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Pilibhit News: मालिकाना हक की कवायद के बीच वन भूमि से काटे जा रहे पेड़

Sat, 29 Aug 2026 12:34 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 29 Aug 2026 12:34 AM IST
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Trees being felled on forest land amidst the process of establishing ownership rights.
राजस्व अभिलेखों में टाइगर रिजर्व के नाम दर्ज है जमीन, रोज निकल रहीं चार-पांच लकड़ी लदी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां
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कलीनगर। बंगाली विस्थापित परिवारों को जमीन का मालिकाना हक देने की सरकारी कवायद के बीच टाइगर रिजर्व के स्वामित्व वाली जमीन पर खड़े लाखों रुपये कीमत के पेड़ों की कटाई का मामला सामने आया है। मुख्यमंत्री के हालिया जनपद दौरे के दौरान नौजल्हा और गभिया सहराई ग्राम पंचायत के एक-एक विस्थापित परिवार को मालिकाना हक के दस्तावेज दिए गए। इसके बाद अन्य परिवारों को भी जल्द मालिकाना हक मिलने की उम्मीद जगी थी, लेकिन अधिकांश परिवारों के नाम अभी तक जमीन का स्वामित्व राजस्व अभिलेखों में दर्ज नहीं हुआ है। इसी बीच ऐसी जमीनों से यूकेलिप्टस, पॉपलर समेत अन्य प्रजातियों के पेड़ों का तेजी से कटान शुरू हो गया है।
पूर्वी पाकिस्तान और बाद में बांग्लादेश से आए विस्थापित परिवारों को 1960 से 1965 के बीच विभिन्न स्थानों पर कैंपों में रखने के बाद जिले के तराई क्षेत्र में पुनर्वास विभाग के माध्यम से जमीन और मकान देकर बसाया गया था। वर्ष 1999 में ऐसी कुछ जमीनों को राजस्व अभिलेखों में वन भूमि दर्ज कर दिया गया। हालांकि वहां बसे परिवारों को हटाया नहीं गया और वे लंबे समय से अपने कब्जे वाली जमीन पर मालिकाना हक की मांग करते रहे हैं।
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प्रदेश सरकार की ओर से मालिकाना हक देने की घोषणा के बाद यह मुद्दा फिर गरमा गया। मुख्यमंत्री के दौरे में क्षेत्र के दो परिवारों को दस्तावेज मिलने के बाद विस्थापितों में उम्मीद बढ़ी थी। ऐसे में एक तरफ मालिकाना हक की मांग, दूसरी तरफ टाइगर रिजर्व की जमीन और वन संरक्षण के नियमों के बीच पेड़ों की कटाई ने मामला और जटिल कर दिया है।
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स्थानीय लोगों के मुताबिक रोजाना चार से छह ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में लकड़ी भरकर बाहर भेजी जा रही है। आरोप है कि ठेकेदारों और वनकर्मियों की मिलीभगत से यह कटान कराया जा रहा है। रेंजर सहेंद्र यादव ने बताया कि मामले की जानकारी कर क्षेत्रीय टीम को आवश्यक निर्देश दिए जाएंगे। संवाद
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