबकि बच्चों को इसकी जानकारी तक नहीं रहेगी। विभागीय अनदेखी के चलते बच्चों की खेल प्रतिभा का विकास नहीं हो पा रहा है।
जिले में 37 राजकीय, 78 सहायता प्राप्त व 545 वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालय हैं। विद्यालयों में विषय वस्तु के पाठ्यक्रम के साथ खेल व शारीरिक शिक्षा की कक्षाएं संचालित करने का निर्देश है। खेल शिक्षक का दायित्व है कि वह विद्यालय में प्रार्थना सभा, बच्चों को खेल गतिविधियों की जानकारी के साथ ही शारीरिक शिक्षा व खेल संबंधी किताबी ज्ञान भी प्रदान करें। इसकी बाकायदा 100 अंक की परीक्षा होती है। 30 अंक का प्रायोगिक और 70 अंक की लिखित परीक्षा। लिखित परीक्षा में फेल होने पर परीक्षार्थी दुबारा यह परीक्षा दे सकता है, मगर प्रयोगात्मक परीक्षा में फेल होने पर ऐसा नहीं है। इस परीक्षा का आंतरिक मूल्यांकन होता है।
मगर मजे की बात यह है कि जिले के माध्यमिक विद्यालयों में करीब 80 फीसदी ऐसे विद्यालय हैं जहां खेल शिक्षक ही नहीं हैं। सालों से शिक्षकों की कमी के चलते विद्यालयों में पूरे सत्र खेल व शारीरिक शिक्षा के नाम पर महज फर्ज अदायगी होती आ रही है। न तो मौखिक, न ही प्रैक्टिकल और न ही किताबी ज्ञान बच्चों को मिल सका है। अब बोर्ड परीक्षा नजदीक आने पर प्रयोगात्मक परीक्षा की रूपरेखा तैयार की जा रही है। कालेज शिक्षक मनमाने तरीके से नंबर बांटकर फुर्सत पा लेंगे। चार्ट बनाकर आनलाइन इसका अपडेशन करके छुट्टी कर लेंगे। मगर सवाल यह है कि इस प्रक्रिया से बच्चों के भीतर खेल प्रतिभा का विकास नहीं हो रहा है।
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सहायता प्राप्त व वित्तविहीन विद्यालयों में खेल शिक्षकों की तैनाती की गई है। राजकीय विद्यालयों में खेल शिक्षकों की कमी है। खेल शिक्षकों की तैनाती की प्रक्रिया शासन स्तर पर चल रही है। जल्द ही यहां भी खेल शिक्षकों की तैनाती होगी।
डा. एसी यादव, डीआईओएस।
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जिले में 37 राजकीय, 78 सहायता प्राप्त व 545 वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालय हैं। विद्यालयों में विषय वस्तु के पाठ्यक्रम के साथ खेल व शारीरिक शिक्षा की कक्षाएं संचालित करने का निर्देश है। खेल शिक्षक का दायित्व है कि वह विद्यालय में प्रार्थना सभा, बच्चों को खेल गतिविधियों की जानकारी के साथ ही शारीरिक शिक्षा व खेल संबंधी किताबी ज्ञान भी प्रदान करें। इसकी बाकायदा 100 अंक की परीक्षा होती है। 30 अंक का प्रायोगिक और 70 अंक की लिखित परीक्षा। लिखित परीक्षा में फेल होने पर परीक्षार्थी दुबारा यह परीक्षा दे सकता है, मगर प्रयोगात्मक परीक्षा में फेल होने पर ऐसा नहीं है। इस परीक्षा का आंतरिक मूल्यांकन होता है।
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मगर मजे की बात यह है कि जिले के माध्यमिक विद्यालयों में करीब 80 फीसदी ऐसे विद्यालय हैं जहां खेल शिक्षक ही नहीं हैं। सालों से शिक्षकों की कमी के चलते विद्यालयों में पूरे सत्र खेल व शारीरिक शिक्षा के नाम पर महज फर्ज अदायगी होती आ रही है। न तो मौखिक, न ही प्रैक्टिकल और न ही किताबी ज्ञान बच्चों को मिल सका है। अब बोर्ड परीक्षा नजदीक आने पर प्रयोगात्मक परीक्षा की रूपरेखा तैयार की जा रही है। कालेज शिक्षक मनमाने तरीके से नंबर बांटकर फुर्सत पा लेंगे। चार्ट बनाकर आनलाइन इसका अपडेशन करके छुट्टी कर लेंगे। मगर सवाल यह है कि इस प्रक्रिया से बच्चों के भीतर खेल प्रतिभा का विकास नहीं हो रहा है।
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सहायता प्राप्त व वित्तविहीन विद्यालयों में खेल शिक्षकों की तैनाती की गई है। राजकीय विद्यालयों में खेल शिक्षकों की कमी है। खेल शिक्षकों की तैनाती की प्रक्रिया शासन स्तर पर चल रही है। जल्द ही यहां भी खेल शिक्षकों की तैनाती होगी।
डा. एसी यादव, डीआईओएस।