फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pilibhit News ›   Sarda dam from silting threatens the existence of the tandem

सिल्टिंग से शारदा डैम के अस्तित्व पर मंडराया खतरा

Wed, 02 Nov 2016 10:52 PM IST
ब्यूरो /पीलीभीत
ब्यूरो /पीलीभीत Updated Wed, 02 Nov 2016 10:52 PM IST
विज्ञापन
Sarda dam from silting threatens the existence of the tandem
सिल्टिंग से शारदा डैम के अस्तित्व पर मंडराया खतरा - फोटो : पीलीभ्‍ाीत/उत्‍ततर प्रदेश्‍ा
प्रथम पंचवर्षीय योजना में बना शारदा सागर डैम जहां कई दशक तक प्रदेश की लाखों एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई को पानी देता था, आज यही डैम लापरवाही का शिकार होता जा रहा है। आलम यह है कि डैम को भीतरी व बाहरी दोनों ओर खतरा बढ़ता जा रहा है। पूर्व की प्रदेश सरकारों ने हर साल डैम के रख-रखाव को करोड़ों रुपये तो दिए, लेकिन यह कार्य सत्ता से जुड़े ऐसे ठेकेदारों को दे दिया, जिससे डैम की काया जर्जर होती चली गई। बानगी के तौर पर देखे तो जहां उत्तराखंड सीमा क्षेत्र में डैम के भीतर अवैध रूप से एक कॉलोनी बस गई, वहीं जनपद सीमा में भी ऐसे ही हालात बनते जा रहे हैं।
विज्ञापन

शारदा डैम की लंबाई 22 किमी है। इसकी देखरेख की जिम्मेदारी प्रदेश के शारदा सागर खंड के अधीन है। चूंकि यह उत्तराखंड तक पड़ता है। ऐसे में एक सबडिवीजन बाइफरकेशन जिसकी जिम्मेदारी जीरो से दस किमी तक है और दूसरी सब डिवीजन खटीमा जिसकी देखरेख की जिम्मेदारी 11 से 22 किमी तक है। इस डैम में दो नहरों के माध्यम से सिंचाई को पानी भरा जाता है।  सूखा पडने की स्थिति में प्रदेश की लाखों एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई इसी डैम के माध्यम से होती आ रही है।
विज्ञापन

...तो इतने में नए डैम का हो सकता है निर्माण
प्रदेश के सिंचाई मंत्री रहे शिवपाल सिंह यादव ने दो वर्ष पूर्व जनपद दौरे के समय डैम में सिल्टिंग देख अधिशासी अभियंता को इसका प्रोजेक्ट भेजने को कहा था। बताते हैं कि जब प्रोजेक्ट बनाया गया तो उसकी लागत अरबों में पहुंच गई। दिल्ली व कानपुर की कंपनियों ने भी सर्वे कर अपनी रिपोर्ट में डैम का जीर्णोद्धार करने के बजाए नया डैम बनाने की बात कही।
विज्ञापन
विज्ञापन

लापरवाही बन गई नासूर 
शारदा डैम पर 18 से 22 किमी तक सिल्ट जमा होने से 22वें किमी पर बाकायदा एक कॉलोनी बस गई और उत्तराखंड सरकार इस अवैध रुप से बसी कालोनी को विकास योजनाओं का लाभ भी दे रही है।  यहां भी अब जनपद सीमा में डैम की मुख्यबाडी की ओर से ढाई किमी लंबे क्षेत्र में व जंगल की ओर लगभग छह किमी लंबे क्षेत्र में सिल्ट जमा हो चुकी है। ऐसे में यहां भी कॉलोनी बसने से इंकार नहीं किया जा सकता।
सिल्ट नहीं निकली तो सिंचाई को होगी किल्लत
डैम की देखरेख करने वाले अभियंता कहते हैं कि डैम में जब पानी भरा जाएगा, तो पानी का दबाव इसी इलाके में होने की वजह से यहां पानी पहले आ जाएगा। ऐसे में यहां कालोनी बसना असंभव है। हालांकि सिल्ट नहीं निकाली गई तो आगे सिंचाई के लिए किल्लत पैदा हो जाएगी। 
सत्ता से जुड़े ठेकेदारों ने निकाला दिवाला
प्रथम पंच वर्षीय योजना में जब डैम को बनाया गया था, तो तीन दशक तक इसकी देखरेख होती रही। इसके बाद जब प्रदेश सरकार ने डैम की मरम्मत को करोड़ों रुपए की धनराशि देनी शुरू की तो इससे जुड़े कार्य भी सत्ता से जुड़े ठेकेदारों के हवाले कर दिए गए। ऐसे में डैम की मरम्मत के नाम पर भ्रष्टाचार की जंक लगती रही। नतीजा यह निकला कि डैम में दोनों ओर सिल्ट के ढेर लग गए हैं 

हड़ताल की वजह से हुई थी  लापरवाही 
वर्तमान में शारदा डैम पर दो करोड़ की लागत से पिचिंग मरम्मत का कार्य कराया जा रहा है, लेकिन उसमें भी जमकर अनियमितता बरती जा रही है। मरम्मत कार्य की देखरेख करने वाले अभियंता वीरेंद्र यादव व रामेश्वर दुबे कहते हैं कि अभियंताओं की हड़ताल की वजह से काम में कुछ लापरवाही हो गई थी। जिसको अब ठेकेदारों से दुरुस्त कराया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed