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कटना नदी में बना दिया अंत्येष्टि स्थल, प्रधान और सचिव से रिकवरी के आदेश
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पीलीभीत। ग्राम पंचायत में 24.11 लाख रुपये की लागत से बनने वाले अंत्येष्टि स्थल को चयनित स्थल पर न बनाकर कटना नदी के रकवे में बना दिया गया। जांच में मामला सही पाए जाने के बाद किए गए कार्य को श्रमदान घोषित कर दिया गया है। डीएम ने प्रधान और सचिव से धनराशि की रिकवरी करने के आदेश जारी किए हैं। इस मामले में प्रधान के वित्तीय अधिकार सीज होने के साथ सचिव को पूर्व में ही निलंबित किया जा चुका है।
मामला बिलसंडा ब्लाक की ग्राम पंचायत टेहरी का है। वित्तीय वर्ष 2018-19 में टेहरी में अंत्येष्टि स्थल के निर्माण के लिए 24.11 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई थी। अंत्येष्टि स्थल निर्माण के लिए गाटा संख्या 153 की जमीन का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया था। निर्माण के लिए प्रथम किश्त के रूप में 12,05820 रुपये अवमुक्त कर दिए गए। डीएम वैभव श्रीवास्तव ने जब मौके पर जाकर निरीक्षण किया तो अंत्येष्टि स्थल का निर्माण चयनित स्थल पर न कराकर कटना नदी के बहाव क्षेत्र में कराया जाना पाया गया। मामले को गंभीरता से लेते हुए डीएम ने बीसलपुर एसडीएम और तहसीलपुर को जांच के आदेश दिए। एसडीएम और तहसीलदार की जांच में भी अंत्येष्टि स्थल का निर्माण गाटा संख्या 153 में न कराकर कटना के खाते में दर्ज गाटा संख्या 408/2 में होना पाया गया। अंत्येष्टि स्थल की दीवारें भी ढही पाई गई। पानी के प्रवाह से नींव भी खोखली मिली। जांच रिपोर्ट में शासकीय धनराशि का दुरुपयोग होना पाया गया। इस पर पिछले साल 11 सितंबर को प्रधान नत्थू सिंह से स्पष्टीकरण तलब किया गया। प्रधान ने अपने स्पष्टीकरण में स्थानीय विधायक के मौखिक निर्देश पर स्थान बदलने की बात कही। संतोषजनक जवाब न मिलने पर 20 जनवरी को प्रधान के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार सीज कर दिए गए जबकि सचिव को निलंबित कर दिया गया। अंत्येष्टि स्थल के तकनीकी मूल्यांकन के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई। जांच कमेटी ने अपनी जांच रिपोर्ट में पाया कि प्रधान और सचिव द्वारा निर्धारित स्थल पर अंत्येष्टि स्थल का निर्माण न कराकर ऐसे स्थान पर काम कराया, जो कटना नदी के बहाव में है। इसमें सरकारी धनराशि की प्रथम किश्त को पूरी तरह से दुरुपयोग किया गया। डीएम ने आवंटित की गई 1205820 की धनराशि में से 50 प्रतिशत प्रधान और सचिव से रिकवरी करने के निर्देश दिए हैं।
बिलसंडा ब्लाक की ग्राम पंचायत टेहरी में अंत्येष्टि स्थल का निर्माण चयनित स्थान पर न कराकर नदी के रकवे में कराया पाया गया। प्रधान और सचिव के खिलाफ पूर्व में कार्रवाई हो चुकी है। जिलाधिकारी के निर्देशानुसार अब प्रधान और सचिव से 50 प्रतिशत धनराशि की रिकवरी की जाएगी। - प्रमोद कुमार यादव, प्रभारी डीपीआरओ
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मामला बिलसंडा ब्लाक की ग्राम पंचायत टेहरी का है। वित्तीय वर्ष 2018-19 में टेहरी में अंत्येष्टि स्थल के निर्माण के लिए 24.11 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई थी। अंत्येष्टि स्थल निर्माण के लिए गाटा संख्या 153 की जमीन का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया था। निर्माण के लिए प्रथम किश्त के रूप में 12,05820 रुपये अवमुक्त कर दिए गए। डीएम वैभव श्रीवास्तव ने जब मौके पर जाकर निरीक्षण किया तो अंत्येष्टि स्थल का निर्माण चयनित स्थल पर न कराकर कटना नदी के बहाव क्षेत्र में कराया जाना पाया गया। मामले को गंभीरता से लेते हुए डीएम ने बीसलपुर एसडीएम और तहसीलपुर को जांच के आदेश दिए। एसडीएम और तहसीलदार की जांच में भी अंत्येष्टि स्थल का निर्माण गाटा संख्या 153 में न कराकर कटना के खाते में दर्ज गाटा संख्या 408/2 में होना पाया गया। अंत्येष्टि स्थल की दीवारें भी ढही पाई गई। पानी के प्रवाह से नींव भी खोखली मिली। जांच रिपोर्ट में शासकीय धनराशि का दुरुपयोग होना पाया गया। इस पर पिछले साल 11 सितंबर को प्रधान नत्थू सिंह से स्पष्टीकरण तलब किया गया। प्रधान ने अपने स्पष्टीकरण में स्थानीय विधायक के मौखिक निर्देश पर स्थान बदलने की बात कही। संतोषजनक जवाब न मिलने पर 20 जनवरी को प्रधान के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार सीज कर दिए गए जबकि सचिव को निलंबित कर दिया गया। अंत्येष्टि स्थल के तकनीकी मूल्यांकन के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई। जांच कमेटी ने अपनी जांच रिपोर्ट में पाया कि प्रधान और सचिव द्वारा निर्धारित स्थल पर अंत्येष्टि स्थल का निर्माण न कराकर ऐसे स्थान पर काम कराया, जो कटना नदी के बहाव में है। इसमें सरकारी धनराशि की प्रथम किश्त को पूरी तरह से दुरुपयोग किया गया। डीएम ने आवंटित की गई 1205820 की धनराशि में से 50 प्रतिशत प्रधान और सचिव से रिकवरी करने के निर्देश दिए हैं।
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बिलसंडा ब्लाक की ग्राम पंचायत टेहरी में अंत्येष्टि स्थल का निर्माण चयनित स्थान पर न कराकर नदी के रकवे में कराया पाया गया। प्रधान और सचिव के खिलाफ पूर्व में कार्रवाई हो चुकी है। जिलाधिकारी के निर्देशानुसार अब प्रधान और सचिव से 50 प्रतिशत धनराशि की रिकवरी की जाएगी। - प्रमोद कुमार यादव, प्रभारी डीपीआरओ
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