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डनलप सवार पर बाघ ने लगाई छलांग, शोर मचाकर, पताई जलाकर ग्रामीणों ने बचाया
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माधोटांडा। जंगल से बाहर खारजा नहर क्षेत्र में बाघिन के जंगल में जाने के बाद अब बाघ ने दस्तक देकर दहशत फैला दी। शनिवार तड़के खारजा नहर किनारे रेत भरने जा रहे चार डनलप सवारों में उस समय हड़कंप मच गया, जब एक बाघ अचानक सामने आ गया। डनलप सवारों ने जैसे ही डनलपों को मोड़ा, उसी दौरान बाघ ने सबसे पीछे चल रहे एक डनलप पर छलांग लगा दी। डनलप सवारों ने शोर-शराबा कर और पताई में आग लगाकर बमुश्किल अपनी जान बचाई।
टाइगर रिजर्व के बराही जंगल से बाहर पिछले एक माह से खारजा नहर क्षेत्र में बाघ और बाघिन की मौजूदगी देखी जा रही है। नहर की पटरियों के अलावा खेतों तक बाघ-बाघिन चहलकदमी कर रहे हैं। करीब दस दिन पहले खारजा नहर की पटरी के नीचे करीब तीन घंटे तक बाघ आराम करते देखा गया था। वहीं माधोटांडा गांव की आबादी से सटे क्षेत्र में पांच दिन तक बाघिन डेरा जमाये रही। उधर, शनिवार तड़के गांव निवासी चार ग्रामीण रेत भरने के लिए डनलपों पर सवार होकर खारजा नहर की ओर जा रहे थे। नहर पटरी से सटी सड़क पर आगे बढ़ते ही डनलप सवारों के सामने अचानक झाड़ियों से एक बाघ निकल पड़ा, जिसे देखकर सभी के होश उड़ गए। दहशत में उन्होंने डनलपों को लौटाया तो इसी बीच बाघ ने पीछे चल रहे एक ग्रामीण के डनलप पर छलांग लगा दी। बाघ से बचने को डनलप सवारों ने शोर शराबा करने के साथ डनलप पर रखी पताई में आग लगा दी। इस पर बाघ झाड़ियों में चला गया। वन दरोगा अजमेर सिंह ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है, डनलप सवार के नाम की जानकारी नहीं हो सकी है। खारजा नहर क्षेत्र से रेत खनन को पूरी तरह बंद कराया है। लोगों से जागरूक रहने की अपील भी की जा रही है।
कहीं अमरिया जैसी स्थिति न बन जाए
जंगल से बाहर खारजा नहर में वैसे तो कई सालों से बाघ, तेंदुओं की चहलकदमी जारी रहती है, मगर पिछले एक माह से बाघों की मौजूदगी लगातार बढ़ रही है। विभागीय कर्मचारियों की माने तो चार बाघ इस क्षेत्र में चहलकदमी कर रहे हैं। जो मुख्य मार्ग के साथ खेतों की ओर देखे जा रहे हैं। इसकी बानगी खारजा नहर पर तीन घंटे आराम करते बाघ के अलावा आबादी के निकट पांच दिन तक डेरा जमाया बाघिन में देखने को मिली। यदि यही हालात रहे तो यह क्षेत्र भी बाघों का ठिकाना बन सकता है।
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टाइगर रिजर्व के बराही जंगल से बाहर पिछले एक माह से खारजा नहर क्षेत्र में बाघ और बाघिन की मौजूदगी देखी जा रही है। नहर की पटरियों के अलावा खेतों तक बाघ-बाघिन चहलकदमी कर रहे हैं। करीब दस दिन पहले खारजा नहर की पटरी के नीचे करीब तीन घंटे तक बाघ आराम करते देखा गया था। वहीं माधोटांडा गांव की आबादी से सटे क्षेत्र में पांच दिन तक बाघिन डेरा जमाये रही। उधर, शनिवार तड़के गांव निवासी चार ग्रामीण रेत भरने के लिए डनलपों पर सवार होकर खारजा नहर की ओर जा रहे थे। नहर पटरी से सटी सड़क पर आगे बढ़ते ही डनलप सवारों के सामने अचानक झाड़ियों से एक बाघ निकल पड़ा, जिसे देखकर सभी के होश उड़ गए। दहशत में उन्होंने डनलपों को लौटाया तो इसी बीच बाघ ने पीछे चल रहे एक ग्रामीण के डनलप पर छलांग लगा दी। बाघ से बचने को डनलप सवारों ने शोर शराबा करने के साथ डनलप पर रखी पताई में आग लगा दी। इस पर बाघ झाड़ियों में चला गया। वन दरोगा अजमेर सिंह ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है, डनलप सवार के नाम की जानकारी नहीं हो सकी है। खारजा नहर क्षेत्र से रेत खनन को पूरी तरह बंद कराया है। लोगों से जागरूक रहने की अपील भी की जा रही है।
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कहीं अमरिया जैसी स्थिति न बन जाए
जंगल से बाहर खारजा नहर में वैसे तो कई सालों से बाघ, तेंदुओं की चहलकदमी जारी रहती है, मगर पिछले एक माह से बाघों की मौजूदगी लगातार बढ़ रही है। विभागीय कर्मचारियों की माने तो चार बाघ इस क्षेत्र में चहलकदमी कर रहे हैं। जो मुख्य मार्ग के साथ खेतों की ओर देखे जा रहे हैं। इसकी बानगी खारजा नहर पर तीन घंटे आराम करते बाघ के अलावा आबादी के निकट पांच दिन तक डेरा जमाया बाघिन में देखने को मिली। यदि यही हालात रहे तो यह क्षेत्र भी बाघों का ठिकाना बन सकता है।
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