Pilibhit News: घोटाले के आरोपी इल्हाम ने संभाले जो पटल, उन पर रहे सभी कर्मचारियों से होगी पूछताछ
पीलीभीत के जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय से जुड़े घोटाले के मामले में कई कर्मचारी पुलिस के रडार पर हैं। घोटाले का मुख्य आरोपी इल्हाम शम्सी जिन पटल पर रहा, उन पर तैनात रहे सभी कर्मचारियों से पुलिस पूछताछ करेगी।
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पीलीभीत के जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय (डीआईओएस) से जुड़े घोटाले के तार कई अन्य लोगों से भी जुड़ सकते हैं। आरोपी इल्हाम शम्सी से पूछताछ के बाद पुलिस के हाथ अहम सुराग लगे हैं। पुलिस अब डीआईओएस कार्यालय में लेखा सहायक रहे कर्मचारियों, इल्हाम के पटल से जुड़े लोगों से भी पूछताछ कर रही है। अब तक चार कर्मचारियों से पूछताछ की जा चुकी है।
डीआईओएस कार्यालय में नियम विरुद्ध संबद्ध चपरासी इलहाम शम्सी ने करीब आठ वर्षों से अब तक डीआईओएस कार्यालय के करोड़ों रुपये का हेरफेर किया। उसने अपनी पत्नी अर्शी खातून सहित अन्य करीबियों के बैंक खातों में करोड़ों रुपये भेजे। डीआईओएस कार्यालय और जिला कोषागार की मिलीभगत से करोड़ों रुपये ठिकाने लगाए गए। फरवरी में करीब एक करोड़ रुपये का घोटाला सामने आया तो हड़कंप मच गया। डीएम ज्ञानेंद्र सिंह के निर्देश पर आरोपी इलहाम शम्सी और उसकी पत्नी अर्शी खातून पर प्राथमिकी दर्ज की गई। अर्शी खातून को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। पुलिस अब तक पांच करोड़ से अधिक धनराशि खातों में फ्रीज करा चुकी है।
पूछताछ के बाद सामने आए हैं कई नाम
पुलिस ने पूछताछ में आरोपी इल्हाम शम्सी से 50 से अधिक सवाल किए। धनराशि कहां-कहां निवेश की। किन करीबियों के खाते में रुपये भेजे गए। साथ ही घोटाले की अवधि के दौरान जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में लेखा सहायक पद पर कौन-कौन कर्मचारी रहा। लेखाकार पटल संभालने वाले कर्मचारी के साथ ही इल्हाम से जुड़े सभी लोगों की कुंडील खंगाली जा रही है। पुलिस अब तक चार कर्मचारियों से पूछताछ भी कर चुकी है। अन्य को भी बुलाया गया है। एसपी सुकीर्ति माधव ने बताया कि इस अवधि में जो लेखा सहायक या पटल प्रभारी रहे थे, सभी से पूछताछ की जा रही है। कई अन्य जानकारियां भी सामने आईं है।
सुर्खियों में जिला कोषागार, चुप्पी साधे हैं जिम्मेदार
डीआईओएस कार्यालय के करोड़ों रुपये के घोटाले के बाद से जिला कोषागार भी सुर्खियों में है। कई वर्षों से एक ही पटल पर जमे कर्मचारी, मनमानी के आरोप और अन्य बातें चर्चा में हैं। कोषागार कर्मी की ओर से सीडीओ और डीपीआरओ पर लगाया गया दबाव बनाने का आरोप भी लोगों की जुबान पर है। मगर वरिष्ठ कोषाधिकारी मामले को टरकाने में लगे हैं। हालांकि एक दिन पूर्व कोषागार कर्मियों के पटल भी बदले गए हैं।
जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में नियम विरुद्ध संबंद्ध चपरासी इल्हाम शम्सी का कमाई का खेल सामने आया तो जिला कोषागार के जिम्मेदारों पर भी सवाल उठे। डीआईओएस कार्यालय और कोषागार के कर्मियों की भूमिका संदेह के घेरे में आ गई। जांच का दायरे में इन कार्यालयों के कर्मियों को भी शामिल करने की बात अफसरों ने कही। जांच अभी जारी है। कोषागार के कर्मचारियों का कुर्सी मोह भी जगजाहिर हो गया। बताया गया कि कई कर्मचारी कई वर्षों से एक ही पटल पर जमे हैं।
कुछ तो पांच वर्ष से अधिक समय से एक ही कुर्सी पर डटे रहे। मनमाने तरीके से काम कर रहे हैं। कोषाधिकारी ने इनके पटल बदलना जरूरी ही नहीं समझा। कर्मचारियों की कार्यशैली पर सवाल उठते रहे, लेकिन कोषाधिकारी कुछ भी बोलने से बचते रहे। वरिष्ठ कोषाधिकारी एसके यादव ने बताया कि कर्मचारियों के पटल बदले गए हैं। अन्य मामलों में जांच चल रही है।
आखिरकार अब बदले गए कर्मचारियों के पटल
सुर्खियों में चल रहे कोषागार के कर्मचारियों के पटल आखिरकार बृहस्पतिवार को बदले गए हैं। लेखाकार शैलेष श्रीवास्तव को पूर्व आवंटित कार्य के साथ ही जिला पूर्ति कार्यालय, क्रीड़ा आदि की जिम्मेदारी दी गई है। गंगाराम को पेंशन व लेखाधिकारी की ओर से दिए गए कार्य, राजेंद्र कुमार को डीसीएल, पीएलए, माध्यमिक शिक्षा, जीटीआई, आईटीआई, बेसिक शिक्षा, होम्योपैथिक आदि की जिम्मेदारी दी गई है।
अंकुर अग्रवाल को बेसिक शिक्षा का पेंशन कार्य, रेशम, उद्यान, वन विभाग आदि, आशुतोष मिश्रा को लोक निर्माण विभाग, बाढ़ खंड, आबकारी, सिंचाई आदि विभाग का कार्य दिया गया है। जितेंद्र कुमार को सिविल पेंशन, सहायता प्राप्त माध्यमिक शिक्षा पेंशन आदि जिम्मेदारी दी गई है। अवनेंद्र कुमार को अधिष्ठान कोषागार का कार्य व ठाकुर सिंह को विद्युत विभाग पेंशन, लोकतंत्र सेनानी पेंशन आदि का कार्य दिया गया है।