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लॉकडाउन खुलते ही कूड़ेदान घोटाले का जिन्न फिर बाहर निकला
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पीलीभीत। केंद्र सरकार की स्वच्छ भारत मिशन योजना में सेंधमारी कर 1.52 करोड़ रुपऐ के कूड़ेदान घोटालो का जिन्न लॉकडाउन खुलते ही फिर बाहर निकल आया। प्रधान और सचिवों पर अब इस घपले में शिकंजा कसा गया है। डीएम के निर्देश पर लॉकडाउन से पहले कार्रवाई से बच गए 113 प्रधानों और 29 सचिवों को नोटिस भेज दिए गए हैं। इसमें सचिवों की दो स्थायी वेतन वृद्धि रोकने और प्रतिकूल प्रविष्टि देने के अलावा दोषी पाए गए प्रधानों और सचिवों से 50-50 फीसदी धनराशि मय ब्याज के रिकवरी की जाएगी। डीएम की इस कार्रवाई से प्रधानों और सचिवों में हड़कंप मच गया है।
शासन द्वारा स्वच्छ भारत मिशन के तहत वर्ष 2018 में प्रत्येक ग्राम पंचायत में कूड़ेदान रखने के निर्देश दिए गए थे। प्रधान और सचिवों ने इसमें खेल करते हुए कूड़ेदान की जगह पुराने ड्रमों को कटवाकर उन पर स्वच्छ भारत मिशन लिखवा दिया गया। इसी के साथ ही शासन से मिली करोड़ों रुपये की धनराशि का बंदरबांट कर लिया गया। मामला संज्ञान में आने पर इस मामले में तत्कालीन सीडीओ विजय कृष्ण भागवत ने पूरे मामले की जांच कराई तो कूड़ेदान खरीद में बड़े पैमाने पर घपला उजागर हो गया। इस मामले को अमर उजाला ने 19 जनवरी के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया था। कूड़ेदान घोटाले का मामला शासन स्तर पर भी पहुंचा था। इसके बाद डीएम वैभव श्रीवास्तव ने ब्लाक स्तरीय कमेटियां गठित कर कूड़ेदान घोटाले की जांच कराई।
नौ माह पहले हुई इस जांच में कूड़ेदान के नाम पर करोड़ों रुपये की घपजेबाजी करने का मामला सामने आया। जांच में 164 प्रधानों और 46 सचिवों की संलिप्तता पाई गई। इसमें 1.52 करोड़ रुपए का घोटाला सामने आया। डीएम ने अब इस घपले में दोषी सचिवों की दो स्थायी वेतन वृद्धि रोकने और प्रतिकूल प्रविष्टि देने केे साथ घपले में घिरे प्रधानों और सचिवों से 50-50 फीसदी धनराशि मय ब्याज के रिकवरी करने के आदेश दिए हैं। फरवरी में डीएम के निर्देश पर प्रभारी डीपीआरओ प्रमोद यादव ने 51 ग्राम प्रधानों और 17 सचिवों को नोटिस भेजे थे। आदेश का पालन न करने पर प्रधानों के वित्तीय अधिकार सीज करने की चेतावनी दी गई थी। मार्च में कोविड-19 संक्रमण के चलते इस कार्रवाई को रोक दिया गया था। उस समय प्रशासन समेत सभी विभाग कोविड-19 से जुड़े कार्यों में लग गए। इधर लॉकडाउन खुलते ही डीएम वैभव श्रीवास्तव ने कूड़ेदान घोटाले को संज्ञान में लेते हुए डीपीआरओ को शेष बचे प्रधानों और सचिवों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए। डीपीआरओ ने कार्रवाई से बचे 113 प्रधानों और 29 सचिवों को नोटिस भेजकर प्रधानों और सचिवों से 15 दिन के भीतर आदेश का पालन करने को कहा है। ऐसा न करने पर वित्तीय अधिकार सीज करने की चेतावनी दी गई है।
