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Pilibhit News: एसएलएओ का पूरा स्टाफ किया बरेली से संबद्ध
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पीलीभीत। बरेली-सितारगंज हाईवे प्रकरण में जांच कमेटी ने भूमि अध्याप्ति अधिकारी (एसएलएओ) पीलीभीत का पूरा स्टाफ अभिलेखों सहित बरेली से संबद्ध कर दिया है। ऐसा पीलीभीत से गए अभिलेखों की निगरानी करने के लिए किया गया है।
बरेली-सितारगंज हाईवे चौड़ीकरण के लिए भूमि अधिग्रहण में हुए घोटाले की जांच अभिलेखों को खंगालने के साथ ही शुरू हो गई है। बुधवार को सिटी मजिस्ट्रेट को मुआवजे की फाइलों सहित बरेली बुलाया गया था। इसके बाद शाम तक अभिलेखों की जांच की गई। साथ ही अभिलेखों की सुरक्षा के लिए विशेष रूप से स्टाफ की तैनाती भी कर दी गई, ताकि कोई किसी प्रकार की छेड़खानी न कर पाए।
बता दें कि अभिलेखों में राजस्व, लोक निर्माण और एनएच की ओर से किए गए संयुक्त सर्वे की रिपोर्ट भी शामिल है। अभिलेखों की जांच के लिए तीन दिन का समय निर्धारित किया गया है।
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अब अभिलेखों के आधार पर तत्कालीन अधिकारियों के साथ गलत ढंग से मुआवजा लेने वालों के नाम चिह्नित किए जाएंगे। इसके बाद जांच रिपोर्ट मंडलायुक्त के माध्यम से शासन को भेजी जाएगी।
भूमि अध्याप्ति अधिकारी विजयवर्धन तोमर ने बताया कि अभिलेखाें को बरेली पहुंचा दिया गया है। बरेली और पीलीभीत जिलों से 400 से अधिक गाटा संख्या की जमीनों को हाईवे के लिए अधिगृहीत किया गया था। जांच टीम को धारा 80 के सभी मामलों की जानकारी अभिलेखों के साथ दे दी गई है।
इन अभिलेखों के माध्यम से तत्कालीन अधिकारियों के नाम, सर्वे के दौरान की परिसंपत्तियाें का विवरण और कितने लोगों ने भूमि उपयोग को हाईवे का नोटिफिकेशन जारी होने के बदलवाया है इसकी जांच की जाएगी। नाम चिह्नित कर रिपोर्ट शासन को कार्रवाई के लिए भेजी जाएगी।
जांच को दो हिस्सों में बांटा
कमेटी ने जांच को दो हिस्सों में बांट दिया है। बरेली जिले में आने वाली भूमि की जांच वहीं से होगी और पीलीभीत जिले की यहां के अधिकारी जांच करेंगे। ताकि जांच को आसानी से और कम समय में पूरा किया जा सके।
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बरेली-सितारगंज हाईवे चौड़ीकरण के लिए भूमि अधिग्रहण में हुए घोटाले की जांच अभिलेखों को खंगालने के साथ ही शुरू हो गई है। बुधवार को सिटी मजिस्ट्रेट को मुआवजे की फाइलों सहित बरेली बुलाया गया था। इसके बाद शाम तक अभिलेखों की जांच की गई। साथ ही अभिलेखों की सुरक्षा के लिए विशेष रूप से स्टाफ की तैनाती भी कर दी गई, ताकि कोई किसी प्रकार की छेड़खानी न कर पाए।
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बता दें कि अभिलेखों में राजस्व, लोक निर्माण और एनएच की ओर से किए गए संयुक्त सर्वे की रिपोर्ट भी शामिल है। अभिलेखों की जांच के लिए तीन दिन का समय निर्धारित किया गया है।
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अब अभिलेखों के आधार पर तत्कालीन अधिकारियों के साथ गलत ढंग से मुआवजा लेने वालों के नाम चिह्नित किए जाएंगे। इसके बाद जांच रिपोर्ट मंडलायुक्त के माध्यम से शासन को भेजी जाएगी।
भूमि अध्याप्ति अधिकारी विजयवर्धन तोमर ने बताया कि अभिलेखाें को बरेली पहुंचा दिया गया है। बरेली और पीलीभीत जिलों से 400 से अधिक गाटा संख्या की जमीनों को हाईवे के लिए अधिगृहीत किया गया था। जांच टीम को धारा 80 के सभी मामलों की जानकारी अभिलेखों के साथ दे दी गई है।
इन अभिलेखों के माध्यम से तत्कालीन अधिकारियों के नाम, सर्वे के दौरान की परिसंपत्तियाें का विवरण और कितने लोगों ने भूमि उपयोग को हाईवे का नोटिफिकेशन जारी होने के बदलवाया है इसकी जांच की जाएगी। नाम चिह्नित कर रिपोर्ट शासन को कार्रवाई के लिए भेजी जाएगी।
जांच को दो हिस्सों में बांटा
कमेटी ने जांच को दो हिस्सों में बांट दिया है। बरेली जिले में आने वाली भूमि की जांच वहीं से होगी और पीलीभीत जिले की यहां के अधिकारी जांच करेंगे। ताकि जांच को आसानी से और कम समय में पूरा किया जा सके।