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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pilibhit News ›   We do not see the day of Gomti perennial Bhurte

बहुरते नहीं दिख रहे सदानीरा गोमती के दिन

Thu, 21 Apr 2016 10:47 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पीलीभीत
ब्यूरो/अमर उजाला, पीलीभीत Updated Thu, 21 Apr 2016 10:47 PM IST
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गोमती का पीलीभीत से लखनऊ तक अविरल प्रवाह रखने की कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव की घोषणा पर सिंचाई विभाग के अफसर चार महीने बाद भी अमल शुरू नही कर सके हैं। कैबिनेट मंत्री शिवपाल ने घोषणा की थी कि गोमती में लखनऊ तक पांच सौ क्यूसेक पानी पहुंचाया जाएगा, लेकिन नतीजा शून्य है। अभियंताओं ने इससे जुड़े जो प्रोजेक्ट भेजे थे, वे भी ठंडे बस्ते में पड़े हैं।
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गोमती को स्वच्छ और अविरल बनाए रखने के प्रति जल वैज्ञानिक, साधू-संत, समाजसेवी समय-समय पर सरकार का ध्यान इस ओर केंद्रित करते रहे हैं। बसपा शासनकाल में मुख्यमंत्री के कैबिनेट सचिव शशांक शेखर ने गोमती के उद्गम स्थल का निरीक्षण किया था। इसके बाद गोमती को सौ क्यूसेक पानी लखनऊ तक देने के निर्देश दिए गए थे। इसके लिए मनरेगा से साढ़े बाइस करोड़ लागत के दो प्रोजेक्ट स्वीकृत किए गए थे, लेकिन अभियंताओं ने कमीशनबाजी का खेल न होने पर तरह-तरह की आपत्तियां लगाकर इन प्रोजेक्ट को खटाई में डाल दिया। 
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चार माह पूर्व हुई थी पांच सौ क्यूसेक पानी देने की घोषणा
करीब चार महीना पहले गोमती के उद्गम स्थल पर कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने अभियंताओं को अविरल प्रवाह के लिए पांच सौ क्यूसेक पानी देने के निर्देश दिए थे। इस घोषणा के बाद लोगों को उम्मीद थी कि यह सदानीरा पुनर्जीवित हो जाएगी लेकिन नतीजा सिफर ही रहा।
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मंत्री की नब्ज भांप शुरू कर दी गई थी खानापूरी
तत्कालीन बसपा सरकार तो गोमती को सौ क्यूसेक पानी नहीं दे सकी, लेकिन पांच सौ क्यूसेक की घोषणा से लोग यह मान रहे थे कि शिवपाल सिंह यादव सत्ता में सबसे ताकतवर मंत्री हैं। उनके आदेश का अनुपालन तो होगा ही। शारदा सागर के तत्कालीन अधिशासी अभियंता जीवनराम ने माधोटांडा रजवाहा से 25 क्यूसेक पानी उद्गम स्थल तक देने को सवा दो करोड़ का प्रोजेक्ट बनाकर भेजा था। वहीं उद्गम स्थल के आगे हेडवर्क्स खंड शारदा नहर से पांच सौ क्यूसेक पानी कैसे पहुंचाया जाए, इसको लेकर प्रोजेक्ट बनाने के निर्देश दिए थे। सवा दो करोड़ का प्रोजेक्ट तो शासन ने मंजूर भी कर लिया था, लेकिन बजट आवंटन होने में देरी के चलते आज तक कार्य शुरू नहीं हो सका।


सर्वे में 200 किसानों की आ रही है भूमि 
तत्कालीन अभियंता जीवनराम ने उदगम स्थल से गोमती की खुदाई को कितने किसानों की भूमि आएगी, सर्वे शुरू कराया था। सर्वे के मुताबिक माधोटांडा, लोहरपुरी फुल्हर, नवदिया टोडर, नवदिया धनेष, देवीपुर, ककरौआ, पचपेड़ाखुर्द, नवदिया मकसूदापुर सहित असम हाइवे तक लगभग दो सौ किसानों की भूमि खुदाई में आएगी। उनको या तो भूमि का मुआवजा देना पड़ेगा या विभाग यह पता लगाएगा कि पूर्व लेखपालों ने गोमती नदी की भूमि को राजस्व अभिलेखों में कहीं गलत ढंग से किसानों के नाम तो दर्ज नहीं कर दिया था। हालांकि अब जिस तरह से मामला ढीला पड़ता दिखाई दे रहा है, उससे लगता है कि बसपा के कार्यकाल की तरह कहीं सदानीरा सपा कार्यकाल में भी कहीं सूखी न रह जाए।
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