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टनकपुर हाईवे... इसे गड्ढों वाला हाईवे कहिए
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पीलीभीत/मझोला। टनकपुर हाईवे को गड्ढों वाला हाईवे कहा जाए तो गलत नहीं होगा। हाईवे पूरी तरह से गहरे गड्ढों में तब्दील हो चुका है। आए दिन बाइक सवार हादसों का भी शिकार हो रहे, लेकिन हैरत की बात है कि आमजन की परेशानी देखने वाला कोई नहीं। अब लोगों में इसको लेकर रोष पनप रहा है।
पीलीभीत से उत्तराखंड के टनद्मपुर को ये हाईवे जोड़ता है। पीलीभीत से बिसरा, न्यूरिया हुसैनपुर, मझोला, पोलीगंज और फिर टनकपुर तक इस हाईवे की करीब 70 किलोमीटर तक की दूरी है। मझोला, न्यूरिया से रोजाना ही बड़ी संख्या में लोग कुछ न कुछ काम से पीलीभीत शहर रोजाना ही आते हैं। अब इस हाईवे की हालात की बात करते हैं, शहर से निकलते ही इस हाईवे की खस्ताहाल सूरत नजर आ जाएगी। हाईवे पूरी तरह से उधड़ गया है। न्यूरिया तक तो इतने गहरे गड्ढे हो गए हैं कि जरा से चूक और आप हादसे का शिकार हो सकते हैं, आए दिन हादसे होते भी हैं।
रोजाना बाइक सवार इन गड्ढों में गिरकर चोटिल होते हैं। मझोला बाजार में गहरे गड्ढे होने से जरा सी चूक बड़े हादसे का सबब बन सकती है। इससे भी बुरा हाल औरैया गांव के आसपास का है। हाईवे पर गड्ढे में होकर दुपहिया और चौपहिया वाहन चालक जैसे तैसे निकलने को मजबूर हो रहे हैं। विधानसभा चुनाव में ताल ठोकने वाले प्रत्याशी और प्रशासनिक अधिकारी भी रोजाना हाईवे से गुजरते हैं, लेकिन किसी की भी नजर जर्जर हाईवे पर नहीं जा रही हैं। खस्ताहाल सड़क को लेकर आम राहगीरों में रोष है। उनका कहना है कि जल्द सड़क बनाई जाए। गड्ढे भरने से काम नहीं चलने वाला।
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पीलीभीत से उत्तराखंड के टनद्मपुर को ये हाईवे जोड़ता है। पीलीभीत से बिसरा, न्यूरिया हुसैनपुर, मझोला, पोलीगंज और फिर टनकपुर तक इस हाईवे की करीब 70 किलोमीटर तक की दूरी है। मझोला, न्यूरिया से रोजाना ही बड़ी संख्या में लोग कुछ न कुछ काम से पीलीभीत शहर रोजाना ही आते हैं। अब इस हाईवे की हालात की बात करते हैं, शहर से निकलते ही इस हाईवे की खस्ताहाल सूरत नजर आ जाएगी। हाईवे पूरी तरह से उधड़ गया है। न्यूरिया तक तो इतने गहरे गड्ढे हो गए हैं कि जरा से चूक और आप हादसे का शिकार हो सकते हैं, आए दिन हादसे होते भी हैं।
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रोजाना बाइक सवार इन गड्ढों में गिरकर चोटिल होते हैं। मझोला बाजार में गहरे गड्ढे होने से जरा सी चूक बड़े हादसे का सबब बन सकती है। इससे भी बुरा हाल औरैया गांव के आसपास का है। हाईवे पर गड्ढे में होकर दुपहिया और चौपहिया वाहन चालक जैसे तैसे निकलने को मजबूर हो रहे हैं। विधानसभा चुनाव में ताल ठोकने वाले प्रत्याशी और प्रशासनिक अधिकारी भी रोजाना हाईवे से गुजरते हैं, लेकिन किसी की भी नजर जर्जर हाईवे पर नहीं जा रही हैं। खस्ताहाल सड़क को लेकर आम राहगीरों में रोष है। उनका कहना है कि जल्द सड़क बनाई जाए। गड्ढे भरने से काम नहीं चलने वाला।
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