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Pilibhit News: अमृतपाल का पुराना मददगार ही निकला विक्रमजीत का हैंडलर, पीलीभीत कनेक्शन फिर चर्चा में
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पीलीभीत। वारिस पंजाब दे संगठन से जुड़े नेटवर्क का उत्तर प्रदेश कनेक्शन एक बार फिर जांच एजेंसियों के रडार पर आ गया है। अमृतपाल सिंह को वर्ष 2023 में पंजाब पुलिस से बच निकलने में मदद करने के आरोप में जेल जा चुका जत्थेदार जोगा सिंह एक बार फिर गिरफ्तार किया गया है। इस बार उस पर अजनाला थाने पर हमले के आरोपी विक्रमजीत सिंह को नेपाल में एक वर्ष तक छिपाकर रखने, उसका खर्च उठाने और भारत लौटने पर वाहन उपलब्ध कराने का आरोप है।
गिरफ्तारी के बाद यूपी एटीएस, पंजाब पुलिस और स्थानीय पुलिस की टीमें पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं। जांच का फोकस अब पीलीभीत के पूरनपुर क्षेत्र में सक्रिय संभावित स्लीपर सेल और स्थानीय मददगारों की पहचान पर है। मार्च 2023 में जब अमृतपाल सिंह पंजाब पुलिस की कार्रवाई से बचते हुए फरार हुआ था, तब वह पीलीभीत क्षेत्र तक पहुंचा था। उस दौरान उसे सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने और आगे निकलने के लिए वाहनों की व्यवस्था करने में जत्थेदार जोगा सिंह की भूमिका सामने आई थी।
सीमा क्षेत्र से गिरफ्तारी के दौरान विक्रमजीत सिंह के पास से एक भारतीय आधार कार्ड बरामद हुआ, जो प्रारंभिक जांच में फर्जी पाया गया है। इसके अलावा उसके मोबाइल फोन से कई संदिग्ध चैट, संपर्क और अन्य डिजिटल साक्ष्य मिले हैं। जांच एजेंसियां इनकी फॉरेंसिक जांच कर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं।
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एटीएस और पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इस पूरे मामले में स्थानीय स्तर पर कुछ लोगों ने शरण, संसाधन और अन्य सहायता उपलब्ध कराई हो सकती है। इसी संभावना के आधार पर पूरनपुर और पीलीभीत के कई संदिग्ध संपर्कों की जानकारी जुटाई जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि कहीं कोई संगठित स्लीपर सेल लंबे समय से सक्रिय तो नहीं है। संवाद
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गिरफ्तारी के बाद यूपी एटीएस, पंजाब पुलिस और स्थानीय पुलिस की टीमें पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं। जांच का फोकस अब पीलीभीत के पूरनपुर क्षेत्र में सक्रिय संभावित स्लीपर सेल और स्थानीय मददगारों की पहचान पर है। मार्च 2023 में जब अमृतपाल सिंह पंजाब पुलिस की कार्रवाई से बचते हुए फरार हुआ था, तब वह पीलीभीत क्षेत्र तक पहुंचा था। उस दौरान उसे सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने और आगे निकलने के लिए वाहनों की व्यवस्था करने में जत्थेदार जोगा सिंह की भूमिका सामने आई थी।
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सीमा क्षेत्र से गिरफ्तारी के दौरान विक्रमजीत सिंह के पास से एक भारतीय आधार कार्ड बरामद हुआ, जो प्रारंभिक जांच में फर्जी पाया गया है। इसके अलावा उसके मोबाइल फोन से कई संदिग्ध चैट, संपर्क और अन्य डिजिटल साक्ष्य मिले हैं। जांच एजेंसियां इनकी फॉरेंसिक जांच कर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं।
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एटीएस और पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इस पूरे मामले में स्थानीय स्तर पर कुछ लोगों ने शरण, संसाधन और अन्य सहायता उपलब्ध कराई हो सकती है। इसी संभावना के आधार पर पूरनपुर और पीलीभीत के कई संदिग्ध संपर्कों की जानकारी जुटाई जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि कहीं कोई संगठित स्लीपर सेल लंबे समय से सक्रिय तो नहीं है। संवाद