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Pilibhit News: जिले में आलू नहीं और खोल दिए खरीद केेंद्र
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10 मार्च से एक भी किसान नहीं पहुंचा केंद्र पर
नौ अप्रैल तक रहेंगे केन्द्र संचालित
संवाद न्यूज एजेंसी
पीलीभीत। आलू के अच्छे भाव दिलाने के लिए शासन ने सभी मंडी समितियों में राजकीय आलू क्रय केन्द्र खोलने के निर्देश दिए थे। मंडी में दस मार्च से खोले गए क्रय केन्द्र पर अब तक एक भी किसान ने अपना आलू क्रय नहीं किया है। कारण है कि जिले में आलू की पैदावार ही बहुत कम है।
प्रदेश में आलू की दुर्दशा और किसानों को अच्छे भाव न मिल पाने को लेकर शासन ने सभी मंडी समितियों में आलू क्रय केन्द्र स्थापित करने के आदेश दिए थे। इस आदेश का जिले में भी पालन कर दिया गया जबकि यहां पर आलू की उपज नाममात्र के लोग ही करते हें। चूकि आदेश था तो मंडी के एक चतुर्थश्रेणी कर्मी को बैठाकर बैनर लगाकर इसका पालन कर दिया गया।
केन्द्र खुलने के करीब 26 दिन बाद बाद भी यहां पर एक आलू की बिक्री नहीं हो सकी है। ऐसे में जिले में खोला गया केन्द्र मात्र औपचारिकता बनकर रह गया है। यहां पर न तो कोई किसान ही आ सका और न आलू को खरीदा जा सका है। कर्मी ने बताया कि जिले में आलू ही नहीं हुआ तो बिक्री कहां से होगी। यदि हुआ होगा तो शासन के मानकों पर आलू ही मौजूद नहीं है। अब नौ अप्रैल तक केन्द्र पर बैठना है।
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नौ अप्रैल तक रहेंगे केन्द्र संचालित
संवाद न्यूज एजेंसी
पीलीभीत। आलू के अच्छे भाव दिलाने के लिए शासन ने सभी मंडी समितियों में राजकीय आलू क्रय केन्द्र खोलने के निर्देश दिए थे। मंडी में दस मार्च से खोले गए क्रय केन्द्र पर अब तक एक भी किसान ने अपना आलू क्रय नहीं किया है। कारण है कि जिले में आलू की पैदावार ही बहुत कम है।
प्रदेश में आलू की दुर्दशा और किसानों को अच्छे भाव न मिल पाने को लेकर शासन ने सभी मंडी समितियों में आलू क्रय केन्द्र स्थापित करने के आदेश दिए थे। इस आदेश का जिले में भी पालन कर दिया गया जबकि यहां पर आलू की उपज नाममात्र के लोग ही करते हें। चूकि आदेश था तो मंडी के एक चतुर्थश्रेणी कर्मी को बैठाकर बैनर लगाकर इसका पालन कर दिया गया।
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केन्द्र खुलने के करीब 26 दिन बाद बाद भी यहां पर एक आलू की बिक्री नहीं हो सकी है। ऐसे में जिले में खोला गया केन्द्र मात्र औपचारिकता बनकर रह गया है। यहां पर न तो कोई किसान ही आ सका और न आलू को खरीदा जा सका है। कर्मी ने बताया कि जिले में आलू ही नहीं हुआ तो बिक्री कहां से होगी। यदि हुआ होगा तो शासन के मानकों पर आलू ही मौजूद नहीं है। अब नौ अप्रैल तक केन्द्र पर बैठना है।
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