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नदी के बहते पानी की तेज आवाज, रात में गांव का सन्नाटा, तबाही कर मंजर कर रहा था बयां

Thu, 21 Oct 2021 01:20 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 21 Oct 2021 01:20 AM IST
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The loud sound of the flowing water of the river, the silence of the village at night, was causing destruction
घर और अन्य सामान पूरी तरह जलमग्न है। - फोटो : PILIBHIT
पीलीभीत। शारदा नदी में पानी की तेज आवाज और गांव में पसरा सन्नाटा, मंगलवार रात तबाही का मंजर बयां करने के लिए काफी था। बाढ़ ने ऐसी तबाही मचाई कि कई के सिर से आशियाना छिन गया। भूख से कई बच्चे मां की गोद में छटपटाते रहे।
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प्रशासन की चूक या फिर दैवीय आपदा, जो भी हो इस तबाही में बड़ी संख्या में लोग अपना आशियाना खो चुके हैं। थोड़ा-थोड़ा जोड़कर रखा गृहस्थी का सामान और खेतों में तैयार खड़ी धान की फसल बर्बाद हो गई। बुधवार भोेर में तीन बजे नगरिया खुर्द के प्राथमिक विद्यालय में आशियाना बनाए लोगों से जानकारी की गई, तो नरेंद्र दास ने बताया कि सब कुछ तबाह हो गया। अचानक आई बाढ़ से घर से भागना मुश्किल हो गया। एसएसबी के जवान भगवान साबित हुए। बाढ़ का खौफ सताने लगा है। विकास सरकार ने बताया कि पहले नहीं बताया गया कि बाढ़ आने की आशंका है। अचानक शारदा नदी उफना गई। घरों में पानी भरने लगा। रात में उठे तो पता चला कि बाढ़ आ गई है। घर के सामान और जानवरों तक का पता नहीं चल रहा है। चिंतित बैठीं भरो विश्वास ने बताया कि कुछ नहीं बचा है। समय से पता चल जाता, तो जरूरी सामान निकाल लाते। बच्चे भूख से परेशान थे, तो ग्राम प्रधान ने खाने पीने की व्यवस्था की है। मदद के लंगर भी चल रहे हैं।
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बाढ़ पीड़ितों की कहानी, उन्हीं की जुबानी
शारदा नदी में इतनी तेज बाढ़ आएगी। पता नहीं था, बताया भी नहीं गया। पहले अलर्ट किया गया होता तो सामान लेकर घर पहले ही छोड़ देते। कपड़े, सामान सब छूट गया। भयानक मंजर तीन दिन तक बना रहा।
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- सलविंदर सिंह, रमनगरा
बाढ़ में प्रशासन की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया गया। लोगों ने खुद ही लंगर की व्यवस्था कर बेघर हुए लोगों को सहारा दिया है। पहले 112 नंबर की गाड़ी आ भी जाती थी, मगर जब से बाढ़ आई कोई नहीं देखने आया।

- लक्खा सिंह, रमनगरा
बाढ़ का पानी बस्ती में घुस गया। लोगों ने गुरुद्वारा में शरण ली। सभी के लिए लंगर की व्यवस्था कराई गई है। इतना खतरनाक मंजर पहले कभी नहीं देखा। प्रशासन की ओर से पहले से कोई भी अलर्ट नहीं किया गया। - कृपाल सिंह, गुरुद्वारा ग्रंथी
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