{"_id":"5d2240888ebc3e6d0b74c61e","slug":"secretary-pilibhit-news-bly3676791179","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रधान-सचिवों की मनमानी, कठपुतली बनीं ग्राम पंचायतें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रधान-सचिवों की मनमानी, कठपुतली बनीं ग्राम पंचायतें
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पीलीभीत। ग्राम पंचायतें प्रधान और सचिवों के हाथ की कठपुतली बनकर रह गई हैं। गांवों में खुली बैठक बुलाए बिना कागजी खानापूरी की जा रही है। ग्राम प्रधान अपने घर पर खुुली बैठक के नाम पर सदस्यों से हस्ताक्षर करा लेते हैं। बिना प्रस्ताव अनुमोदन के विकास संबंधी कार्य हो रहे हैं। पंचायतों का सोशल आडिट न होने से भी भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है। जिम्मेदार भी सोशल आडिट की अनदेखी कर रहे हैं। ग्राम पंचायतों के गठन के बाद चुनाव आयोग पंचायतों की खुली बैठक की तिथि निर्धारित करता है। उसी दिन हर ग्राम पंचायतों में खुली बैठक की औपचारिकता पूरी की जानी होती है। ग्राम प्रधान पंचायत का अध्यक्ष व ग्राम विकास व पंचायत अधिकारी सचिव होते हैं। नियमानुसार खुली बैठक पंचायत भवन व ग्राम प्रधान की अध्यक्षता में होनी चाहिए। इसका प्रस्ताव सचिव को लिखना चाहिए। लेकिन यह दीगर बात है कि सचिव किसी गांव में बैठक लेने जाते ही नहीं हैं। वे कई गांवों के चार्ज होने की बात कहकर अपना सिंह छुड़ा लेते हैं।
ऐसे होती है खुली बैठक
खुली बैठक के नाम पर प्रधान समर्थकों को अपने घर पर एकत्र कर लेते हैं। घर पर इसलिए बैठक बुलाई जाती है ताकि यहां विरोधी न आएं। ग्राम प्रधान नई कापी खरीद लेते हैं लेकिन उस पर कोई प्रस्ताव नहीं लिखा जाता। ग्रामीणों से कहा जाता है कि प्रस्ताव सचिव ही लिखेंगे। सूत्रों की मानें तो कापी पर कार्यवाही की जगह छोड़कर ग्राम पंचायत सदस्यों व ग्रामीणों के हस्ताक्षर करा लिए जाते हैं। उनसे अपनी राय लिखकर मांगी जाती है। इसके बाद प्रधान रजिस्टर लेकर सचिव से मिलते हैं उसके बाद प्रस्ताव तैयार होता है। किस कार्य का प्रस्ताव हुआ या गांव में कौन-कौन कार्य होगा। यह न तो किसी सदस्य को पता हो पाता है ना ही किसी ग्रामीण को। इसके बाद मनमाना काम व लूट-खसोट का सिलसिला शुरू हो जाता है।
शिकायत की नहीं होती जांच
गांवों में विकास कार्यों में बड़े पैमाने पर अनियमितता बरती जा रही है। यहां तक कि आवासों, शौचालयों का निर्माण भी नहीं होता और गुपचुप ढंग से प्रधान व सचिव फर्जी कागजात तैयार कर शासकीय धन का बंदरबांट कर ले रहे हैं। पूरनपुर की ग्राम पंचायत माधोटांडा में तैनात रहे सचिव विवेक वर्मा, ललौरीखेड़ा की ग्राम पंचायत अजीज डांडी में सचिव नूरूद्दीन, पूरनपुर की ग्राम पंचायत शिवनगर में सचिव राजवंदन मिश्रा, रजत सक्सेना समेत कई अन्य सचिव पर तो प्रधानमंत्री आवास व शौचालय अपात्रों को देने के मामले में निलंबन की कार्रवाई की जा चुकी है। इसके अलावा कई शिकायतें मुख्यालय पहुंचती पर अफसरों के पास पहुंचती हैं, जो कूड़ेदान में डाल दी जाती हैं।
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सोशल आडिट न होना भ्रष्टाचार का कारण
