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वादों की फेहरिस्त लंबी, विकास जीरो
ब्यूरो /पीलीभीत
Updated Sat, 14 Jan 2017 11:21 PM IST
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शहर में करीब डेढ़ साल पहले वृहद स्तर पर अतिक्रमण हटाकर शहर को स्मार्ट सिटी बनाने की कवायद शुरू की गई थी। तब विकास के लंबे चौड़े वादे भी किए गए थे, लेकिन सवा दो लाख की आबादी वाले इस शहर में विकास की बात तो दूर, अभी मूलभूत सुविधाएं भी नहीं मिल सकी।
विस्तारीकरण का मामला अधर में
शासन की मांग पर नगर पालिका द्वारा वर्ष 2008 से अब तक तीन बार विस्तारीकरण का प्रस्ताव भेजा गया। इसमें नौगवां पकड़िया, बरहा, चिड़ियादाह, देशनगर को पालिका क्षेत्र में शामिल करने की योजना थी, लेकिन उचित पैरवी न होने से मामला अधर में लटका है।
डलावघर को नहीं मिल सकी जमीन
शहर में 27 वार्ड हैं, लेकिन नगरपालिका के सौ वर्ष पूरे होने के बाद भी इस शहर को कूड़ा डालने के लिए जमीन नसीब नहीं हो सकी। शहर भर में करीब 34 अस्थाई डलावघर में पालिका द्वारा कूड़ा डाला जा रहा है, जो शहरवासियों के लिए मुसीबत का सबब बना हुआ है।
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शहर को लंबे अरसे से है पार्किंग की दरकार
शहर को लंबे अरसे से पार्किग की भी दरकार है। शहर के बाहर या भीतर पार्किंग की कोई व्यवस्था न होने से लोगों को अपने वाहन सड़क किनारे खड़े करने पड़ते हैं। इससे अक्सर जाम लग जाता है। वाहन चोरी की घटनाएं भी बढ़ती जा रही हैं।
फुटपाथ का नामोनिशान नहीं
जिले की दो तहसीलों में फुटपाथ व डिवाइडर युक्त सड़कें देखने को मिलेगी, लेकिन जिला मुख्यालय की सड़कों पर न तो फुटपाथ बना और न ही डिवाइडर। स्टेशन रोड पर आवास विकास परिषद द्वारा 90 लाख की लागत से कार्य शुरू हुआ था, लेकिन वो भी अधूरा छोड़ दिया गया।
शहर में विकास को लेकर कई बड़ी योजनाएं बनाई जा चुकी हैं। उम्मीद है कि जल्द ही विकास कार्य धरातल पर दिख सकेंगे। पार्किंग को लेकर मीना बाजार चिह्नित किया गया था। वहां वाहन खड़ा कराने की जिम्मेदारी प्रशासन की है।
प्रभात जायसवाल, अध्यक्ष, नगर पालिका
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विस्तारीकरण का मामला अधर में
शासन की मांग पर नगर पालिका द्वारा वर्ष 2008 से अब तक तीन बार विस्तारीकरण का प्रस्ताव भेजा गया। इसमें नौगवां पकड़िया, बरहा, चिड़ियादाह, देशनगर को पालिका क्षेत्र में शामिल करने की योजना थी, लेकिन उचित पैरवी न होने से मामला अधर में लटका है।
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डलावघर को नहीं मिल सकी जमीन
शहर में 27 वार्ड हैं, लेकिन नगरपालिका के सौ वर्ष पूरे होने के बाद भी इस शहर को कूड़ा डालने के लिए जमीन नसीब नहीं हो सकी। शहर भर में करीब 34 अस्थाई डलावघर में पालिका द्वारा कूड़ा डाला जा रहा है, जो शहरवासियों के लिए मुसीबत का सबब बना हुआ है।
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शहर को लंबे अरसे से है पार्किंग की दरकार
शहर को लंबे अरसे से पार्किग की भी दरकार है। शहर के बाहर या भीतर पार्किंग की कोई व्यवस्था न होने से लोगों को अपने वाहन सड़क किनारे खड़े करने पड़ते हैं। इससे अक्सर जाम लग जाता है। वाहन चोरी की घटनाएं भी बढ़ती जा रही हैं।
फुटपाथ का नामोनिशान नहीं
जिले की दो तहसीलों में फुटपाथ व डिवाइडर युक्त सड़कें देखने को मिलेगी, लेकिन जिला मुख्यालय की सड़कों पर न तो फुटपाथ बना और न ही डिवाइडर। स्टेशन रोड पर आवास विकास परिषद द्वारा 90 लाख की लागत से कार्य शुरू हुआ था, लेकिन वो भी अधूरा छोड़ दिया गया।
शहर में विकास को लेकर कई बड़ी योजनाएं बनाई जा चुकी हैं। उम्मीद है कि जल्द ही विकास कार्य धरातल पर दिख सकेंगे। पार्किंग को लेकर मीना बाजार चिह्नित किया गया था। वहां वाहन खड़ा कराने की जिम्मेदारी प्रशासन की है।
प्रभात जायसवाल, अध्यक्ष, नगर पालिका