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28 साल पुराने मुकदमे में पूर्व विधायक वीएम सिंह दोषमुक्त
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पीलीभीत। पूर्व विधायक और किसान नेता वीएम सिंह को तृतीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश छांगुर राम ने 28 साल पुराने मामले में दोषमुक्त कर दिया है। पूरनपुर के तत्कालीन एसडीएम एसपी वर्मा ने एससी-एसटी समेत अन्य धाराओं में थाना पूरनपुर में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
पूरनपुर के तत्कालीन एसडीएम एसपी वर्मा ने 29 जनवरी 1994 को पूर्व विधायक और किसान नेता के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें कहा था कि हजारा क्षेत्र के भरतपुर स्वास्थ्य केंद्र में परिवार कल्याण कैंप का आयोजन किया गया था। कैंप में महिलाएं नसबंदी ऑपरेशन कराने आईं थीं। ओटी कक्ष में ऑपरेशन किए जा रहे थे। आरोप था कि करीब तीन बजे वीएम सिंह कार्यकर्ताओं के साथ कैंप में पहुंच गए और महिलाओं को जाने के लिए कहने लगे। जब विरोध किया, तो बलपूर्वक महिलाओं को डरा धमका कर भगाने लगे। दबाव में आकर ऑपरेशन कराने आईं महिलाएं भयभीत होकर भाग गईं। सभी महिलाएं नेपाल की थीं। यह भी आरोप लगाया था कि वीएम सिंह जूते पहनकर ओटी कक्ष में घुस आए। वीएम सिंह ने अधिकारियों को देशद्रोही बताते हुए अपशब्दों व असंसदीय भाषा का प्रयोग करते हुए धमकी दी। सरकारी काम में भी बाधा डाली। मुकदमा पूरनपुर में दर्ज करने के बाद उसे हजारा थाने को ट्रांसफर कर दिया गया। विवेचना के बाद पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। राज्य सरकार अभियोजन की ओर से कई गवाह पेश किए गए। सुनवाई के दौरान वादी तत्कालीन एसडीएम व दो गवाहों वीडीओ और प्रधान की मौत हो गई। न्यायालय ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुना और पत्रावली का अवलोकन करने के बाद वीएम सिंह को निर्दोष पाया। पूर्व विधायक वीएम सिंह की ओर से पैरवी अधिवक्ता सैय्यद मोहम्म उरूज ने की।
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पूरनपुर के तत्कालीन एसडीएम एसपी वर्मा ने 29 जनवरी 1994 को पूर्व विधायक और किसान नेता के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें कहा था कि हजारा क्षेत्र के भरतपुर स्वास्थ्य केंद्र में परिवार कल्याण कैंप का आयोजन किया गया था। कैंप में महिलाएं नसबंदी ऑपरेशन कराने आईं थीं। ओटी कक्ष में ऑपरेशन किए जा रहे थे। आरोप था कि करीब तीन बजे वीएम सिंह कार्यकर्ताओं के साथ कैंप में पहुंच गए और महिलाओं को जाने के लिए कहने लगे। जब विरोध किया, तो बलपूर्वक महिलाओं को डरा धमका कर भगाने लगे। दबाव में आकर ऑपरेशन कराने आईं महिलाएं भयभीत होकर भाग गईं। सभी महिलाएं नेपाल की थीं। यह भी आरोप लगाया था कि वीएम सिंह जूते पहनकर ओटी कक्ष में घुस आए। वीएम सिंह ने अधिकारियों को देशद्रोही बताते हुए अपशब्दों व असंसदीय भाषा का प्रयोग करते हुए धमकी दी। सरकारी काम में भी बाधा डाली। मुकदमा पूरनपुर में दर्ज करने के बाद उसे हजारा थाने को ट्रांसफर कर दिया गया। विवेचना के बाद पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। राज्य सरकार अभियोजन की ओर से कई गवाह पेश किए गए। सुनवाई के दौरान वादी तत्कालीन एसडीएम व दो गवाहों वीडीओ और प्रधान की मौत हो गई। न्यायालय ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुना और पत्रावली का अवलोकन करने के बाद वीएम सिंह को निर्दोष पाया। पूर्व विधायक वीएम सिंह की ओर से पैरवी अधिवक्ता सैय्यद मोहम्म उरूज ने की।
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