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Pilibhit News: पीटीआर के जंगल मार्गों पर रात में नहीं चलेंगे वाहन, बढ़ेंगीं मुश्किलें

Tue, 03 Mar 2026 12:34 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 03 Mar 2026 12:34 AM IST
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Vehicles will not be allowed to ply on the forest routes of PTR at night, increasing difficulties.
शाम सात से सुबह पांच बजे तक लागू रहेगा प्रतिबंध, शहर, पूरनपुर, माधोटांडा, कलीनगर, लखीमपुर मार्ग होगा प्रभावित
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पीलीभीत। जंगल से होकर गुजरे जिले के प्रमुख मार्गों पर सोमवार शाम सात से अगले दिन सुबह तक वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगने से आमजन की मुश्किलें बढ़ गई हैं। शहर, माधोटांडा, कलीनगर, पूरनपुर, लखीमपुर आदि स्थानों को जाने वाले राहगीरों का रास्ता कठिन हो गया। पहले से क्षतिग्रस्त पुल-पुलिया और सीमित वैकल्पिक मार्गों के बीच यह प्रतिबंध लोगों की परेशानी का कारण बनता दिख रहा है। आदेश के विरोध में आए लोगों का कहना है कि विभाग को व्यावहारिक समाधान करना चाहिए।
पीलीभीत जिले का बड़ा भू-भाग जंगल से घिरा है। मुख्यालय समेत आसपास के जनपदों तक पहुंचने के लिए लोगों को जंगल मार्गों से होकर ही गुजरना पड़ता है। कई मुख्य मार्गों पर पुल और पुलिया पहले से ही क्षतिग्रस्त हैं। इससे दिन में भी आवागमन में दिक्कतें रहती हैं। इस बीच पीलीभीत टाइगर रिजर्व प्रशासन की ओर से जंगल मार्गों पर शाम सात से सुबह पांच बजे तक वाहनों की आवाजाही पर पूर्ण प्रतिबंध के आदेश जारी कर दिए गए हैं। पीटीआर के प्रभारी डीएफओ भरत कुमार डीके ने रविवार को रेंज अधिकारियों को जारी आदेश में सुप्रीम कोर्ट और एनटीसीए के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि वन क्षेत्र से गुजरने वाले सभी मार्गों पर रात्रिकालीन समय में सामान्य वाहनों का आवागमन पूरी तरह बंद रहेगा।
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आदेश के तहत माला रेंज में पीलीभीत-पूरनपुर, पीलीभीत-माधोटांडा व महोफ रेंज के तहत माधोटांडा-खटीमा मार्ग पर रात का प्रतिबंध लागू किया गया है। हालांकि एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन सेवाओं को इससे छूट दी गई है। वन विभाग का तर्क है कि यह कदम वन्यजीवों की सुरक्षा और सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए उठाया गया है, लेकिन आदेश जारी होते ही लोगों में नाराजगी देखने को मिली। भाकियू नेताओं से लेकर आम नागरिकों तक ने इस फैसले पर सवाल खड़े किए हैं।
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पूरनपुर- पीलीभीत नेशनल हाईवे से गुजरते हैं करीब पांच हजार वाहन
जिले की सीमा से होकर पूरनपुर-पीलीभीत नेशनल हाईवे भी गुजरा है। इस हाईवे से जिले के अलावा लखीमपुर, शाहजहांपुर और लखनऊ तक के लोगों की आवाजाही होती है। लोग बरेली, उत्तराखंड जाने के लिए इस हाईवे का ही प्रयोग करते हैं। 24 घंटे में पांच हजार से अधिक छोटे-बड़े वाहनों की आवाजाही रहती है। इस मार्ग पर भी करीब पांच किलोमीटर मार्ग जंगल में पड़ता है। आदेश के अनुसार, महोफ रेंज से होकर गुजरने वाले पूरनपुर-खटीमा मार्ग पर शाम से सुबह तक प्रतिबंध रहेगा। ऐसे में अगर इस मार्ग पर भी प्रतिबंध लगाया जाता है तो लोगों के लिए रात में उत्तराखंड से संपर्क ही कट जाएगा। पूरनपुर-पीलीभीत मार्ग के अलावा जिले को उत्तराखंड से जोड़ने वाला यह ही एक मात्र मार्ग बचता है। ऐसे में लोग आदेश जारी होने के बाद से बेचैन हैं और विरोध कर रहे हैं। संवाद
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माधोटांडा-पीलीभीत मार्ग से जुड़े हैं करीब 100 गांव
इसी तरह माधोटांडा-पीलीभीत मार्ग पर भी माला रेंज का जंगल क्षेत्र होने के कारण नियमों को लागू करने के आदेश दिए गए हैं। इस मार्ग से माधोटांडा और कलीनगर क्षेत्र के करीब 100 गांव जुड़े हैं। यहां के लोग मुख्यालय समेत अन्य स्थानों पर जाने के लिए इस मार्ग का ही प्रयोग करते हैं। रात के समय मार्ग बंद होने से परेशानी बढ़ेगी।
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आदेश से प्रभावित होगा जनजीवन, बदलाव न होने पर करेंगे आंदोलन
भाकियू नेता गुरदीप सिंह गोगी ने पीटीआर के अफसरों की ओर से जारी आदेश के बाद वीडियो जारी कर अपनी प्रतिक्रिया दी। कहा कि अधिकांश इलाके जंगल से लगे हुए हैं। लोगों को अधिकांश जरूरतों के लिए जंगल मार्ग से होकर ही गुजरना पड़ता है। शाम से सुबह तक मार्ग पर प्रतिबंध लगाने से लोगों की परेशानी बढ़ जाएगी। इसपर तत्काल रोक और बदलाव करने होंगे। डीएम को भी हस्तक्षेप करने की मांग की गई। रोक न लगने की स्थिति में सात मार्च को कलक्ट्रेट में धरना प्रदर्शन की चेतावनी की। गोगी ने कहा कि इस आदेश के खिलाफ भाकियू टिकैत आंदोलन पर बाध्य होगी।

दो दिन तक सशर्त रहेगी छूट, बाद में कराया जाएगा पूरा पालन
प्रभारी डीएफओ भरत कुमार डीके का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट और एनटीसीए के आदेशों के क्रम में यह नियम लागू किए गए हैं। एक सप्ताह तक सशर्त छूट रहेगी। इसे धीरे-धीरे लागू किया जाएगा। पहले दो दिनों तक वाहनों को एक-एक घंटे के अंतराल पर आने-जाने की अनुमति दी जाएगी। उसके बाद इसे नियम पूरी तरह से लागू किया जाएगा। केवल आपातकालीन वाहनों को ही वन विभाग के एस्कॉर्ट के साथ आने की अनुमति दी जाएगी।
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