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Pilibhit News: कॉरिडोर पर इंसानों का कब्जा, भटककर उत्पाती हो रहे हाथियों की निगरानी बनी मुसीबत

Thu, 13 Feb 2025 12:55 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 13 Feb 2025 12:55 AM IST
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The corridor is occupied by humans, monitoring the stray elephants has become a problem
फखरूल इस्लाम
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पीलीभीत। नेपाल के हाथियों के लिए पीटीआर की बराही, हरीपुर रेंज का जंगल दशकों से कॉरिडोर रहा है। हाथी जंगल में आने के बाद कुछ दिन विचरण करके लौट जाते थे, लेकिन वासस्थल और कॉरिडोर पर कब्जे होने से हाथी भटकने लगे। रास्ता भटककर हाथी उत्पात मचाने लगे हैं। चार दिन पूर्व से दो नेपाली हाथी बराही और माला रेंज के जंगल में डेरा जमाकर उत्पात मचा रहे हैं। उनकी निगरानी विभाग के लिए चुनौती बनी हुई है।
शारदा नदी के पार पीलीभीत टाइगर रिजर्व का जंगल क्षेत्र कभी नेपाली हाथियों का वासस्थल था। खुली सीमा होने के चलते हाथी जनपद सीमा में आकर, कई दिन रुकने के बाद वापस चले जाते थे। रमनगरा, गुन्हान, ढकिया ताल्लुके महाराजपुर एवं भूरा गोरख डिब्बी का क्षेत्र हाथियों का कॉरिडोर माना जाता था।
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जहां अक्सर हाथियों की मौजूदगी बनी रहती थी, लेकिन वर्षों पूर्व इलाके की वन भूमि पर अतिक्रमण शुरू हो गया। जिम्मेदारों की सांठगांठ के चलते अतिक्रमण नासूर बन गया। हालांकि शुरुआती दौर में वन विभाग ने अतिक्रमण रोकने की कोशिश भी की। लेकिन, कार्रवाई आद में ठंडे बस्ते में चली गई। इसके बाद संयुक्त सीमांकन की आड़ में अतिक्रमण का दायरा बढ़ता गया। डीएफओ मनीष सिंह ने बताया कि हाथियों की निगरानी के लिए टीमों को लगाया गया है। टीम लगातार नजर बनाए हुए हैं।
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हाथियों के उत्पात मचाने के लगातार मिलते रहे संकेत
वासस्थल नष्ट होने की वजह से हाथी उत्पाती होने लगे। इसके संकेत भी लगातार मिलते रहे। हाथियों ने खासकर उन्हीं स्थानों को निशाना बनाया, जहां पर पहले उनके वासस्थल हुआ करते थे। वहीं पर हो रही खेती को उजाड़ा जाता रहा। यह बात अफसरों ने भी कई बार स्वीकार की, लेकिन समाधान के ठोस कदम नहीं उठाए। अब हाथी नदी को पार कर बड़े जंगलों की ओर आने लगे हैं। इससे खतरा और बढ़ गया है। अफसरों के पास हाथियों को रोकने के लिए कोई ठोस उपाय नहीं हैं।


एलीफेंट रिजर्व पर शुरू हो अमल तो सुधरें हालात
हाथियों की दशकों से चहलकदमी को देखते हुए भारत सरकार ने यूपी के तराई के जंगलों को एलीफेंट रिजर्व घोषित किया गया। पूर्व में इसको लेकर आदेश जारी हो गए। इसमें पीटीआर के अलावा दुधवा, कर्तिनायाघाट भी शामिल है। अभी इसपर अमल शुरू नहीं हो सका है। जानकारों का कहना है कि एलीफेंट रिजर्व पर अमल शुरू होने से हाथियों को खुले में विचरण करने को मिलेगा। भटककर उत्पात मचाने की समस्या दूर होगी।
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