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छठे दिन भी पिंजड़ों में नहीं फंसा रिहायशी इलाके में घूम रहा बाघ
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माधोटांडा। जंगल से निकलकर रिहायशी इलाके में घूम रहा बाघ छठे दिन भी दोनों पिंजड़ों में नहीं फंसा। शाहगढ़ क्षेत्र में चहलकदमी कर रहा बाघ क्षेत्र छोड़ने को तैयार नहीं दिख रहा है। शनिवार को पिंजड़े वाले स्थान से 500 मीटर आगे नहर क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी देखी गई। निगरानी में जुटे वनकर्मी दोनों स्थानों पर मुस्तैद रहकर नजर रखे हुए हैं।
कड़ाके की सर्दी भले ही जंगल से बाहर रिहायशी इलाके में घूम रहे बाघ को न अखर रही हो, मगर बाघ की निगरानी में जुटी वनकर्मियों की टीम को सर्द मौसम के बीच खासी परेशानी उठानी पड़ रही है।
टाइगर रिजर्व के जंगल से बाहर निकला बाघ इन दिनों शाहगढ़ क्षेत्र की खन्नौत नदी से सटे इलाके में डेरा जमाए हुए है। यहां बाघ ने पखवाड़ा भर पहले दस्तक दी थी। तबसे लगातार बाघ अपनी मौजूदगी दर्ज कराए हुए है। हालांकि इस क्षेत्र में बाघ को कैद करने के लिए पहले तो एक पिंजड़ा लगाकर उसमें बकरी को बांधी गई। दो दिन तक कोई सफलता नहीं मिली तो वन अफसरों के निर्देश पर 200 मीटर दूर एक दूसरा पिंजड़ा लगाया गया। बाघ को लालच देने के लिए दूसरे पिंजड़े में पड्डा बांधा गया।
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वनकर्मियों के मुताबिक, बाघ पिंजड़े के करीब तो पहुंचा मगर पिंजड़े में बंधे मवेशियों को देखकर आगे निकल गया। बताते हैं कि पिछले दो दिनों से बाघ की पिंजड़े के आसपास मौजूदगी भी बंद हो गई। उधर, शनिवार को बाघ की मौजूदगी पिंजड़े वाले स्थान से करीब 500 मीटर आगे नहर क्षेत्र में दिखाई दी। सूचना के बाद सामाजिक वानिकी की टीम मौके पर पहुंची।
बाघ के ताजा पैरों के निशान ट्रेस किए गए हैं। शनिवार को बाघ की कुछ दूरी पर मौजूद दिखाई दी है। पगमार्क ट्रेस किए गए हैं। दोनों स्थानों पर वनकर्मी निगरानी में जुटे हैं।
- अयूब हसन, रेंजर
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कड़ाके की सर्दी भले ही जंगल से बाहर रिहायशी इलाके में घूम रहे बाघ को न अखर रही हो, मगर बाघ की निगरानी में जुटी वनकर्मियों की टीम को सर्द मौसम के बीच खासी परेशानी उठानी पड़ रही है।
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टाइगर रिजर्व के जंगल से बाहर निकला बाघ इन दिनों शाहगढ़ क्षेत्र की खन्नौत नदी से सटे इलाके में डेरा जमाए हुए है। यहां बाघ ने पखवाड़ा भर पहले दस्तक दी थी। तबसे लगातार बाघ अपनी मौजूदगी दर्ज कराए हुए है। हालांकि इस क्षेत्र में बाघ को कैद करने के लिए पहले तो एक पिंजड़ा लगाकर उसमें बकरी को बांधी गई। दो दिन तक कोई सफलता नहीं मिली तो वन अफसरों के निर्देश पर 200 मीटर दूर एक दूसरा पिंजड़ा लगाया गया। बाघ को लालच देने के लिए दूसरे पिंजड़े में पड्डा बांधा गया।
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वनकर्मियों के मुताबिक, बाघ पिंजड़े के करीब तो पहुंचा मगर पिंजड़े में बंधे मवेशियों को देखकर आगे निकल गया। बताते हैं कि पिछले दो दिनों से बाघ की पिंजड़े के आसपास मौजूदगी भी बंद हो गई। उधर, शनिवार को बाघ की मौजूदगी पिंजड़े वाले स्थान से करीब 500 मीटर आगे नहर क्षेत्र में दिखाई दी। सूचना के बाद सामाजिक वानिकी की टीम मौके पर पहुंची।
बाघ के ताजा पैरों के निशान ट्रेस किए गए हैं। शनिवार को बाघ की कुछ दूरी पर मौजूद दिखाई दी है। पगमार्क ट्रेस किए गए हैं। दोनों स्थानों पर वनकर्मी निगरानी में जुटे हैं।
- अयूब हसन, रेंजर