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Pilibhit News: इकोत्तरनाथ मंदिर पहुंचने की डगर कठिन... सिस्टम ले रहा भक्तों की परीक्षा
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मंदिर जाने वाले रास्ते पर दलदल-संवाद
धार्मिक स्थल के विकास और पक्के रास्ते के लिए जनप्रतिनिधि एवं अफसर दे रहे आश्वासन, कंटीली झाड़ियां और ऊबड़-खाबड़ पगडंडी से होकर गुजरने में हो रही परेशानी
घुंघचाई। जंगल में स्थित प्राचीन इकोत्तरनाथ मंदिर पहुंचने की डगर मुश्किलों भरी है। पक्का मार्ग न होने से श्रद्धालुओं को जंगल और झाड़ियों के बीच से गुजरकर परीक्षा देना पड़ रहा है। बरसात के मौसम में कच्चे रास्ते पर जलभराव और कीचड़ हो जाता है। अरसे से मंदिर तक जाने वाले रास्ते पर पक्की सड़क का निर्माण कराने की मांग होती रही है। जनप्रतिनिधि एवं अफसर सिर्फ कोरे आश्वासन देते रहे हैं।
खुटार रेंज के मंडनपुर जंगल में स्थित इकोत्तरनाथ मंदिर लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। जिले से ही नहीं बल्कि अन्य जनपदों से भी श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। शासन के बड़े अफसर तक यहां दर्शन-पूजन करने आ चुके हैं। उन्होंने भी मार्ग की बदहाली को करीब से देखा, लेकिन फिर भी कोई पहल नहीं हुई। गोमती नदी किनारे स्थित प्राचीन इकोत्तरनाथ मंदिर तक पहुंचना श्रद्धालुओं के लिए काफी मुश्किल हो जाता है। कई स्थानों पर झाड़ियां इतनी घनी हैं कि राह बनानी पड़ती है। सांप-बिच्छू और जंगली जानवरों का भी खतरा बना रहता है। मंदिर पर रोजाना श्रद्धालुओं का आना जाना रहता है। सावन माह, महाशिवरात्रि, अमावस्या, दशहरा और अन्य पर्वों पर यहां श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है। उस समय रास्ता साफ कराया जाता है, लेकिन स्थाई समाधान अब तक नहीं निकला। गोमती नदी में जलस्तर बढ़ने पर आवागमन और कठिन हो जाता है। संवाद
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सरकार की नीति विफल, परेशानी जस की तस
मंदिर तक पहुंचने के लिए कोई पक्का मार्ग नहीं है। इससे श्रद्धालु काफी परेशान होते हैं। मंदिर तक पक्की सड़क का निर्माण कराया जाए।- विजय वर्मा
प्राचीन धार्मिक स्थलों को विकसित करने की सरकार की नीति होने के बाद भी इकोत्तर नाथ मंदिर तक पहुंचने वाले दुर्गम रास्ते पर ध्यान नहीं दिया जा रहा।- जितेंद्र अग्निहोत्री
यदि पक्के मार्ग निर्माण हो जाए तो समस्या का समाधान हो जाएगा। यह प्रमुख धार्मिक स्थल है। इसके विकास के लिए आवागमन की अच्छी सुविधा आवश्यक है।- रामनाथ वर्मा
मंदिर जाने वाले कच्चे रास्ते के दोनों ओर कंटीली झाड़ियां हैं। इन्हें साफ कराकर रास्ते को पक्का करा दिया जाए तो इस प्राचीन स्थल का विकास हो सकेगा।- रामचंद्र
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जंगल के अंदर सड़क बनवाने के लिए कई बार प्रस्ताव दिए हैं, मगर जंगल की समस्या के कारण दिक्कत आ रही है। फिर से प्रस्ताव दिया जाएगा।- बाबूराम पासवान, विधायक पूरनपुर
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घुंघचाई। जंगल में स्थित प्राचीन इकोत्तरनाथ मंदिर पहुंचने की डगर मुश्किलों भरी है। पक्का मार्ग न होने से श्रद्धालुओं को जंगल और झाड़ियों के बीच से गुजरकर परीक्षा देना पड़ रहा है। बरसात के मौसम में कच्चे रास्ते पर जलभराव और कीचड़ हो जाता है। अरसे से मंदिर तक जाने वाले रास्ते पर पक्की सड़क का निर्माण कराने की मांग होती रही है। जनप्रतिनिधि एवं अफसर सिर्फ कोरे आश्वासन देते रहे हैं।
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खुटार रेंज के मंडनपुर जंगल में स्थित इकोत्तरनाथ मंदिर लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। जिले से ही नहीं बल्कि अन्य जनपदों से भी श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। शासन के बड़े अफसर तक यहां दर्शन-पूजन करने आ चुके हैं। उन्होंने भी मार्ग की बदहाली को करीब से देखा, लेकिन फिर भी कोई पहल नहीं हुई। गोमती नदी किनारे स्थित प्राचीन इकोत्तरनाथ मंदिर तक पहुंचना श्रद्धालुओं के लिए काफी मुश्किल हो जाता है। कई स्थानों पर झाड़ियां इतनी घनी हैं कि राह बनानी पड़ती है। सांप-बिच्छू और जंगली जानवरों का भी खतरा बना रहता है। मंदिर पर रोजाना श्रद्धालुओं का आना जाना रहता है। सावन माह, महाशिवरात्रि, अमावस्या, दशहरा और अन्य पर्वों पर यहां श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है। उस समय रास्ता साफ कराया जाता है, लेकिन स्थाई समाधान अब तक नहीं निकला। गोमती नदी में जलस्तर बढ़ने पर आवागमन और कठिन हो जाता है। संवाद
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सरकार की नीति विफल, परेशानी जस की तस
मंदिर तक पहुंचने के लिए कोई पक्का मार्ग नहीं है। इससे श्रद्धालु काफी परेशान होते हैं। मंदिर तक पक्की सड़क का निर्माण कराया जाए।- विजय वर्मा
प्राचीन धार्मिक स्थलों को विकसित करने की सरकार की नीति होने के बाद भी इकोत्तर नाथ मंदिर तक पहुंचने वाले दुर्गम रास्ते पर ध्यान नहीं दिया जा रहा।- जितेंद्र अग्निहोत्री
यदि पक्के मार्ग निर्माण हो जाए तो समस्या का समाधान हो जाएगा। यह प्रमुख धार्मिक स्थल है। इसके विकास के लिए आवागमन की अच्छी सुविधा आवश्यक है।- रामनाथ वर्मा
मंदिर जाने वाले कच्चे रास्ते के दोनों ओर कंटीली झाड़ियां हैं। इन्हें साफ कराकर रास्ते को पक्का करा दिया जाए तो इस प्राचीन स्थल का विकास हो सकेगा।- रामचंद्र
जंगल के अंदर सड़क बनवाने के लिए कई बार प्रस्ताव दिए हैं, मगर जंगल की समस्या के कारण दिक्कत आ रही है। फिर से प्रस्ताव दिया जाएगा।- बाबूराम पासवान, विधायक पूरनपुर

मंदिर जाने वाले रास्ते पर दलदल-संवाद

मंदिर जाने वाले रास्ते पर दलदल-संवाद

मंदिर जाने वाले रास्ते पर दलदल-संवाद

मंदिर जाने वाले रास्ते पर दलदल-संवाद