{"_id":"7597abf94288ef548aee622c9ff173f7","slug":"tiger-trust-god-s-protection-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"टाइगर रिजर्व की सुरक्षा भगवान भरोसे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
टाइगर रिजर्व की सुरक्षा भगवान भरोसे
Pilibhit
Updated Tue, 08 Sep 2015 07:30 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
टाइगर रिजर्व की सुरक्षा में लगाए गए वाचरों की संख्या बजट के अभाव में आधी कर दी गई है। डीएफओ ने टाइगर रिजर्व के 104 वाचरों को हटा दिया है। अब प्रत्येक बीट में चार के स्थान पर सिर्फ दो वाचर रह गए हैं।
टाइगर रिजर्व घोषित होने के बाद एनटीसीए ने जंगल का दौरा कर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए कार्य योजना मांगी थी। विभाग ने सभी पांच रेंजों की 52 बीटी में दो दो वाचर नियुक्त किए थे। नियुक्त किए गए अधिकांश वाचर जंगल से सटे गांव के थे और जंगल की गतिविधियों पर नजर रखने के साथ गश्त एवं अनावश्यक आवाजाही करने वालों पर भी अंकुश लगाने में कामयाब हुए थे। वनदरोग एवं वनरक्षक की कमी के कारण वाचर विभाग को काफी मददगार साबित हो रहे थे।
लेकिन पिछले दिनों एनटीसीए से भेजे गए सात करोड़ के प्रस्ताव के सापेक्ष मात्र 1.60 करोड़ रुपये की प्राप्त हुए। कम बजट मिलने पर विभाग के समक्ष संविदा पर रखे गए वाचरों को मानदेय के लाले पड़ गए। इस पर विभाग ने सभी 52 बीटों में तैनात चार चार वाचरों में दो-दो को हटाने का निर्णय लिया। इसकी सूची तैयार कर पहली सितंबर को उन्हें नोटिस दिया गया और एक सप्ताह बाद अब उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं। सभी 52 बीटों से 104 वाचरों के हट जाने से मात्र 104 वाचर की शेष बचे हैं।
विज्ञापन
दोहरी मार झेलेंगे वाचर
टाइगर रिजर्व से हटाए गए वाचरों को अब दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। विभाग से हटाए जाने से वह बेरोजगार हो गए हैं। साथ ही गांव व क्षेत्र के उन लोगों के साथ उठने बैठने में भी दिक्कत आ रही है। उन्हें तैनाती के दौरान लकड़ी लाते अथवा अवैध घुसपैठ करने पर उन्होंने रोका था। इसके साथ ही उन्हें इस बात का भी भय लग रहा है कि यदि जंगल में कोई घटना होती है तो विभागीय अधिकारी पहले उन्हीं पर शक जाहिर कर पूछताछ कर सकते हैं क्योंकि कई माह तक जंगल में रहने के बाद उन्हें जंगल की काफी जानकारी हो चुकी है।
00
बजट के अभाव में 104 वाचरों को हटाया गया है। अब प्रत्येक बीट में दो वाचरों से ही काम चलाया जाएगा। सुरक्षा व्यवस्था को मुस्तैद रखने को बाकी स्टाफ से सतर्क रहने और लगातार गश्त करने के निर्देश दिए गए हैं।
- कैलाश प्रकाश, डीएफओ टाइगर रिजर्व
विज्ञापन
टाइगर रिजर्व घोषित होने के बाद एनटीसीए ने जंगल का दौरा कर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए कार्य योजना मांगी थी। विभाग ने सभी पांच रेंजों की 52 बीटी में दो दो वाचर नियुक्त किए थे। नियुक्त किए गए अधिकांश वाचर जंगल से सटे गांव के थे और जंगल की गतिविधियों पर नजर रखने के साथ गश्त एवं अनावश्यक आवाजाही करने वालों पर भी अंकुश लगाने में कामयाब हुए थे। वनदरोग एवं वनरक्षक की कमी के कारण वाचर विभाग को काफी मददगार साबित हो रहे थे।
विज्ञापन
लेकिन पिछले दिनों एनटीसीए से भेजे गए सात करोड़ के प्रस्ताव के सापेक्ष मात्र 1.60 करोड़ रुपये की प्राप्त हुए। कम बजट मिलने पर विभाग के समक्ष संविदा पर रखे गए वाचरों को मानदेय के लाले पड़ गए। इस पर विभाग ने सभी 52 बीटों में तैनात चार चार वाचरों में दो-दो को हटाने का निर्णय लिया। इसकी सूची तैयार कर पहली सितंबर को उन्हें नोटिस दिया गया और एक सप्ताह बाद अब उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं। सभी 52 बीटों से 104 वाचरों के हट जाने से मात्र 104 वाचर की शेष बचे हैं।
विज्ञापन
दोहरी मार झेलेंगे वाचर
टाइगर रिजर्व से हटाए गए वाचरों को अब दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। विभाग से हटाए जाने से वह बेरोजगार हो गए हैं। साथ ही गांव व क्षेत्र के उन लोगों के साथ उठने बैठने में भी दिक्कत आ रही है। उन्हें तैनाती के दौरान लकड़ी लाते अथवा अवैध घुसपैठ करने पर उन्होंने रोका था। इसके साथ ही उन्हें इस बात का भी भय लग रहा है कि यदि जंगल में कोई घटना होती है तो विभागीय अधिकारी पहले उन्हीं पर शक जाहिर कर पूछताछ कर सकते हैं क्योंकि कई माह तक जंगल में रहने के बाद उन्हें जंगल की काफी जानकारी हो चुकी है।
00
बजट के अभाव में 104 वाचरों को हटाया गया है। अब प्रत्येक बीट में दो वाचरों से ही काम चलाया जाएगा। सुरक्षा व्यवस्था को मुस्तैद रखने को बाकी स्टाफ से सतर्क रहने और लगातार गश्त करने के निर्देश दिए गए हैं।
- कैलाश प्रकाश, डीएफओ टाइगर रिजर्व