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पीलीभीत-मैलानी रूट पर आखिर कब दौड़ेगी ट्रेन
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पीलीभीत। मैलानी रूट पर आखिर कब ट्रेन दौड़ पाएगी। पीलीभीत टाइगर रिजर्व रेल प्रशासन को आठ किलोमीटर में ब्रॉडगेज की पटरियां बिछाने के लिए एनओसी नहीं दे रहा। कहीं दुधवा टाइगर रिजर्व की तरह पीलीभीत टाइगर रिजर्व भी रेलवे को एनओसी देने से मना न कर दे। ऐसा होने की स्थिति में इस रूट पर ट्रेनें चलना मुश्किल हो जाएगा। ऐसे में लखनऊ जाने वाले अक्सर चर्चा करते हैं कि इस रूट पर ट्रेन कब तक दौड़ेगी।
मैलानी रूट पर आठ किलोमीटर टाइगर रिजर्व का जंगल पड़ता है। इस रूट पर मीटरगेज की ट्रेनों का संचालन 30 मई 2018 को बंद कर दिया गया था। इसके बाद रेल प्रशासन ने ब्रॉडगेज का काम शुरू किया। टाइगर रिजर्व के वन्यजीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रेल प्रशासन ने टाइगर रिजर्व से एनओसी के लिए आवेदन किया था। डेढ़ साल बीतने के बाद भी रेल प्रशासन को टाइगर रिजर्व की ओर से एनओसी नहीं मिल सकी। इससे पीलीभीत और शाहगढ़ के बीच ब्रॉडगेज का काम ठप है। टाइगर रिजर्व एनओसी को लेकर वाइल्ड लाइफ बोर्ड का हवाला दे रहा है। रेलवे सूत्रों ने बताया कि मामला वाइल्ड लाइफ बोर्ड और रेलवे बोर्ड के बीच में है। रेलवे को एनओसी कब और कैसे मिलेगी, इस बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता।
केंद्र और प्रदेश में भाजपा की सरकार है। जनपद में सांसद और चारों विधायक सत्ता दल के है। जनप्रतिनिधि वाइल्ड लाइफ बोर्ड और रेलवे बोर्ड से वार्ता कर बीच का रास्ता निकाल सकते हैं। तभी जनता को लखनऊ रूट पर ट्रेन का सफर आसान हो सकता है। डेढ़ साल से सब काम ठप है। जनप्रतिनिधि इस ओर बिल्कुल लापरवाह हैं। हालांकि असफरों ने जल्द ट्रेन दौड़ाने के लिए एनओसी लेेने को प्रयास तेज कर दिए हैं।
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मैलानी और बहराइच के बीच दुधवा टाइगर रिजर्व ने रेल प्रशासन को एनओसी नहीं दी। इससे उस रूट पर ब्रॉडगेज की ट्रेनों का दौड़ना मुश्किल है। दो किलामीटर के हिस्से पर दुधवा टाइगर रिजर्व ने वन्यजीवों की सुरक्षा का वास्ता देते हुए ट्रेन जंगल से बाहर हटाने तक की सलाह दे दी। कहीं ऐसे ही पीलीभीत मैलानी रूट का भी हाल न हो जाए। अगर टाइगर रिजर्व ने यह कह दिया कि ट्रेनें जंगल से बाहर आबादी इलाके से चलवाओ तो ब्रॉडगेज पर ट्रेनें दौड़ना मुश्किल हो जाएगा।
मीटरगेज की जगह ब्रॉडगेज की पटरियां डालने के लिए डेढ़ साल से रेल प्रशासन को एनओसी नहीं मिल पा रही है। अब तो यात्री यहां तक कहने लगे हैं कि इससे तो मीटरगेज की ट्रेनें ठीक थीं। मीटरगेज की पटरियों को हटा दिया गया। रेल प्रशासन ने वन्यजीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पांच अंडरपासों की मंजूरी भी दे दी। इसके बाद भी काम अधर में लटका है। कार्यदायी संस्था एनओसी के इंतजार में है।
भोजीपुरा-टनकपुर के बीच ट्रेनें दौड़ने के बाद मैलानी रूट पर ब्रॉडगेज की ट्रेन चलाने की कवायद शुरू हुई थी। इसके लिए तैयारियां भी पूरी कर ली र्गइं, लेकिन 30 मई 2018 को मैलानी और शाहजहांपुर रूट पर मीटरगेज की ट्रेनों का संचालन बंद कर दिया गया। एनओसी न मिलने से मैलानी के बजाय अब शाहजहांपुर रूट पर ट्रेन पहले चलने की संभावना है।
