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बाघ ने अब बुजुर्ग महिला की जान ली
पीलीभ्ाीत ब्यूराो
Updated Sat, 01 Jul 2017 10:55 PM IST
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हाइऱ्ईवे पर जाम लगाया
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बनकटी से सटे इलाके में खेतों में काम करते हुए लोगों में से एक और को बाघ ने निवाला बना लिया। इस बार बाघ का शिकार 60 वर्षीय महिला बनी जो परिवार के लोगों के साथ अपने धान के खेत में निराई करने गई थी। बाघ उसे उठाकर जंगल में ले गया। पास ही दूसरे खेत में काम कर रहे महिला के बेटे लोगों को इकट्ठा कर बाघ के पीछे दौड़े और शोर मचाकर जैसे-तैसे उसे भगाया लेकिन महिला को बचाने में कामयाब नहीं हो सके। बाघ के हमले में महिला की मौत के बाद गुस्साए लोगों ने करीब ढाई घंटे तक उसका शव टनकपुर हाईवे पर रखकर जाम लगाए रखा।
न्यूरिया क्षेत्र के गांव मैथी सैदुल्लागंज की निवासी ननकी देवी शनिवार सुबह अपने बेटे सोम प्रकाश, धर्मेंद्र और गयाशंकर के साथ अपने धान के खेत पर निराई करने गई थी। ननकी देवी के दो खेत हैं जो बनकटी के जंगल से सटे हुए हैं। बेटों के मुताबिक ननकी देवी और वे अलग-अलग खेत में निराई कर रहे थे। करीब साढ़े दस बजे बाघ ने ननकी देवी पर हमला कर दिया और उन्हें उठाकर जंगल के अंदर ले गया। ननकी देवी की चीखपुकार सुनकर उनके तीनों बेटों ने शोर मचाकर आसपास के खेतों में काम कर रहे दूसरे लोगों को इकट्ठा किया। बाघ का पीछा करते हुए लोग जंगल में घुस गए। ट्रैक्टर और पटाखों के जरिये शोर मचाया तो बाघ भाग निकला। लोग लहूलुहान ननकी देवी के पास पहुंचे लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी और बाघ उनके एक पैर और हाथ का काफी हिस्सा खा भी चुका था। गर्दन, चेहरे समेत कई दूसरे अंगों पर भी उसके पंजों के निशान थे।
ननकी देवी के शव को जंगल से बाहर निकालकर वन विभाग और पुलिस-प्रशासन के अफसरों को सूचना दी गई। कुछ देर बाद एसडीएम पूर्णिमा सिंह, सीओ सदर धर्म सिंह मार्छाल पुलिस बल के साथ पहुंचे। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाना चाहा लेकिन गुस्साए ग्रामीणों ने पुलिस को शव को कब्जे में नहीं लेने दिया। दोपहर के वक्त शव लेकर भीड़ बिथरा पहुंची और टनकपुर हाईवे पर शव रखकर जाम लगा दिया। वन विभाग और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। ग्रामीण जंगल से सटे इलाकों में सुरक्षा बंदोबस्त और मृतका के परिवार को आर्थिक सहायता देने की मांग करते हुए डीएम और डीएफओ को मौके पर बुलाने की बात पर अड़ गए। ढाई घंटे बाद सामाजिक वानिकी के डीएफओ आदर्श कुमार पहुंचे और एक महीने के अंदर मांगें पूरी करने का आश्वासन देकर जाम खुलवाया। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया गया।
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न्यूरिया क्षेत्र के गांव मैथी सैदुल्लागंज की निवासी ननकी देवी शनिवार सुबह अपने बेटे सोम प्रकाश, धर्मेंद्र और गयाशंकर के साथ अपने धान के खेत पर निराई करने गई थी। ननकी देवी के दो खेत हैं जो बनकटी के जंगल से सटे हुए हैं। बेटों के मुताबिक ननकी देवी और वे अलग-अलग खेत में निराई कर रहे थे। करीब साढ़े दस बजे बाघ ने ननकी देवी पर हमला कर दिया और उन्हें उठाकर जंगल के अंदर ले गया। ननकी देवी की चीखपुकार सुनकर उनके तीनों बेटों ने शोर मचाकर आसपास के खेतों में काम कर रहे दूसरे लोगों को इकट्ठा किया। बाघ का पीछा करते हुए लोग जंगल में घुस गए। ट्रैक्टर और पटाखों के जरिये शोर मचाया तो बाघ भाग निकला। लोग लहूलुहान ननकी देवी के पास पहुंचे लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी और बाघ उनके एक पैर और हाथ का काफी हिस्सा खा भी चुका था। गर्दन, चेहरे समेत कई दूसरे अंगों पर भी उसके पंजों के निशान थे।
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ननकी देवी के शव को जंगल से बाहर निकालकर वन विभाग और पुलिस-प्रशासन के अफसरों को सूचना दी गई। कुछ देर बाद एसडीएम पूर्णिमा सिंह, सीओ सदर धर्म सिंह मार्छाल पुलिस बल के साथ पहुंचे। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाना चाहा लेकिन गुस्साए ग्रामीणों ने पुलिस को शव को कब्जे में नहीं लेने दिया। दोपहर के वक्त शव लेकर भीड़ बिथरा पहुंची और टनकपुर हाईवे पर शव रखकर जाम लगा दिया। वन विभाग और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। ग्रामीण जंगल से सटे इलाकों में सुरक्षा बंदोबस्त और मृतका के परिवार को आर्थिक सहायता देने की मांग करते हुए डीएम और डीएफओ को मौके पर बुलाने की बात पर अड़ गए। ढाई घंटे बाद सामाजिक वानिकी के डीएफओ आदर्श कुमार पहुंचे और एक महीने के अंदर मांगें पूरी करने का आश्वासन देकर जाम खुलवाया। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया गया।
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