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Pilibhit News: बाघ ने बदला ठिकाना, चार किमी दूर अभयपुर के पास पहुंचा
Tue, 04 Jul 2023 12:06 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Tue, 04 Jul 2023 12:06 AM IST
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पूरनपुर। हरदोई ब्रांच नहर पटरी पर 13 मील पत्थर के पास देखे जा रहे बाघ ने अब अपना ठिकाना बदल लिया है। बाघ चार किलोमीटर दूर गांव अभयपुर माधौपुर के समीप पहुंच गया है। बाघ देखकर लोगों ने शोर-शराबा किया। तब बाघ झाडिय़ों में छिप गया। निगरानी में लगी टीम को वहां से गोवंश का अधखाया शव मिला है। वन एवं वन्य जीव प्रभाग के प्रभागीय निदेशक संजीव कुमार ने सोमवार शाम को मौके पर पहुंचकर बाघ की निगरानी रखने और आसपास के लोगों को सतर्क रखने के निर्देश दिए। बाघ को ट्रैंक्युलाइज करने की अनुमति मांगी गई है।
दो जून को गांव मनहरिया के समीप बाघ देखा गया था। इसके बाद बाघ खन्नौत नदी की झाडिय़ों में चला गया था। वहां बाघ कई दिन तक डेरा जमाए रहा। उसे पकडऩे के लिए खन्नौत नदी की झाड़ी में पिंजरा भी लगाया गया था, लेकिन फिर बाघ की चहलकदमी बंद हो गई थी। वन विभाग के अफसरों ने बाघ के जंगल में लौट जाने की बात कहकर कुछ दिन बाद पिंजरा हटा लिया था।
शुक्रवार शाम बाघ हरदोई ब्रांच नहर की पटरी पर पहुंच गया। लोगों ने शोर-शराबा किया तो झाडिय़ों में छिप गया। सूचना पर पहुंचे वनकर्मियों की शोर-शराबा कर रहे ग्रामीणों से नोकझोंक भी हुई। बाघ को पकडऩे लिए फिर पिंजरा लगाया गया। इसके बाद बाघ ने ठिकाना बदल लिया। रविवार रात बाघ चार किलोमीटर दूर गांव अभयपुर माधौपुर के समीप देखा गया। बाघ को लोगों ने नहर पुल पार कर कच्ची पटरी पर जाते देखा तो शोर-शराबा किया। इस पर बाघ फिर झाडिय़ों में छिप गया।
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सूचना पर पहुंचे वनकर्मियों को गांव अभयपुर माधौपुर के समीप बाघ का अधखाया गोवंश का शव मिला। सोमवार शाम को वन एवं वन्य जीव प्रभाग के प्रभागीय निदेशक संजीव कुमार ने मौके पर पहुंचकर बाघ की निगरानी बढ़ाने और आसपास के लोगों को जागरुक करने के निर्देश दिए।
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कहीं दो बाघ तो नहीं हैं जंगल से बाहर
हरदोई ब्रांच नहर के 13 मील पर चहलकदमी करने वाले बाघ के ही गांव अभयपुर माधौपुर के समीप पहुंचने का तर्क वनकर्मी दे रहे हैं। इसके अलावा असम हाईवे से सटे गांव उदयकरनपुर के समीप भी खेतों में बाघ कई दिनों से देखा जा रहा है। सोमवार को भी बाघ उदयकरनपुर के समीप खेत में देखकर लोगों ने शोर-शराबा किया। इस पर बाघ खेतों में दूर भाग गया। इससे ग्रामीण दो बाघों के जंगल से बाहर होने का अंदेशा जता रहे हैं।
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हरदोई ब्रांच नहर के समीप बाघ एक ही है। जो अपना ठिकाना बदल रहा है। बाघ की निगरानी और आसपास के लोगों को सतर्क करने के निर्देश अधीनस्थों को दिेए गए है। बाघ को ट्रैंक्युलाइज करने की भी स्वीकृत मांगी गई है। स्वीकृत मिलने पर बाघ को ट्रैक्यूलाइज कराया जाएगा। बाघ को पकडऩे को पिंजरा पहले ही लगवाया गया है। - संजीव कुमार, प्रभागीय निदेशक वन एवं वन्य जीव प्रभाग
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दो जून को गांव मनहरिया के समीप बाघ देखा गया था। इसके बाद बाघ खन्नौत नदी की झाडिय़ों में चला गया था। वहां बाघ कई दिन तक डेरा जमाए रहा। उसे पकडऩे के लिए खन्नौत नदी की झाड़ी में पिंजरा भी लगाया गया था, लेकिन फिर बाघ की चहलकदमी बंद हो गई थी। वन विभाग के अफसरों ने बाघ के जंगल में लौट जाने की बात कहकर कुछ दिन बाद पिंजरा हटा लिया था।
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शुक्रवार शाम बाघ हरदोई ब्रांच नहर की पटरी पर पहुंच गया। लोगों ने शोर-शराबा किया तो झाडिय़ों में छिप गया। सूचना पर पहुंचे वनकर्मियों की शोर-शराबा कर रहे ग्रामीणों से नोकझोंक भी हुई। बाघ को पकडऩे लिए फिर पिंजरा लगाया गया। इसके बाद बाघ ने ठिकाना बदल लिया। रविवार रात बाघ चार किलोमीटर दूर गांव अभयपुर माधौपुर के समीप देखा गया। बाघ को लोगों ने नहर पुल पार कर कच्ची पटरी पर जाते देखा तो शोर-शराबा किया। इस पर बाघ फिर झाडिय़ों में छिप गया।
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सूचना पर पहुंचे वनकर्मियों को गांव अभयपुर माधौपुर के समीप बाघ का अधखाया गोवंश का शव मिला। सोमवार शाम को वन एवं वन्य जीव प्रभाग के प्रभागीय निदेशक संजीव कुमार ने मौके पर पहुंचकर बाघ की निगरानी बढ़ाने और आसपास के लोगों को जागरुक करने के निर्देश दिए।
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कहीं दो बाघ तो नहीं हैं जंगल से बाहर
हरदोई ब्रांच नहर के 13 मील पर चहलकदमी करने वाले बाघ के ही गांव अभयपुर माधौपुर के समीप पहुंचने का तर्क वनकर्मी दे रहे हैं। इसके अलावा असम हाईवे से सटे गांव उदयकरनपुर के समीप भी खेतों में बाघ कई दिनों से देखा जा रहा है। सोमवार को भी बाघ उदयकरनपुर के समीप खेत में देखकर लोगों ने शोर-शराबा किया। इस पर बाघ खेतों में दूर भाग गया। इससे ग्रामीण दो बाघों के जंगल से बाहर होने का अंदेशा जता रहे हैं।
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हरदोई ब्रांच नहर के समीप बाघ एक ही है। जो अपना ठिकाना बदल रहा है। बाघ की निगरानी और आसपास के लोगों को सतर्क करने के निर्देश अधीनस्थों को दिेए गए है। बाघ को ट्रैंक्युलाइज करने की भी स्वीकृत मांगी गई है। स्वीकृत मिलने पर बाघ को ट्रैक्यूलाइज कराया जाएगा। बाघ को पकडऩे को पिंजरा पहले ही लगवाया गया है। - संजीव कुमार, प्रभागीय निदेशक वन एवं वन्य जीव प्रभाग