फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pilibhit News ›   tiger,Wild Animals

शासन से आई उच्चस्तरीय टीम जांच पूरी कर लखनऊ रवाना

Fri, 08 May 2020 01:00 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 08 May 2020 01:00 AM IST
विज्ञापन
tiger,Wild Animals
पीलीभीत। ट्रैंक्युलाइज के बाद हुुई बाघ की मौत के मामले में शासन द्वारा गठित तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय टीम ने जांच 24 घंटे में पूरी कर ली। दूसरे दिन गुरुवार सुबह जांच टीम लखनऊ चली गई। अब टीम अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपेगी।
विज्ञापन

जराकोठी क्षेत्र में रविवार को हमलावर हुए बाघ को ट्रैंक्युलाइज करके पकड़ा गया था। कुछ ही देर बाद उसकी हालत बिगड़ गई थी। इसके बाद बाघ पिंजरे में कैद कर गढ़ा रेंज ले जाया गया। वहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। मौत होने की सूचना मिलते ही वन्यजीव प्रेमियों ने टाइगर रिजर्व के अफसरों को ही कटघरे में खड़ा कर बाघ की हत्या करने का आरोप लगाया था। वन्य जीव प्रेमियों का कहना था कि बाघ की मौत ट्रैंक्युलाइज की ओवरडोज देने और गोली लगने से हुई है। शासन मेें शिकायत होने के बाद बाघ की मौत के मामले में एक उच्चस्तरीय टीम गठित की गई थी। इस जांच टीम में शामिल अपर प्रमुख वन संरक्षक प्रोजेक्ट टाइगर वीके शर्मा, मुख्य वन संरक्षक रमेश पांडेय और कानपुर चिड़ियाघर के पशु चिकित्सक आरके सिंह बुधवार को पूरे मामले की जांच करने पीलीभीत पहुंचे थे। लखनऊ से आकर टीम ने बुधवार दोपहर ही जराकोठी क्षेत्र में पहुंचकर लोगों पर हमला करने वाले स्थान, ट्रैंक्युलाइज करने वाली जगह समेत आसपास के कुछ स्थानों की गहनता से जांच की थी। टीम ने गढ़ा रेंज के गेस्ट हाउस में वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के भी बयान दर्ज किए। इसके बाद टीम रात्रि विश्राम के लिए मुस्तफाबाद गेस्ट हाउस पहुुंची। रात्रि विश्राम से पहले भी जांच टीम ने अधिकारियों से विभिन्न बिंदुओं पर बाघ की मौत की जानकारी हासिल की। गुरुवार को जांच टीम के सदस्य कुछ देर जंगल में जाकर जांच करने के बाद लखनऊ रवाना हो गए। जांच टीम में कानपुर चिड़ियाघर के पशु चिकित्सक आरके सिंह अभी पीलीभीत में ही रुके हुए हैं। टीम के सदस्यों ने बताया कि जांच रिपोर्ट बेहद गोपनीय है। इसलिए इसका खुलासा नहीं किया सकता। रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।
विज्ञापन


सीसीएफ बोले- भीतरी चोटों से भी हो सकती है मौत
मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ) रमेश पांडेय ने अमर उजाला के साथ बाघ की मौत की जांच पर कुछ बिंदु साझा किए। हालांकि उन्होंने जांच रिपोर्ट के बारे में कुछ भी बताने से इनकार कर दिया, लेकिन इतना कहा कि ट्रैंक्युलाइजेशन में टीम पशु चिकित्सकों को भले ही बंदूक से गोली चलानी न आती हो, मगर उन्हें मेडिकल परीक्षण करना आता है। वह इससे पहले भी रामपुर में एक तेंदुए और अप्रैल में एक बाघ पकड़ने समेत कई अभियानों में वन्यजीवों को ट्रैंक्युलाइज कर चुके हैं। फिलहाल यह भी जांच का विषय है कि उन्होंने बाघ को कैसे ट्रैंक्युलाइन किया। उन्होंने बताया कि बाघ के शरीर की मेटल डिटेक्टर से भी जांच की गई है। इसमें गनशॉट इंजरी नहीं पाई गई। बाघ की मौत की तकनीकी और वैज्ञानिक तरीके से जांच के लिए टीम में एक विशेषज्ञ डॉक्टर को भी शामिल किया गया है। प्रत्येक पहलू पर जांच की गई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बाहरी चोटों का ही जिक्र है, मगर हो सकता है कि भीतरी चोटों के कारण मौत हुई हो। इसके अलावा इनके अभिलेखीय बिंदुओं का भी परीक्षण किया गया है। पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर शासन को सौंपी जाएगी। उसके बाद निर्णय लेने का काम शासन का है।
विज्ञापन
विज्ञापन


बाघ की मौत के मामले में जांच शासन से उच्च स्तरीय जांच टीम आई थी। टीम घटनास्थल की जांच करने और बयान लेने के बाद लखनऊ वापस चली गई है। -नवीन खंडेलवाल, डिप्टी डायरेक्टर, टाइगर रिजर्व
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed