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Pilibhit News: दो प्रांतों के लिए सिरदर्द बना तीन लोगों को मारने वाला बाघ
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माधोटांडा-खटीमा के जंगल मार्ग पर बैठा बाघ। वायरल वीडियो
- फोटो : PILIBHIT
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अमरिया (पीलीभीत)। डेढ़ माह में तीन इंसानों को मारने वाले बाघ की निगरानी दो प्रदेशों के वन अफसरों के लिए सिरदर्द बन गई है। बाघ पीलीभीत और उत्तराखंड की सीमा में चहलकदमी कर दहशत का पर्याय बना हुआ है। लगातार शिकार की घटनाओं को देखते हुए अब क्षेत्रीय वन अफसर भी चिंतित हो उठे हैं। उन्होंने बाघ को ट्रेंक्यूलाइज करने के लिए अफसरों को पत्र लिखा है।
जनपद के न्यूरिया क्षेत्र की सीमा जनपद की महोफ और उत्तराखंड की सुरई रेंज के जंगल से सटी हुई है। क्षेत्र के कई गांव जंगल एक से दो किलोमीटर के दायरे में बसे हैं। वैसे तो लंबे समय से बाघ समेत अन्य वन्यजीवों की जंगल से बाहर चहलकदमी बनी रहती है। बीती 14 दिसंबर से एक बाघ इलाके के लोगों के लिए मुसीबत बना हुआ है।
सुरई के जंगल और उसके बाहर दो किलोमीटर के दायरे में घूम रहा बाघ इंसानों के लिए जानलेवा बन गया है। 14 दिसंबर को सुरई रेंज के जंगल में मजदूरी कर रहे न्यूरिया के भरतपुर कॉलोनी निवासी एक ग्रामीण को बाघ ने शिकार बनाया था। इसके बाद से स्थिति खराब होने लगी। आठ जनवरी को न्यूरिया के गांव टांडा बिजैसी में आबादी से सौ मीटर दूरी पर बाघ ने एक अन्य युवक को मार डाला। स्थिति को देख बाघ की निगरानी बढ़ा दी गई। कैमरों के साथ तीन टीमें लगातार बाघ पर नजर रखने लगी। इसके बाद भी बाघ की सक्रियता कम नहीं हो सकी।
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सुरई के जंगल और उसके बाहर बाघ की चहलकदमी जारी रही। शनिवार को सुरई के जंगल में घास काटने पहुंचे उत्तराखंड सीमा के एक किसान को बाघ ने मार डाला। इससे ग्रामीणों में भय की स्थिति है। ग्रामीणों का कहना है कि बाघ ने तीन इंसानों का शिकार किया है। क्षेत्रीय वन विभाग के अफसर भी इस बात को स्वीकार कर रहे हैं।
वन्यजीव प्रभारी सोनी सिंह ने बाघ की सक्रियता को देखते हुए बाघ को ट्रेंक्यूलाइज करने के लिए विभागीय अफसरों को पत्र लिखा है।
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तीन किलोमीटर के दायरे में हुई तीनों घटनाएं
ग्रामीणों का कहना है कि बाघ द्वारा इंसानों का शिकार करने की तीनों घटनाएं तीन किलोमीटर दायरे में हुईं हैं। बाघ काफी खूंखार हो गया है। हालांकि विभाग की ओर से आठ कैमरे लगाए गए। जिसमें बाघ के चहलकदमी करते हुए कई बार तस्वीर भी कैद हो चुुकी है।
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बाघ की सक्रियता बढ़ रही है। दिन और रात बाघ की निगरानी में टीमें जुटी हैं। सुरक्षा के लिहाज से बाघ को ट्रेंक्यूलाइज करने की अनुमति के लिए पत्र लिखकर अफसरों के जरिए मुख्यालय भेजा गया है।
- सोनी सिंह, वन्यजीव प्रभारी, सामाजिक वानिकी प्रभाग
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खटीमा मार्ग पर बीचोबीच बाघ को बैठा देख वाहनों की लगी कतार
पीलीभीत। महोफ रेंज के जंगल के बीच से गुजरे माधोटांडा खटीमा मार्ग पर आय दिन बाघ की मौजूदगी देखी जा रही है। शनिवार को एक बाघ जंगल से निकलकर बीच सड़क पर आकर बैठ गया। इससे मार्ग पर दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। बाघ के हटने के बाद यातायात सुचारू हो सका। कार सवारों ने बाघ का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।
