{"_id":"589b22514f1c1b8a5237a3fc","slug":"the-photo-was-captured-killer-tigress","type":"story","status":"publish","title_hn":" कैमरे में कैद हुई खूनी बाघिन की तस्वीर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कैमरे में कैद हुई खूनी बाघिन की तस्वीर
ब्यूरो /पीलीभीत
Updated Wed, 08 Feb 2017 10:56 PM IST
विज्ञापन
कैमरे में कैद हुई खूनी बाघिन की तस्वीर
एक के बाद एक पांच लोगों की जान लेने वाली खूनी बाघिन की तस्वीर निगरानी को लगाए गए कैमरे में कैद हो गई है। कुंवरपुर में लगे कैमरे में हुई इस फोटो से विभाग अब इसकी पहचान में जुटा है। पांच फरवरी को शाहगढ़ के निकट कुंवरपुर गांव में पहुंची बाघिन ने खेत की रखवाली कर रहे धनीराम पर हमला कर मार डाला था। घटना के बाद बाघिन की निगरानी के लिए वन विभाग ने लेजर कैमरे लगाए थे। इनमें एक कैमरे में पांच फरवरी को ही शाम 6.08 बजे बाघिन की फोटो कैद हुई है। हैरानी की बात यह है कि इस समय अधिकारी वनकर्मियों व ग्रामीणों के साथ क्षेत्र का भ्रमण कर स्थिति का जायजा ले रहे थे। उस समय किसी की निगाह इस पर नहीं पड़ी। दूसरे दिन कैमरे की चिप लोड होने पर फोटो आने का खुलासा हुआ। हमलावर की फोटो सामने आने पर अब विभाग इसकी पहचान में जुट गया है। कैमरा ट्रेप में बाघिन की फोटो आने की पुष्टि वनसंरक्षक वीके सिंह ने भी की है।
बाघिन/बाघ को लेकर अधिकारियों में असमंजस
पीलीभीत। लगातार हमले कर पांच लोगों की जान लेने एवं एक महिला को घायल करने का गुनहगार बाघ या बाघिन है इसको लेकर अधिकारियों में असमंजस है। पिपरिया संतोष में 27 नवंबर को हुए हमले के बाद से छह फरवरी को पिपरिया करम में हुए नन्हेंलाल पर हमले तक वन विभाग एवं अन्य एक्सपर्ट हर बार पदचिह्न मिलने के बाद इसे बाघिन होना मान रहे थे। मंगलवार को भी वनसंरक्षक ने इसके बाघिन होने की आशंका व्यक्त की थी बुधवार को प्रेसवार्ता के दौरान भी अधिकारी इसे कभी बाघ तो कभी बाघिन बता रहे थे। इस पर पूछा गया तो वन संरक्षक ने बताया कि मुद्दा बाघ या बाघिन का नहीं है। फिलहाल उसे पकड़ना प्राथमिकता है। पकड़ में आने के बाद ही बाघ या बाघिन की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
विज्ञापन
बाघिन/बाघ को लेकर अधिकारियों में असमंजस
पीलीभीत। लगातार हमले कर पांच लोगों की जान लेने एवं एक महिला को घायल करने का गुनहगार बाघ या बाघिन है इसको लेकर अधिकारियों में असमंजस है। पिपरिया संतोष में 27 नवंबर को हुए हमले के बाद से छह फरवरी को पिपरिया करम में हुए नन्हेंलाल पर हमले तक वन विभाग एवं अन्य एक्सपर्ट हर बार पदचिह्न मिलने के बाद इसे बाघिन होना मान रहे थे। मंगलवार को भी वनसंरक्षक ने इसके बाघिन होने की आशंका व्यक्त की थी बुधवार को प्रेसवार्ता के दौरान भी अधिकारी इसे कभी बाघ तो कभी बाघिन बता रहे थे। इस पर पूछा गया तो वन संरक्षक ने बताया कि मुद्दा बाघ या बाघिन का नहीं है। फिलहाल उसे पकड़ना प्राथमिकता है। पकड़ में आने के बाद ही बाघ या बाघिन की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
विज्ञापन