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आखिर कब होगा देवाहुति गंगा का उद्धार

Tue, 24 Nov 2015 11:29 PM IST
Pilibhit
Pilibhit Updated Tue, 24 Nov 2015 11:29 PM IST
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When will finally devahuti Ganga 's salvation

देश में जहां लंबे अरसे स्वच्छता अभियान का डंका बजाया जा रहा है, वहीं अपने जिले की लाइफ लाइन कही जाने वाली देवहा नदी में रोजाना ही शहर भर का कूड़ा डाला जा रहा है। गंगा दशहरा पर्व के चलते बड़ी तादाद में श्रद्धालु प्रदूषित होती जा रही देवहा में डुबकी लगाएंगे। खास बात यह है कि यह विकट समस्या किसी भी नुमाइंदे की आंखों की किरकिरी नहीं बनी।

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शहर के पश्चिम में बहने वाली देवहा नदी का प्राचीन काल से ही विशेष महत्व है। देवहा की सहायक नदी खकरा शहर के उत्तर-पश्चिम में बहती हुई ब्रहमचारी घाट पर देवहा में विलीन हो जाती है। बदलते जमाने के साथ इन दोनों नदियों का पानी विषैला हो चुका है। यह लोगों की आस्था ही है कि गंगा दशहरा समेत अन्य पर्वों पर तमाम श्रद्धालु इसी नदी में डुबकी लगाते हैं, लेकिन वर्तमान में ज्यादातर श्रद्धालु घरों में स्नान कर पूजा पाठ करना पसंद कर रहे हैं।
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कूड़े से पट गई नदी की तलहटी
देवहा नदी को प्रदूषित करने में आम जनता से कहीं ज्यादा सरकारी महकमे जिम्मेदार है। रोजाना शहर भर का कूड़ा डालने के अलावा तमाम मरे पशु व उनका मलवा नदी में डाला जा रहा है। नगरपालिका के पास कोई स्थाई डलावघर न होने के कारण वर्षों से नदी को प्रदूषित करने का खेल बदस्तूर जारी है।
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किसी ने नहीं उठाई आवाज
देवहा नदी में डाले रहे कूड़ा आदि के चलते यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या साल दर साल कम होती जा रही है। खास बात यह है कि आस्था के साथ हो रहे खिलवाड़ को लेकर न तो किसी स्वयंसेवी संगठन ने आवाज उठाई और न ही यहां के प्रशासन ने इस पर ध्यान दिया।


देवहा नदी को प्रदूषित होने से बचाने को कई बार आवाज उठाई गई, लेकिन न तो समाज चेता और न ही प्रशासन। यह आस्था के साथ खिलवाड़ तो है ही, साथ ही पर्यावरण के लिए भी घातक है।
प्रेम कुमार मिश्रा, पुजारी, मनकामेश्वर ब्रहमचारी घाट मंदिर

यह एक बड़ी समस्या है। समाज के लोगों को एकजुट होकर आगे होना है। नदी को प्रदूषण मुक्त कराने के लिए शीघ्र ही प्रशासन से भी मिला जाएगा।
प्रदीप नवरंग, जिला प्रमुख, स्वच्छ भारत स्वस्थ भारत।

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