माधोटांडा खटीमा मार्ग पर पीटीआर की महोफ और उत्तराखंड की सुरई रेंज का जंगल पड़ता है। दोनों सीमाओं के जंगल में बाघों की संख्या काफी है। जिसके कारण आए दिन मार्ग पर बाघों की सक्रियता देेखी जाती है। पूर्व में बाइक सवारों पर हमला करने की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं। शनिवार को एक बाघ जंगल से बाहर निकलकर मार्ग पर आ गया। कुछ देर चहलकदमी करने के बाद बाघ मार्ग के बीचोबीच बैठ गया। इस दौरान मार्ग से गुजरने वाले वाहन भी मौके पर पहुंचे। बाघ की मौजूदगी देख वाहनों के पहिये थम गए। देखते ही देखते मार्ग के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। दहशत के बीच हर कोई बाघ को देखने को बेताब दिखा। कार के बंद शीशों के अंदर से बाघ को निहारने के साथ वीडियो भी बनाई गई। करीब दो मिनट बाद बाघ मार्ग से हटकर जंगल की ओर निकल गया।
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खेत से निकलकर जंगल की ओर गया बाघ, ग्रामीणों ने ली राहत की सांस
बीसलपुर। गांव पिपरैया दियोहना के पास गन्ने के खेत में तीन दिन से मौजूद बाघ रविवार तड़के जंगल में चला गया। इससे ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।
गांव पिपरैया दियोहना से करीब 50 मीटर दूर स्थित गांव के ही उमाशंकर वर्मा के गन्ने के खेत में 27 जनवरी की शाम को दियोरिया के जंगल से एक बाघ आ गया था। कुछ लोगों ने इस बाघ को गन्ने के खेत में घुसते हुए देखा था। उसके बाद से ग्रामीण खेत पर लगातार निगरानी करते रहे। बाघ की मौजूदगी से ग्रामीणों में दहशत रही। अधिकतर ग्रामीण बाघ के डर से दो रातों से सो नहीं पा रहे थे। ग्रामीण अपने दरवाजों पर रात में लगातार आग जलाते रहे। ग्रामीणों ने दोनों रातों में अपने पशुओं को पशुशालाओं से हटाकर आंगन में बांधा था। ग्रामीणों को यह डर था कि बाघ खेत से निकलकर गांव में न आ जाए। रविवार को तड़के कुछ ग्रामीणों ने बाघ को खेत से निकलकर जंगल में जाते हुए देखा तो इसकी जानकारी अन्य लोगों को दी। बाघ के जाने से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। रेंजर पीयूष मोहन श्रीवास्तव ने बाघ के खेत से निकलकर जंगल में जाने की पुष्टि की है। संवाद
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जनपद के न्यूरिया क्षेत्र की सीमा जनपद की महोफ और उत्तराखंड की सुरई रेंज के जंगल से सटी हुई है। क्षेत्र के कई गांव जंगल एक से दो किलोमीटर के दायरे में बसे हैं। वैसे तो लंबे समय से बाघ समेत अन्य वन्यजीवों की जंगल से बाहर चहलकदमी बनी रहती है। बीती 14 दिसंबर से एक बाघ इलाके के लोगों के लिए मुसीबत बना हुआ है।
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सुरई के जंगल और उसके बाहर दो किलोमीटर के दायरे में घूम रहा बाघ इंसानों के लिए जानलेवा बन गया है। 14 दिसंबर को सुरई रेंज के जंगल में मजदूरी कर रहे न्यूरिया के भरतपुर कॉलोनी निवासी एक ग्रामीण को बाघ ने शिकार बनाया था। इसके बाद से स्थिति खराब होने लगी। आठ जनवरी को न्यूरिया के गांव टांडा बिजैसी में आबादी से सौ मीटर दूरी पर बाघ ने एक अन्य युवक को मार डाला। स्थिति को देख बाघ की निगरानी बढ़ा दी गई। कैमरों के साथ तीन टीमें लगातार बाघ पर नजर रखने लगी। इसके बाद भी बाघ की सक्रियता कम नहीं हो सकी।
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सुरई के जंगल और उसके बाहर बाघ की चहलकदमी जारी रही। शनिवार को सुरई के जंगल में घास काटने पहुंचे उत्तराखंड सीमा के एक किसान को बाघ ने मार डाला। इससे ग्रामीणों में भय की स्थिति है। ग्रामीणों का कहना है कि बाघ ने तीन इंसानों का शिकार किया है। क्षेत्रीय वन विभाग के अफसर भी इस बात को स्वीकार कर रहे हैं।
वन्यजीव प्रभारी सोनी सिंह ने बाघ की सक्रियता को देखते हुए बाघ को ट्रेंक्यूलाइज करने के लिए विभागीय अफसरों को पत्र लिखा है।
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तीन किलोमीटर के दायरे में हुई तीनों घटनाएं
ग्रामीणों का कहना है कि बाघ द्वारा इंसानों का शिकार करने की तीनों घटनाएं तीन किलोमीटर दायरे में हुईं हैं। बाघ काफी खूंखार हो गया है। हालांकि विभाग की ओर से आठ कैमरे लगाए गए। जिसमें बाघ के चहलकदमी करते हुए कई बार तस्वीर भी कैद हो चुुकी है।
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बाघ की सक्रियता बढ़ रही है। दिन और रात बाघ की निगरानी में टीमें जुटी हैं। सुरक्षा के लिहाज से बाघ को ट्रेंक्यूलाइज करने की अनुमति के लिए पत्र लिखकर अफसरों के जरिए मुख्यालय भेजा गया है।
- सोनी सिंह, वन्यजीव प्रभारी, सामाजिक वानिकी प्रभाग
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खटीमा मार्ग पर बीचोबीच बाघ को बैठा देख वाहनों की लगी कतार
पीलीभीत। महोफ रेंज के जंगल के बीच से गुजरे माधोटांडा खटीमा मार्ग पर आय दिन बाघ की मौजूदगी देखी जा रही है। शनिवार को एक बाघ जंगल से निकलकर बीच सड़क पर आकर बैठ गया। इससे मार्ग पर दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। बाघ के हटने के बाद यातायात सुचारू हो सका। कार सवारों ने बाघ का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।
माधोटांडा खटीमा मार्ग पर पीटीआर की महोफ और उत्तराखंड की सुरई रेंज का जंगल पड़ता है। दोनों सीमाओं के जंगल में बाघों की संख्या काफी है। जिसके कारण आए दिन मार्ग पर बाघों की सक्रियता देेखी जाती है। पूर्व में बाइक सवारों पर हमला करने की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं। शनिवार को एक बाघ जंगल से बाहर निकलकर मार्ग पर आ गया। कुछ देर चहलकदमी करने के बाद बाघ मार्ग के बीचोबीच बैठ गया। इस दौरान मार्ग से गुजरने वाले वाहन भी मौके पर पहुंचे। बाघ की मौजूदगी देख वाहनों के पहिये थम गए। देखते ही देखते मार्ग के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। दहशत के बीच हर कोई बाघ को देखने को बेताब दिखा। कार के बंद शीशों के अंदर से बाघ को निहारने के साथ वीडियो भी बनाई गई। करीब दो मिनट बाद बाघ मार्ग से हटकर जंगल की ओर निकल गया।
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खेत से निकलकर जंगल की ओर गया बाघ, ग्रामीणों ने ली राहत की सांस
बीसलपुर। गांव पिपरैया दियोहना के पास गन्ने के खेत में तीन दिन से मौजूद बाघ रविवार तड़के जंगल में चला गया। इससे ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।
गांव पिपरैया दियोहना से करीब 50 मीटर दूर स्थित गांव के ही उमाशंकर वर्मा के गन्ने के खेत में 27 जनवरी की शाम को दियोरिया के जंगल से एक बाघ आ गया था। कुछ लोगों ने इस बाघ को गन्ने के खेत में घुसते हुए देखा था। उसके बाद से ग्रामीण खेत पर लगातार निगरानी करते रहे। बाघ की मौजूदगी से ग्रामीणों में दहशत रही। अधिकतर ग्रामीण बाघ के डर से दो रातों से सो नहीं पा रहे थे। ग्रामीण अपने दरवाजों पर रात में लगातार आग जलाते रहे। ग्रामीणों ने दोनों रातों में अपने पशुओं को पशुशालाओं से हटाकर आंगन में बांधा था। ग्रामीणों को यह डर था कि बाघ खेत से निकलकर गांव में न आ जाए। रविवार को तड़के कुछ ग्रामीणों ने बाघ को खेत से निकलकर जंगल में जाते हुए देखा तो इसकी जानकारी अन्य लोगों को दी। बाघ के जाने से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। रेंजर पीयूष मोहन श्रीवास्तव ने बाघ के खेत से निकलकर जंगल में जाने की पुष्टि की है। संवाद