फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pilibhit News ›   Street light scam

कमीशन के खेल में जैम पोर्टल पर नहीं लिखी गई लाइट की न्यूनतम कीमत

Sun, 01 Mar 2020 02:33 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 01 Mar 2020 02:33 AM IST
विज्ञापन
Street light scam
पीलीभीत। नगरपालिका ने एक करोड़ से ऊपर की स्ट्रीट लाइटें खरीदने के लिए जेम पोर्टल का सहारा तो लिया, मगर इसमें भी खेल हो गया। पोर्टल पर ऑनलाइन टेंडर अपलोड किए गए थे, लेकिन स्ट्रीट लाइट की न्यूनतम कीमत पोर्टल पर नहीं लिखी। लखनऊ की फर्म को इसका पूरा फायदा मिला। फर्म ने नीचे से लेकर ऊपर तक सबका कमीशन सेट करते हुए अपने खास के अलग-अलग नामों से टेंडर डालकर बाजार रेट से चार गुनी कीमत में नगरपालिका को लाइट की सप्लाई दी।
विज्ञापन

नगरपालिका में चाहे सड़क या नाली निर्माण हो या फिर लाइट या अन्य उपकरण खरीद के मामले। ज्यादातर में तो कमीशन का खेल ही होता है। यही वजह है कि न तो नगरपालिका की सड़कें या नालियां लंबे समय तक चलती हैं, न ही उपकरण। यही हाल स्ट्रीट लाइट खरीद का भी रहा। लखनऊ की फर्म को स्ट्रीट लाइटों का टेंडर देने के लिए पोर्टल पर लाइटों की न्यूनतम कीमत नहीं लिखी गई। एक दूसरे विभाग के अधिकारी का कहना है कि जेम पोर्टल से कोई भी सरकारी सामान की खरीद से पहले उसके रेट विभिन्न कंपनियों से लिए जाते हैं। फिर मार्केट रेट पता किया जाता है। उसके बाद पोर्टल पर उस चीज के न्यूनतम रेट अपलोड किए जाते हैं। फिर उसमें संबंधित सामान के न्यूनतम रेट अपलोड किए जाते हैं।
विज्ञापन

इसका मतलब यह होता है कि नगरपालिका या अन्य कोई भी संस्था संबंधित उपकरण के उतने ही रेट भुगतान करेगी, जितने उसने पोर्टल पर अपलोड किए हैं। उसके बाद जब फर्में सामान की सप्लाई का ऑनलाइन टेंडर डालती हैं तो उसमें न्यूनतम रेट से अधिक कीमत नहीं होती। मगर, नगरपालिका ने जेम पोर्टल पर 45 और 75 वाट की लाइट के न्यूनतम रेट अपलोड नहीं किए। फर्म ने अपने मनमाने रेट से स्ट्रीट लाइटों की आपूर्ति की। इसका नतीजा यह निकला कि नगरपालिका को साढ़े तीन गुनी कीमत चुकानी पड़ी। कमीशन के बंदरबांट और सरकारी बजट ठिकाने लगाने की नीति के चलते इस खेल में 75 लाख से ज्यादा रकम का नुकसान हो गया, यह वह रकम है जो जनता के टैक्स से मिलती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

दूसरी खास बात यह कि ऑनलाइन टेंडर में भी सत्यापन के बाद भुगतान का प्रावधान है। मगर, नगरपालिका ने फर्म को स्ट्रीट लाइट खरीद का जल्दी पेमेंट करने के लिए सभासदों की कमेटी से खरीद का सत्यापन कराने तक का इंतजार नहीं किया बल्कि एसडीओ से आनन-फानन में सत्यापन कराकर पूरे खेल को अंजाम दे दिया गया। सभासदों तक उनका पूरा हिस्सा नहीं पहुंचा तो सब बिदक गए और शिकायतें होने लगी। यहां तक कि विवाद में एक सभासद ने अपने दाहिने हाथ की नस तक काट ली। तब घपले की बातें निकलकर सामने आईं।
इन फर्मों ने डाले थे स्ट्रीट लाइट खरीद के टेंडर
1- श्री इंटर प्राइजेज 2- आरके इंटर प्राइजेज 3- बीआर इंटर प्राइजेज 4- एलजी इंटर प्राइजेज 5- इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी गार्ड सर्विस
स्ट्रीट लाइट खरीद जेम पोर्टल से हुई है। इस संबंध में हम कुछ भी नहीं कहना चाहते। जो भी पूछना है, वह संबंधित अधिकारियों से पूछ लें। -विमला जायसवाल, चेयरमैन नगरपालिका

स्ट्रीट लाइटों की खरीद जेम पोर्टल से हुई थी। उसमें पांच फर्मों ने टेंडर डाले थे। सबसे न्यूनतम रेट डालने वाली फर्म को टेंडर दिए गए। बाकी इस बारे में अधिक जानकारी नहीं है। -निशा मिश्रा, ईओ, नगरपालिका
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed