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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pilibhit News ›   There used to be a double system of guarding in police stations, the gates would be closed in the evening.

Pilibhit News: पुलिस स्टेशनों में रहती थी पहरे की दोहरी व्यवस्था, शाम होते ही बंद हो जाते गेट

Fri, 27 Dec 2024 12:06 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 27 Dec 2024 12:06 AM IST
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There used to be a double system of guarding in police stations, the gates would be closed in the evening.
पूरनपुर। 90 के दशक में पूरनपुर क्षेत्र में फैले आतंकवाद के खात्मे में नगालैंड पुलिस की बड़ी भूमिका रही थी। यह पुलिस जंगलों में ही रहती थी। इसके अलावा आतंक समाप्त करने के लिए स्थानीय आतंकियों पर दबाव बनाकर सरेंडर भी कराया गया। आतंकवाद के समय पुलिस स्टेशनों पर पहरे की दोहरी व्यवस्था रहती थी। शाम होते ही पुलिस स्टेशन के दरवाजे बंद हो जाया करते थे। पुलिस स्टेशनों सहित कई स्थानों पर बंकर बनाए गए थे।
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आतंकवाद के दौरान सिख समाज के लोग भी दहशत में रहते थे। सिख समाज के लोगों ने शराब पीना बंद कर दी थी। सिख समाज के किसी युवक या अन्य के शराब पिए मिलने पर आतंकवादी उसकी बेरहमी से पिटाई करते थे। उस समय के दौर को याद करते हुए अशोक खंडेलवाल, हंसराज गुलाटी, राजकुमार खंडेलवाल आदि ने बताया कि उस समय जिले में दो एएसपी की तैनाती होती थी।
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एक एएसपी आतंकवाद की गतिविधियों पर नजर रखने, उससे निपटने के लिए रहते थे। कोतवाली, थानों, पुलिस चौकियों और प्रमुख स्थानों पर बंकर बनाए गए थे। बंकर में तैनात पुलिसकर्मी हर समय अलर्ट रहता था। पुलिस स्टेशनों पर दोहरा पहरा रहता था। आतंकवाद के दौरान पंजाब के आतंकवादियों के साथ कई स्थानीय युवक भी शामिल हो गए थे।
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फिरौती के लिए दिनदहाड़े अपहरण होते थे। आतंकवाद को तोड़ने के लिए तब पूरनपुर में तैनात रहे सीओ राजेंद्र सिंह यादव ने नगर सहित क्षेत्र के संभ्रांत लोगों को साथ जोड़कर स्थानीय आतंकवादियों पर सरेंडर कराने का दबाब बनाया। स्थानीय आतंकवादियों के सरेंडर होने से आतंकवाद कम होता गया।

आतंकवाद पर काबू पाने के लिए पुलिस, पीएसी के अलावा बीएसएफ, सीआरपी को लगाया गया। नगालैंड की फोर्स भी लगाई गई। नगालैंड की फोर्स अधिकांश समय जंगलों में डेरा डाले रहती थी। संवाद
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