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पहले दिन ही खटीमा से आने वाले पर्यटक वापस लौटे
इस्लामुद्दीन खां माधोटांडा।
Updated Wed, 15 Nov 2017 10:41 PM IST
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टाइगर रिजर्व
- फोटो : अमर उजाला
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अव्यवस्थाएं रहीं हावी, उद्घाटन के बावजूद पसरा रहा सन्नाटा
टाइगर रिजर्व और चूका बीच इको टूरिज्म वन निगम के हवाले होने के बाद बुधवार को पर्यटकों के लिए खोल दिया गया। पहले दिन उद्घाटन स्थल पर तो जो भी चहल-पहल रही हो, लेकिन शेष जंगल क्षेत्र में अव्यवस्था के चलते कहीं यह नहीं लग रहा था कि आज चूका बीच का उद्घाटन है। वनकर्मियों में भी इंट्री गेट से लेकर चूका बीच तक कहीं कोई उत्साह नहीं दिखाई दिया और न ही वन निगम ने अब तक चूका बीच से लेकर गेट नंबर चार तक बुकिंग और किराया संबंधी बोर्ड लगाए हैं।
खटीमा की ओर से आने वाले कुछ पर्यटक गेट नंबर चार से ही मायूस वापस लौट गए। वजह यह रही कि वन निगम के अफसरों ने चूका बीच का संचालन अपने हाथ में लेने के बाद इसको लेकर कोई प्रचार प्रसार नहीं किया। यही कारण रहा कि कि कुछ पर्यटकों को सही जानकारी न मिल पाने की वजह से वापस लौटना पड़ा। कुल मिलाकर उद्घाटन स्थल के बाद मुस्तफाबाद से लेकर चूका बीच तक पहले दिन सन्नाटा रहा।
बुजुर्ग पर्यटकों को झेलनी पड़ी परेशानी
माधोटांडा। चूका बीच के नये सत्र के पहले दिन टाइगर रिजर्व के अधिकारियों ने वृद्धाश्रम के बुजुर्गों को अपना पहला पर्यटक बनाया। जिन्हें जंगल सफारी द्वारा महोफ रेंज से होकर चूका स्पॉट ले जाया गया। यहां घुमाने के बाद जब चूका बीच के मुख्य इंट्री गेट नंबर चार से बाइफरकेशन के लिए जंगल सफारी रवाना हुई तो गाड़ी में सवार गाइड और अन्य लोगों को यह नहीं मालूम था कि बाइफरकेशन का छह किमी तक का सफर मुसीबत भरा होगा। मार्ग के दोनों ओर जंगल झाड़ी खड़ी थी। वाहन पर सवार पर्यटकों को इन्हीं जंगल झाड़ी के कांटों से दो चार होकर गुजरना पड़ा।
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पांच पर्यटकों की आय से करना पड़ा संतोष
माधोटांडा। यह पहला मौका हैं जब चूका बीच के नये सत्र के लिए वन निगम को मात्र जंगल सफारी से पांच पर्यटकों की आय से ही संतोष करना पड़ा। इसको लेकर वन निगम के कर्मचारी पहले दिन काफी मायूस दिखाई दिए। चूका बीच में वैसे तो सही मायनों में चार दिन पूर्व आए प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ पहले पर्यटक थे। फर्क सिर्फ इतना था कि वह सत्र के 15 नवंबर को होने वाले उद्घाटन से चार दिन पहले चूका बीच आए थे।
इधर, सत्र के पहले दिन वृद्धाश्रम के बुजुर्गों को पहला पर्यटक बनाया गया। मजे की बात यह रही कि आम जनता में से मात्र पांच पर्यटक जंगल सफारी से चूका बीच पहुंचे। तीन बजे के बाद चूका बीच सुनसान हो गया।
चूका बीच पर दिखीं यह व्यवस्थाएं -
- चूका बीच में पर्यटकों के लिए निर्धारित किराया दरों का बोर्ड पिछले वर्ष का ही लगा रहा।
- चूका बीच में अलग-अलग लगे बोर्डों पर विशेषज्ञों और महापुरुषों के सद्वाक्य व स्लोगन को पढ़ने में पर्यटकों ने खासी उत्सुकता दिखाई।