पंचायती राज व्यवस्था के तहत हर ग्राम पंचायत के वार्षिक सोशल आडिट का प्रावधान है। संबंधित अधिकारियों को आडिट आपत्तियों के निस्तारण का भी निर्देश है। यह दीगर बात है कि जिले में कहीं भी सोशल आडिट नहीं हो रहा है। अगर, कहीं सोशल आडिट हुआ भी तो उस पर कोई कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति कर दी गई। सबसे ज्यादा गड़बड़ी पूरनपुर और बीसलपुर की ग्राम पंचायतों में होना बताया गया है। ऐसे में सोशल आडिट नहीं होना भ्रष्टाचार को बढ़ावा देना साबित हो रहा है।
शिकायतों पर लगातार हो रही कार्रवाई
इस संबंध जब-जब शिकायतें मिलती है, तो उसको गंभीरता से लिया जाता है। उसकी जांच कराकर कार्रवाई की जाती है। एक माह में चार सचिवों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई भी की गई है।- रमेश चंद्र पांडे, सीडीओ
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ऐसे होती है खुली बैठक
खुली बैठक के नाम पर प्रधान समर्थकों को अपने घर पर एकत्र कर लेते हैं। घर पर इसलिए बैठक बुलाई जाती है ताकि यहां विरोधी न आएं। ग्राम प्रधान नई कापी खरीद लेते हैं लेकिन उस पर कोई प्रस्ताव नहीं लिखा जाता। ग्रामीणों से कहा जाता है कि प्रस्ताव सचिव ही लिखेंगे। सूत्रों की मानें तो कापी पर कार्यवाही की जगह छोड़कर ग्राम पंचायत सदस्यों व ग्रामीणों के हस्ताक्षर करा लिए जाते हैं। उनसे अपनी राय लिखकर मांगी जाती है। इसके बाद प्रधान रजिस्टर लेकर सचिव से मिलते हैं उसके बाद प्रस्ताव तैयार होता है। किस कार्य का प्रस्ताव हुआ या गांव में कौन-कौन कार्य होगा। यह न तो किसी सदस्य को पता हो पाता है ना ही किसी ग्रामीण को। इसके बाद मनमाना काम व लूट-खसोट का सिलसिला शुरू हो जाता है।
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शिकायत की नहीं होती जांच
गांवों में विकास कार्यों में बड़े पैमाने पर अनियमितता बरती जा रही है। यहां तक कि आवासों, शौचालयों का निर्माण भी नहीं होता और गुपचुप ढंग से प्रधान व सचिव फर्जी कागजात तैयार कर शासकीय धन का बंदरबांट कर ले रहे हैं। पूरनपुर की ग्राम पंचायत माधोटांडा में तैनात रहे सचिव विवेक वर्मा, ललौरीखेड़ा की ग्राम पंचायत अजीज डांडी में सचिव नूरूद्दीन, पूरनपुर की ग्राम पंचायत शिवनगर में सचिव राजवंदन मिश्रा, रजत सक्सेना समेत कई अन्य सचिव पर तो प्रधानमंत्री आवास व शौचालय अपात्रों को देने के मामले में निलंबन की कार्रवाई की जा चुकी है। इसके अलावा कई शिकायतें मुख्यालय पहुंचती पर अफसरों के पास पहुंचती हैं, जो कूड़ेदान में डाल दी जाती हैं।
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सोशल आडिट न होना भ्रष्टाचार का कारण
पंचायती राज व्यवस्था के तहत हर ग्राम पंचायत के वार्षिक सोशल आडिट का प्रावधान है। संबंधित अधिकारियों को आडिट आपत्तियों के निस्तारण का भी निर्देश है। यह दीगर बात है कि जिले में कहीं भी सोशल आडिट नहीं हो रहा है। अगर, कहीं सोशल आडिट हुआ भी तो उस पर कोई कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति कर दी गई। सबसे ज्यादा गड़बड़ी पूरनपुर और बीसलपुर की ग्राम पंचायतों में होना बताया गया है। ऐसे में सोशल आडिट नहीं होना भ्रष्टाचार को बढ़ावा देना साबित हो रहा है।
शिकायतों पर लगातार हो रही कार्रवाई
इस संबंध जब-जब शिकायतें मिलती है, तो उसको गंभीरता से लिया जाता है। उसकी जांच कराकर कार्रवाई की जाती है। एक माह में चार सचिवों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई भी की गई है।- रमेश चंद्र पांडे, सीडीओ