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कदम-कदम पर उखड़े पड़े पत्थर, कई गांवों का आवागमन बाधित

Sat, 14 May 2022 01:39 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 14 May 2022 01:39 AM IST
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Stones uprooted at every step, traffic in many villages disrupted
बीसलपुर से मूसपुर जयसिंह को जाने वाली निर्माणाधीन सड़क। संवाद - फोटो : PILIBHIT
पीलीभीत। प्रधानमंत्री सड़क योजना के तहत 405 लाख की लागत से निर्माणाधीन मूसेपुर जयसिंह को जाने वाली सड़क का काम समय अवधि पूरी होने के बाद भी अधूरा है। उखड़े पड़े पत्थर लोगों के आवागमन में मुसीबत साबित हो रहे हैं।
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सरकार की योजनाओं को पतीला लगाने से अफसर बाज नहीं आ रहे हैं। कहीं निर्माण में खेल तो कहीं समय सीमा पूरी होने के बाद भी निर्माण अधूरा है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना निर्माणाधीन बीसलुपर के मेन रोड से ग्राम पंचायत नवादा महेश से होते हुए मूसेपुुर जयसिंह को जाने वाली सड़क का एक साल से निर्माण हो रहा है। 405. 04 लाख की कीमत से बीसलपुर रोड से नवादा महेश, मूसेपुर जयसिंह होते हुए टेड़ लेखराज तक 7.350 किमी लंबी सड़क का निर्माण मई 2021 में शुरू हुआ था जो मई 2022 तक पूरा होना था। मगर कार्यदायी संस्था की ओर से अभी तक कार्य को लेकर कोई गंभीरता नहीं आई है। समय अवधि पूरी होने वाली है। इस सड़क से नवादा महेश के अलावा, पिपरा, मूसेपुर जयसिंह, मुसरहा, लदपुरा समेत कई गांव का मुख्य निकास है। उखड़े पड़े पत्थरों से सड़क पर निकलना दूभर है। आए दिन बाइक सवार फिसलकर पत्थरों से चोटिल हो रहे हैं। कई बार कार्यदायी संस्था के अधिकारियों से सड़क की शीघ्र निर्माण कराने की ग्रामीणों ने मांग की मगर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। गांव से गुजरने वाली सड़कों के दोनों ओर नाला भी मानक के अनुरूप नहीं बनाया गया है। इससे वह अभी से टूटने लगा है। इसके बाद भी जिम्मेदार अफसरों का इस ओर ध्यान नहीं है।
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सड़क एक, योजना एक, मगर लागत दो
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में किस तरह खिलवाड़ हो रहा है। इसका अंदाजा 7.350 किमी लंबी सड़क की लागत से लगाया जा सकता है। इसमें दो सांसद के उद्घाटन बोर्ड पर इसी लंबाई की लागत 448.12 लाख रुपये दी गई है। जबकि सरकार की योजना द्वारा लगाए बोर्ड में इसी लंबाई और इतनी ही दूरी की लागत 405.04 लाख है। ऐसे में यह सवाल लोगों के जेहन में उठ रहा है कि एक ही योजना, एक ही निर्माण, एक ही संस्था, एक ही दूरी तो फिर लागत अलग-अलग क्यों है।
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सड़क निर्माण धीमी गति से क्यों किया जा रहा है, इस पर संबंधित कार्यदायी संस्था को तलब किया गया है। कई बार नोटिस भी दिया जा चुका है। अब आखिरी सुनवाई के लिए बुलाया गया है। आगे कार्यों के लिए डिवार भी करा दिया गया है। - फुरकान अली, एक्सईएन, आरईएस
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