मैलानी रूट पर टाइगर रिजर्व से एनओसी जल्द ही मिलने की संभावना है। एनओसी मिलते ही ब्रॉडगेज का काम शुरू हो जाएगा। इसको लेकर प्रयास जारी है। -राजेंद्र सिंह, पीआरओ, इज्जतनगर मंडल
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मैलानी रूट पर आठ किलोमीटर टाइगर रिजर्व का जंगल पड़ता है। इस रूट पर मीटरगेज की ट्रेनों का संचालन 30 मई 2018 को बंद कर दिया गया था। इसके बाद रेल प्रशासन ने ब्रॉडगेज का काम शुरू किया। टाइगर रिजर्व के वन्यजीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रेल प्रशासन ने टाइगर रिजर्व से एनओसी के लिए आवेदन किया था। डेढ़ साल बीतने के बाद भी रेल प्रशासन को टाइगर रिजर्व की ओर से एनओसी नहीं मिल सकी। इससे पीलीभीत और शाहगढ़ के बीच ब्रॉडगेज का काम ठप है। टाइगर रिजर्व एनओसी को लेकर वाइल्ड लाइफ बोर्ड का हवाला दे रहा है। रेलवे सूत्रों ने बताया कि मामला वाइल्ड लाइफ बोर्ड और रेलवे बोर्ड के बीच में है। रेलवे को एनओसी कब और कैसे मिलेगी, इस बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता।
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केंद्र और प्रदेश में भाजपा की सरकार है। जनपद में सांसद और चारों विधायक सत्ता दल के है। जनप्रतिनिधि वाइल्ड लाइफ बोर्ड और रेलवे बोर्ड से वार्ता कर बीच का रास्ता निकाल सकते हैं। तभी जनता को लखनऊ रूट पर ट्रेन का सफर आसान हो सकता है। डेढ़ साल से सब काम ठप है। जनप्रतिनिधि इस ओर बिल्कुल लापरवाह हैं। हालांकि असफरों ने जल्द ट्रेन दौड़ाने के लिए एनओसी लेेने को प्रयास तेज कर दिए हैं।
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मैलानी और बहराइच के बीच दुधवा टाइगर रिजर्व ने रेल प्रशासन को एनओसी नहीं दी। इससे उस रूट पर ब्रॉडगेज की ट्रेनों का दौड़ना मुश्किल है। दो किलामीटर के हिस्से पर दुधवा टाइगर रिजर्व ने वन्यजीवों की सुरक्षा का वास्ता देते हुए ट्रेन जंगल से बाहर हटाने तक की सलाह दे दी। कहीं ऐसे ही पीलीभीत मैलानी रूट का भी हाल न हो जाए। अगर टाइगर रिजर्व ने यह कह दिया कि ट्रेनें जंगल से बाहर आबादी इलाके से चलवाओ तो ब्रॉडगेज पर ट्रेनें दौड़ना मुश्किल हो जाएगा।
मीटरगेज की जगह ब्रॉडगेज की पटरियां डालने के लिए डेढ़ साल से रेल प्रशासन को एनओसी नहीं मिल पा रही है। अब तो यात्री यहां तक कहने लगे हैं कि इससे तो मीटरगेज की ट्रेनें ठीक थीं। मीटरगेज की पटरियों को हटा दिया गया। रेल प्रशासन ने वन्यजीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पांच अंडरपासों की मंजूरी भी दे दी। इसके बाद भी काम अधर में लटका है। कार्यदायी संस्था एनओसी के इंतजार में है।
भोजीपुरा-टनकपुर के बीच ट्रेनें दौड़ने के बाद मैलानी रूट पर ब्रॉडगेज की ट्रेन चलाने की कवायद शुरू हुई थी। इसके लिए तैयारियां भी पूरी कर ली र्गइं, लेकिन 30 मई 2018 को मैलानी और शाहजहांपुर रूट पर मीटरगेज की ट्रेनों का संचालन बंद कर दिया गया। एनओसी न मिलने से मैलानी के बजाय अब शाहजहांपुर रूट पर ट्रेन पहले चलने की संभावना है।
मैलानी रूट पर टाइगर रिजर्व से एनओसी जल्द ही मिलने की संभावना है। एनओसी मिलते ही ब्रॉडगेज का काम शुरू हो जाएगा। इसको लेकर प्रयास जारी है। -राजेंद्र सिंह, पीआरओ, इज्जतनगर मंडल