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मेडिकल कॉलेज का काम पिछड़ा, अब अगले सत्र में शुरू नहीं पाएगी पढ़ाई
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मेडिकल कॉलेज का निर्माणाधीन भवन। संवाद
- फोटो : PILIBHIT
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पीलीभीत। राजकीय मेडिकल कॉलेज में अगले सत्र से एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू नहीं हो पाएगी। प्रथम वर्ष की पढ़ाई के लिए जरूरी सुविधाएं तय समय पर पूरी नहीं हो सकी हैं। अभी तक सिर्फ 22 प्रतिशत ही काम हो सका है। इसी माह भवन का निरीक्षण होना है, जो कि अब मुश्किल है। कार्यवाहक प्राचार्य का कहना है कि अब कक्षाएं शैक्षिक सत्र 2023-24 में शुरू हो सकेंगी।
दरअसल एमबीबीएस प्रथम वर्ष में एनाटॉमी, फिजियोलॉजी व बायोकेमिस्ट्री विषय की पढ़ाए जाते हैं। इसके लिए कॉलेज का पूरा भवन तैयार होने की जरूरत नहीं। क्लास, हॉस्टल और कुछ अन्य जरूरी सुविधाएं होनी चाहिए। एमसीआई (भारतीय चिकित्सा परिषद) सौ सीटें आवंटित करेगा, लेकिन उससे पहले विशेषज्ञों की एक टीम भवन का मुआयना करेगी और रिपोर्ट एमसीआई और सरकार को सौंपेगी। रिपोर्ट में हरी झंडी मिलने के बाद ही सीटें आवंटित होंगी और संबद्धता मिलेगी।
जिले में बन रहा मेडिकल कॉलेज प्रदेश के बाकी कॉलेेजों के मुकाबले पिछड़ गया। साल की शुरुआत में ही शासन ने आदेश जारी किया था कि शैक्षिक सत्र 2022-23 से बाकी कॉलेजों की तरह पीलीभीत के कॉलेज में भी एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू होगी। जुलाई में भवन का निरीक्षण होना था, लेकिन जरूरी निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ। अब निरीक्षण अगले सत्र में होगा और उसके बाद ही यानी शैक्षिक सत्र 2023-24 में क्लास शुरू होने की उम्मीद की जा सकती है।
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मार्च 2020 में स्वीकृत हुई परियोजना
राजकीय मेडिकल कॉलेज की परियोजना 27 मार्च, 2020 को स्वीकृत हुई थी। इसकी लागत 284.60 करोड़ है। इसमें 58 करोड़ रुपये जारी हो चुका है और 38 करोड़ खर्च भी हो चुके हैं। परियोजना इस साल 12 अक्तूबर तक पूरी होनी है, लेकिन आलम ये है कि अभी 22 फीसदी कार्य ही पूरा हुआ।
अफसरों की हीलाहवाली से निर्माण कार्य सुस्त
मेडिकल कॉलेज के कार्यवाहक प्राचार्य पहले बदायूं मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य थे। कॉलेज की रास्ते के लिए कुछ जमीन खरीदी जानी थी। बजट होने के बावजूद भूमि क्रय नहीं की गई। बाद में जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. वीके तिवारी को कार्यवाहक प्राचार्य बनाया गया। उसके बाद भूमि खरीदने की प्रक्रिया तेज हुई। पिछले माह ही जमीन की रजिस्ट्री हो सकी। इस प्रक्रिया में ही करीब एक साल का वक्त लग गया। इस वजह से निर्माण कार्य भी प्रभावित हुआ।
एमबीबीएस प्रथम वर्ष में एनाटॉमी, फिजियोलॉजी व बायोकेमिस्ट्री की पढ़ाई होती है। इसके लिए जरूरी भवन और हॉस्टल की सुविधा होने के बाद ही एमसीआई सीट आवंटित करती है। जुलाई में भवन का निरीक्षण होना था, लेकिन मेडिकल कॉलेज में ये जरूरी ढांचा तैयार नहीं हो पाया है। इस वजह से अगले सत्र में पढ़ाई शुरू नहीं हो पाएगी। उससे अगले सत्र में क्लास शुरू होंगी। - डॉ. वीके तिवारी, कार्यवाहक प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज
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दरअसल एमबीबीएस प्रथम वर्ष में एनाटॉमी, फिजियोलॉजी व बायोकेमिस्ट्री विषय की पढ़ाए जाते हैं। इसके लिए कॉलेज का पूरा भवन तैयार होने की जरूरत नहीं। क्लास, हॉस्टल और कुछ अन्य जरूरी सुविधाएं होनी चाहिए। एमसीआई (भारतीय चिकित्सा परिषद) सौ सीटें आवंटित करेगा, लेकिन उससे पहले विशेषज्ञों की एक टीम भवन का मुआयना करेगी और रिपोर्ट एमसीआई और सरकार को सौंपेगी। रिपोर्ट में हरी झंडी मिलने के बाद ही सीटें आवंटित होंगी और संबद्धता मिलेगी।
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जिले में बन रहा मेडिकल कॉलेज प्रदेश के बाकी कॉलेेजों के मुकाबले पिछड़ गया। साल की शुरुआत में ही शासन ने आदेश जारी किया था कि शैक्षिक सत्र 2022-23 से बाकी कॉलेजों की तरह पीलीभीत के कॉलेज में भी एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू होगी। जुलाई में भवन का निरीक्षण होना था, लेकिन जरूरी निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ। अब निरीक्षण अगले सत्र में होगा और उसके बाद ही यानी शैक्षिक सत्र 2023-24 में क्लास शुरू होने की उम्मीद की जा सकती है।
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मार्च 2020 में स्वीकृत हुई परियोजना
राजकीय मेडिकल कॉलेज की परियोजना 27 मार्च, 2020 को स्वीकृत हुई थी। इसकी लागत 284.60 करोड़ है। इसमें 58 करोड़ रुपये जारी हो चुका है और 38 करोड़ खर्च भी हो चुके हैं। परियोजना इस साल 12 अक्तूबर तक पूरी होनी है, लेकिन आलम ये है कि अभी 22 फीसदी कार्य ही पूरा हुआ।
अफसरों की हीलाहवाली से निर्माण कार्य सुस्त
मेडिकल कॉलेज के कार्यवाहक प्राचार्य पहले बदायूं मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य थे। कॉलेज की रास्ते के लिए कुछ जमीन खरीदी जानी थी। बजट होने के बावजूद भूमि क्रय नहीं की गई। बाद में जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. वीके तिवारी को कार्यवाहक प्राचार्य बनाया गया। उसके बाद भूमि खरीदने की प्रक्रिया तेज हुई। पिछले माह ही जमीन की रजिस्ट्री हो सकी। इस प्रक्रिया में ही करीब एक साल का वक्त लग गया। इस वजह से निर्माण कार्य भी प्रभावित हुआ।
एमबीबीएस प्रथम वर्ष में एनाटॉमी, फिजियोलॉजी व बायोकेमिस्ट्री की पढ़ाई होती है। इसके लिए जरूरी भवन और हॉस्टल की सुविधा होने के बाद ही एमसीआई सीट आवंटित करती है। जुलाई में भवन का निरीक्षण होना था, लेकिन मेडिकल कॉलेज में ये जरूरी ढांचा तैयार नहीं हो पाया है। इस वजह से अगले सत्र में पढ़ाई शुरू नहीं हो पाएगी। उससे अगले सत्र में क्लास शुरू होंगी। - डॉ. वीके तिवारी, कार्यवाहक प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज