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तीन साल में भी पूरा नहीं हुआ महिला अस्पताल का निर्माण
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पूरनपुर में निर्माणाधीन महिला चिकित्सालय।
- फोटो : PILIBHIT
पूरनपुर। नगर में 50 बेड का 7.34 करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन महिला चिकित्सालय का निर्माण जून 2021 में पूरा होना था, लेकिन एक साल बाद भी निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका है। हालांकि निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। मगर अस्पताल का निर्माण पूरा न होने से महिला मरीजों को मिलने वाली चिकित्सीय सेवा प्रभावित हैं।
पूरनपुर देहात में महिला चिकित्सालय के पुराने भवन को ध्वस्त कर 50 बेड का नए भवन का निर्माण 7.34 करोड़ रुपये की लागत से फरवरी 2019 में शुरू किया गया था। निर्माण कार्य जून 2021 में पूरा होना था।करीब 85 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। मुख्य द्वार के अलावा लिफ्ट लगने के साथ फिनिशिंग आदि का काम चल रहा है। महिला चिकित्सालय को परिसर के ही एक छोटे भवन में चलाया जा रहा है। यहां संविदा चिकित्सक के अलावा चौकीदार कम स्वीपर सहित मात्र तीन कर्मचारियों की तैनाती है। फार्मासिस्ट की भी तैनाती नहीं है।
सीएचसी और महिला चिकित्सालय में स्टाफ नर्स करा रहीं प्रसव
महिला चिकित्सालय संविदा चिकित्सक जबकि सीएचसी में आरवीएस के तहत तैनात महिला चिकित्सक की तैनाती है। सीएचसी में प्रतिमाह औसतन 250 प्रसव और महिला चिकित्सालय में प्रतिमाह औसतन 50 प्रसव होते हैं। एमबीबीएस महिला चिकित्सक की तैनाती न होने से स्टाफ नर्स प्रसव कराती हैं।
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अटैचमेंट का चल रहा खेल
सीएचसी में प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. एएच अंसारी, डॉ. चंद्र कुमार और दंत चिकित्सक डॉ. नितिन रस्तोगी की तैनाती है। सीएचसी और माधोटांडा सीएचसी में चिकित्सकों और अन्य स्टाफ की कमी के चलते अन्य पीएचसी के चिकित्सकों को अटैच कर काम चलाया जा रहा है। जटपुरा पीएचसी में संविदा पर तैनात आयुष चिकित्सक डॉ. रेहान को भी सीएचसी से अटैच किया गया है। सीएचसी में प्रतिदिन औसतन सात सौ मरीज पहुंचते है।
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पूरनपुर देहात में महिला चिकित्सालय के पुराने भवन को ध्वस्त कर 50 बेड का नए भवन का निर्माण 7.34 करोड़ रुपये की लागत से फरवरी 2019 में शुरू किया गया था। निर्माण कार्य जून 2021 में पूरा होना था।करीब 85 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। मुख्य द्वार के अलावा लिफ्ट लगने के साथ फिनिशिंग आदि का काम चल रहा है। महिला चिकित्सालय को परिसर के ही एक छोटे भवन में चलाया जा रहा है। यहां संविदा चिकित्सक के अलावा चौकीदार कम स्वीपर सहित मात्र तीन कर्मचारियों की तैनाती है। फार्मासिस्ट की भी तैनाती नहीं है।
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सीएचसी और महिला चिकित्सालय में स्टाफ नर्स करा रहीं प्रसव
महिला चिकित्सालय संविदा चिकित्सक जबकि सीएचसी में आरवीएस के तहत तैनात महिला चिकित्सक की तैनाती है। सीएचसी में प्रतिमाह औसतन 250 प्रसव और महिला चिकित्सालय में प्रतिमाह औसतन 50 प्रसव होते हैं। एमबीबीएस महिला चिकित्सक की तैनाती न होने से स्टाफ नर्स प्रसव कराती हैं।
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अटैचमेंट का चल रहा खेल
सीएचसी में प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. एएच अंसारी, डॉ. चंद्र कुमार और दंत चिकित्सक डॉ. नितिन रस्तोगी की तैनाती है। सीएचसी और माधोटांडा सीएचसी में चिकित्सकों और अन्य स्टाफ की कमी के चलते अन्य पीएचसी के चिकित्सकों को अटैच कर काम चलाया जा रहा है। जटपुरा पीएचसी में संविदा पर तैनात आयुष चिकित्सक डॉ. रेहान को भी सीएचसी से अटैच किया गया है। सीएचसी में प्रतिदिन औसतन सात सौ मरीज पहुंचते है।