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Pilibhit News: थैलेसीमिया की जांच शुरू, टेक्नीशियन की कमी में अटकी वायरल लोड जांच
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पैथालॉजी लैब में मरीज का ब्लड सैंपल लेती स्टाफ नर्स। संवाद
पीलीभीत। गंभीर आनुवांशिक रोग थैलेसीमिया की जांच के लिए मरीजों को अब दूसरे जिलों में नहीं जाना पड़ेगा। यह जांच अब जिला अस्पताल की पैथालॉजी में ही हो जाएगी। जांच सप्ताह में दो बार होगी। पहली बार यह जांच सोमवार को की जाएगी। वहीं हेपेटाइटिस बी और सी के मरीजों की वायरल लोड जांच अब तक शुरू नहीं हो सकी है। इसका कारण टेक्नीशियन न होना है, मशीन अस्पताल में पहले से ही है।
मेडिकल कॉलेज के अधीन संचालित जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं में लगातार सुधार हो रहा है। थैलेसीमिया की जांच सुविधा औपचारिक रूप से शुरू दी गई है। आधिकारिक रूप से मरीजों की जांच सोमवार से शुरू हो जाएगी। जांचें हफ्ते में दो दिन सिर्फ सोमवार और बृहस्पतिवार को ही होंगी। पैथालॉजी विभाग की इस पहल से जिले के उन परिवारों को राहत मिलेगी, जो अब तक अपने बच्चों या परिजनों की थैलेसीमिया जांच के लिए बरेली, लखनऊ आदि शहरों का रुख करते थे।
थैलेसीमिया एक आनुवंशिक बीमारी है। इसमें शरीर में रक्त बनाने की प्रक्रिया प्रभावित होती है। इस बीमारी की पहचान समय पर हो जाए तो इसके प्रभाव को नियंत्रित किया जा सकता है। जिला अस्पताल के पैथालॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. विभूति गोयल ने बताया कि थैलेसीमिया की जांच सोमवार से शुरू कर दी जाएगी।
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थैलेसीमिया के 20, सिकल सेल एनीमिया का एक मरीज है पंजीकृत
पैथालॉजी विभाग के ब्लड बैंक में अभी थैलेसीमिया के करीब 20 मरीज पंजीकृत हैं। इन्हें ब्लड बैंक की ओर से नियमित निशुल्क रक्त मुहैया कराया जाता है। इसी के साथ एक मरीज सिकल सेल एनीमिया का भी पंजीकृत है। ब्लड बैंक को इन बीमारियों के अलावा कैंसर, प्रसूता और हादसों में घायलों को रक्त मुहैया कराया जाता है।
2500 से 3000 तक में होती है थैलेसीमिया की जांच
शहर में प्राइवेट लैब व निजी कंपनी के सेंटर पर थैलेसीमिया की जांच के लिए 2500 से 3000 रुपये तक वसूले जाते हैं। वहीं जिला अस्पताल में इस सुविधा के शुरू होने से मरीजों की निशुल्क जांच होगी। जांच रिपोर्ट भी 24 घंटे में मिल जाएगी। वायरल लोड जांच में तीन हजार से अधिक रुपये खर्च करने पड़ते हैं।
हेपेटाइटिस के मरीजों को राहत नहीं, जांच के लिए जा रहे अन्य जिलों में
जिला अस्पताल में इलाज करा रहे हेपेटाइटिस बी और सी के मरीजों को वायरल लोड जांच के लिए अभी बरेली, लखनऊ आदि शहरों के चक्कर काटने होंगे। अस्पताल के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में हेपेटाइटिस की जांच के लिए लंबे समय से टेक्नीशियन की तैनाती नहीं है। इससे मशीन की उपलब्धता के बाद भी मरीजों को दूसरे जिलों में रेफर किया जा रहा है।
पूर्व में वायरल लोड की जांच के लिए टेक्नीशियन था। कुछ समय से टेक्नीशियन की उपलब्धता नहीं है। मरीजों की जांच दूसरे जिलों से कराई जा रही है। टेक्नीशियन की भर्ती होने के बाद जल्द ही वायरल लोड जांच भी जिला अस्पताल में होने लगेगी। - डॉ. रमाकांत सागर, अधीक्षक जिला अस्पताल
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मेडिकल कॉलेज के अधीन संचालित जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं में लगातार सुधार हो रहा है। थैलेसीमिया की जांच सुविधा औपचारिक रूप से शुरू दी गई है। आधिकारिक रूप से मरीजों की जांच सोमवार से शुरू हो जाएगी। जांचें हफ्ते में दो दिन सिर्फ सोमवार और बृहस्पतिवार को ही होंगी। पैथालॉजी विभाग की इस पहल से जिले के उन परिवारों को राहत मिलेगी, जो अब तक अपने बच्चों या परिजनों की थैलेसीमिया जांच के लिए बरेली, लखनऊ आदि शहरों का रुख करते थे।
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थैलेसीमिया एक आनुवंशिक बीमारी है। इसमें शरीर में रक्त बनाने की प्रक्रिया प्रभावित होती है। इस बीमारी की पहचान समय पर हो जाए तो इसके प्रभाव को नियंत्रित किया जा सकता है। जिला अस्पताल के पैथालॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. विभूति गोयल ने बताया कि थैलेसीमिया की जांच सोमवार से शुरू कर दी जाएगी।
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थैलेसीमिया के 20, सिकल सेल एनीमिया का एक मरीज है पंजीकृत
पैथालॉजी विभाग के ब्लड बैंक में अभी थैलेसीमिया के करीब 20 मरीज पंजीकृत हैं। इन्हें ब्लड बैंक की ओर से नियमित निशुल्क रक्त मुहैया कराया जाता है। इसी के साथ एक मरीज सिकल सेल एनीमिया का भी पंजीकृत है। ब्लड बैंक को इन बीमारियों के अलावा कैंसर, प्रसूता और हादसों में घायलों को रक्त मुहैया कराया जाता है।
2500 से 3000 तक में होती है थैलेसीमिया की जांच
शहर में प्राइवेट लैब व निजी कंपनी के सेंटर पर थैलेसीमिया की जांच के लिए 2500 से 3000 रुपये तक वसूले जाते हैं। वहीं जिला अस्पताल में इस सुविधा के शुरू होने से मरीजों की निशुल्क जांच होगी। जांच रिपोर्ट भी 24 घंटे में मिल जाएगी। वायरल लोड जांच में तीन हजार से अधिक रुपये खर्च करने पड़ते हैं।
हेपेटाइटिस के मरीजों को राहत नहीं, जांच के लिए जा रहे अन्य जिलों में
जिला अस्पताल में इलाज करा रहे हेपेटाइटिस बी और सी के मरीजों को वायरल लोड जांच के लिए अभी बरेली, लखनऊ आदि शहरों के चक्कर काटने होंगे। अस्पताल के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में हेपेटाइटिस की जांच के लिए लंबे समय से टेक्नीशियन की तैनाती नहीं है। इससे मशीन की उपलब्धता के बाद भी मरीजों को दूसरे जिलों में रेफर किया जा रहा है।
पूर्व में वायरल लोड की जांच के लिए टेक्नीशियन था। कुछ समय से टेक्नीशियन की उपलब्धता नहीं है। मरीजों की जांच दूसरे जिलों से कराई जा रही है। टेक्नीशियन की भर्ती होने के बाद जल्द ही वायरल लोड जांच भी जिला अस्पताल में होने लगेगी। - डॉ. रमाकांत सागर, अधीक्षक जिला अस्पताल

पैथालॉजी लैब में मरीज का ब्लड सैंपल लेती स्टाफ नर्स। संवाद