- पहली बार बेम्बो हट के सामने भी वन क्षेत्र में डैम के किनारे पिचिंग लगाकर उसे आकर्षक बनाया गया।
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टाइगर रिजर्व और चूका बीच इको टूरिज्म वन निगम के हवाले होने के बाद बुधवार को पर्यटकों के लिए खोल दिया गया। पहले दिन उद्घाटन स्थल पर तो जो भी चहल-पहल रही हो, लेकिन शेष जंगल क्षेत्र में अव्यवस्था के चलते कहीं यह नहीं लग रहा था कि आज चूका बीच का उद्घाटन है। वनकर्मियों में भी इंट्री गेट से लेकर चूका बीच तक कहीं कोई उत्साह नहीं दिखाई दिया और न ही वन निगम ने अब तक चूका बीच से लेकर गेट नंबर चार तक बुकिंग और किराया संबंधी बोर्ड लगाए हैं।
खटीमा की ओर से आने वाले कुछ पर्यटक गेट नंबर चार से ही मायूस वापस लौट गए। वजह यह रही कि वन निगम के अफसरों ने चूका बीच का संचालन अपने हाथ में लेने के बाद इसको लेकर कोई प्रचार प्रसार नहीं किया। यही कारण रहा कि कि कुछ पर्यटकों को सही जानकारी न मिल पाने की वजह से वापस लौटना पड़ा। कुल मिलाकर उद्घाटन स्थल के बाद मुस्तफाबाद से लेकर चूका बीच तक पहले दिन सन्नाटा रहा।
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बुजुर्ग पर्यटकों को झेलनी पड़ी परेशानी
माधोटांडा। चूका बीच के नये सत्र के पहले दिन टाइगर रिजर्व के अधिकारियों ने वृद्धाश्रम के बुजुर्गों को अपना पहला पर्यटक बनाया। जिन्हें जंगल सफारी द्वारा महोफ रेंज से होकर चूका स्पॉट ले जाया गया। यहां घुमाने के बाद जब चूका बीच के मुख्य इंट्री गेट नंबर चार से बाइफरकेशन के लिए जंगल सफारी रवाना हुई तो गाड़ी में सवार गाइड और अन्य लोगों को यह नहीं मालूम था कि बाइफरकेशन का छह किमी तक का सफर मुसीबत भरा होगा। मार्ग के दोनों ओर जंगल झाड़ी खड़ी थी। वाहन पर सवार पर्यटकों को इन्हीं जंगल झाड़ी के कांटों से दो चार होकर गुजरना पड़ा।
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पांच पर्यटकों की आय से करना पड़ा संतोष
माधोटांडा। यह पहला मौका हैं जब चूका बीच के नये सत्र के लिए वन निगम को मात्र जंगल सफारी से पांच पर्यटकों की आय से ही संतोष करना पड़ा। इसको लेकर वन निगम के कर्मचारी पहले दिन काफी मायूस दिखाई दिए। चूका बीच में वैसे तो सही मायनों में चार दिन पूर्व आए प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ पहले पर्यटक थे। फर्क सिर्फ इतना था कि वह सत्र के 15 नवंबर को होने वाले उद्घाटन से चार दिन पहले चूका बीच आए थे।
इधर, सत्र के पहले दिन वृद्धाश्रम के बुजुर्गों को पहला पर्यटक बनाया गया। मजे की बात यह रही कि आम जनता में से मात्र पांच पर्यटक जंगल सफारी से चूका बीच पहुंचे। तीन बजे के बाद चूका बीच सुनसान हो गया।
चूका बीच पर दिखीं यह व्यवस्थाएं -
- चूका बीच में पर्यटकों के लिए निर्धारित किराया दरों का बोर्ड पिछले वर्ष का ही लगा रहा।
- चूका बीच में अलग-अलग लगे बोर्डों पर विशेषज्ञों और महापुरुषों के सद्वाक्य व स्लोगन को पढ़ने में पर्यटकों ने खासी उत्सुकता दिखाई।
- पहली बार बेम्बो हट के सामने भी वन क्षेत्र में डैम के किनारे पिचिंग लगाकर उसे आकर्षक बनाया गया।