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कूड़ेदान घोटाले में 146 ग्राम प्रधान और 46 सचिवों की संलिप्तता पाई गई थी। उस समय कुछ प्रधानों और सचिवों को नोटिस भेजा गया था। लॉकडाउन लागू होने के बाद कार्रवाई रोक दी गई थी। जिलाधिकारी के निर्देश पर शेष बचे प्रधानों और सचिवों के खिलाफ कार्रवाई का नोटिस भेजा गया है। - प्रमोद यादव, प्रभारी डीपीआरओ
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शासन द्वारा स्वच्छ भारत मिशन के तहत वर्ष 2018 में प्रत्येक ग्राम पंचायत में कूड़ेदान रखने के निर्देश दिए गए थे। प्रधान और सचिवों ने इसमें खेल करते हुए कूड़ेदान की जगह पुराने ड्रमों को कटवाकर उन पर स्वच्छ भारत मिशन लिखवा दिया गया। इसी के साथ ही शासन से मिली करोड़ों रुपये की धनराशि का बंदरबांट कर लिया गया। मामला संज्ञान में आने पर इस मामले में तत्कालीन सीडीओ विजय कृष्ण भागवत ने पूरे मामले की जांच कराई तो कूड़ेदान खरीद में बड़े पैमाने पर घपला उजागर हो गया। इस मामले को अमर उजाला ने 19 जनवरी के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया था। कूड़ेदान घोटाले का मामला शासन स्तर पर भी पहुंचा था। इसके बाद डीएम वैभव श्रीवास्तव ने ब्लाक स्तरीय कमेटियां गठित कर कूड़ेदान घोटाले की जांच कराई।
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नौ माह पहले हुई इस जांच में कूड़ेदान के नाम पर करोड़ों रुपये की घपजेबाजी करने का मामला सामने आया। जांच में 164 प्रधानों और 46 सचिवों की संलिप्तता पाई गई। इसमें 1.52 करोड़ रुपए का घोटाला सामने आया। डीएम ने अब इस घपले में दोषी सचिवों की दो स्थायी वेतन वृद्धि रोकने और प्रतिकूल प्रविष्टि देने केे साथ घपले में घिरे प्रधानों और सचिवों से 50-50 फीसदी धनराशि मय ब्याज के रिकवरी करने के आदेश दिए हैं। फरवरी में डीएम के निर्देश पर प्रभारी डीपीआरओ प्रमोद यादव ने 51 ग्राम प्रधानों और 17 सचिवों को नोटिस भेजे थे। आदेश का पालन न करने पर प्रधानों के वित्तीय अधिकार सीज करने की चेतावनी दी गई थी। मार्च में कोविड-19 संक्रमण के चलते इस कार्रवाई को रोक दिया गया था। उस समय प्रशासन समेत सभी विभाग कोविड-19 से जुड़े कार्यों में लग गए। इधर लॉकडाउन खुलते ही डीएम वैभव श्रीवास्तव ने कूड़ेदान घोटाले को संज्ञान में लेते हुए डीपीआरओ को शेष बचे प्रधानों और सचिवों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए। डीपीआरओ ने कार्रवाई से बचे 113 प्रधानों और 29 सचिवों को नोटिस भेजकर प्रधानों और सचिवों से 15 दिन के भीतर आदेश का पालन करने को कहा है। ऐसा न करने पर वित्तीय अधिकार सीज करने की चेतावनी दी गई है।
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कूड़ेदान घोटाले में 146 ग्राम प्रधान और 46 सचिवों की संलिप्तता पाई गई थी। उस समय कुछ प्रधानों और सचिवों को नोटिस भेजा गया था। लॉकडाउन लागू होने के बाद कार्रवाई रोक दी गई थी। जिलाधिकारी के निर्देश पर शेष बचे प्रधानों और सचिवों के खिलाफ कार्रवाई का नोटिस भेजा गया है। - प्रमोद यादव, प्रभारी डीपीआरओ