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टनकपुर हाइवे पर गड्ढे इस कदर ..बाइक सवार हटें किधर और बचें किधर
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पीलीभीत। टनकपुर हाइवे कहने को तो राष्ट्रीय राजमार्ग है, मगर शहर सीमा के भीतर यह मार्ग इन दिनों बाइक सवारों समेत अन्य वाहन चालकों के लिए मुसीबत बना हुआ है। शहर के अंदर नौगवां चौराहे से लेकर कचहरी चौराहा तक हाईवे की सड़क पर इतने गड्ढे हैं कि पता नहीं चलता कि सड़क में गड्ढे हैं या फिर गड्ढों में सड़क।
लिपुलेख-भिंड राष्ट्रीय राजमार्ग पर टनकपुर जाने वाली मुख्य सड़क पर पूरे दिन भारी, मध्यम और हल्के वाहनों का बड़ी संख्या में ट्रैफिक रहता है। राजमार्ग की इस सड़क में जगह-जगह गड्ढे हो चुके हैं। इन गड्ढों की चपेट में आकर कई बाइक सवार चोटिल हो चुके हैं। असम चौराहा से नौगवां ओवरब्रिज होते हुए गौहनियां चौराहा तक सड़क में कदम-कदम पर गड्ढे हैं। ओवरब्रिज भी इतने गहरे गड्ढे हैं कि भारी या हल्के वाहन गुजरते ही इनमें धंसने लगते हैं। बाइक सवार अक्सर इनमें गिरकर चोटिल होते हैं। गौहनियां चौराहा से यशवंतरी देवी मंदिर चौराहा, नकटादाना चौराहा, एसपी आवास से आगे कलक्ट्रेट और उसके आगे तक हाईवे की सड़क खस्ताहाल है। तीन वर्ष पहले राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित होने के बाद लोक निर्माण विभाग ने इस मार्ग की मरम्मत कराने से अपने हाथ पीछे खींच लिए है। इसका खामियाजा आम लोगों को झेलना पड़ रहा है।
तीन महीने पहले ही हुई थी मरम्मत
शहर के बीचोबीच से होकर गुजरने वाले टनकपुर हाईवे की सड़क की तीन महीने पहले ही लाखों रुपये खर्च करके मरम्मत कराई गई थी। इसमें मरम्मत कार्य में निर्धारित मानक के अनुरूप निर्माण सामग्री नहीं लगाई गई। इसका नतीजा यह निकला कि हाईवे की सड़क पर कई स्थानों पर गड्ढे हो गए। कई स्थानों पर पक्की सड़क उखड़ने लगी हैं। सड़क पर पड़े पत्थर और बजरी कोलतार से अलग होकर इधर-उधर छितराने लगे हैं। नकटादाना चौराहा से लेकर असम चौराहा तक सड़क की हालत बहुत खराब हो चुकी है। गड्ढा मुक्त अभियान में तीन माह पहले गड्ढों में भरी गई सामग्री बरसात के पानी में बह गई। पीडब्ल्यूडी के एक इंजीनियर ने नाम न प्रकाशित करने की गुजारिश पर बताया कि अगर सड़क निर्माण में गुणवत्तापूर्ण सामग्री लगी होती तो इतनी जल्दी सड़क पर फिर से गड्ढे नहीं होते। मरम्मत के दौरान गड्ढों में न तो निर्धारित मानक के अनुरूप पत्थर की लेयर डाली गई। न ही पर्याप्त मात्रा में कोलतार और बजरी का इस्तेमाल किया गया।
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टनकपुर हाइवे शहर के मुख्य मार्गों में से एक है। इस पर आम लोगों के अलावा विभिन्न विभागों के इंजीनियर और प्रशासनिक अधिकारी भी गुजरते हैं, मगर उन्हें गड्ढे नहीं दिखते। राष्ट्रीय राजमार्ग की दशा ऐसी नहीं होनी चाहिए। - सौरभ माथुर, खकरा
हाइवे पर गड्ढों में फंसकर कार की दशा खराब हो गई। वाहन सवार गड्ढा देखकर अचानक ब्रेक लगा देते हैं। इससे पीछे आ रहे वाहन टकराने के साथ ही चोट भी लगती है। गड्ढों में गिरकर तमाम बाइक सवार चोटिल भी हो चुके हैं। - अंकुर कौशिक, तिरुपति गोल्डन पार्क
टनकपुर हाइवे के गड्ढे कुछ समय पहले ही भरवाए गए थे। अब बरसात चल रही है। इसलिए गड्ढे भरने और अस्थायी मरम्मत करने को ठेकेदार से कह दिया गया है। बरसात बाद हाईवे की स्थायी मरम्मत की जाएगी। - प्रवीन बांगड़ी, अधिशासी अभियंता, नेशनल हाईवे विंग
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लिपुलेख-भिंड राष्ट्रीय राजमार्ग पर टनकपुर जाने वाली मुख्य सड़क पर पूरे दिन भारी, मध्यम और हल्के वाहनों का बड़ी संख्या में ट्रैफिक रहता है। राजमार्ग की इस सड़क में जगह-जगह गड्ढे हो चुके हैं। इन गड्ढों की चपेट में आकर कई बाइक सवार चोटिल हो चुके हैं। असम चौराहा से नौगवां ओवरब्रिज होते हुए गौहनियां चौराहा तक सड़क में कदम-कदम पर गड्ढे हैं। ओवरब्रिज भी इतने गहरे गड्ढे हैं कि भारी या हल्के वाहन गुजरते ही इनमें धंसने लगते हैं। बाइक सवार अक्सर इनमें गिरकर चोटिल होते हैं। गौहनियां चौराहा से यशवंतरी देवी मंदिर चौराहा, नकटादाना चौराहा, एसपी आवास से आगे कलक्ट्रेट और उसके आगे तक हाईवे की सड़क खस्ताहाल है। तीन वर्ष पहले राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित होने के बाद लोक निर्माण विभाग ने इस मार्ग की मरम्मत कराने से अपने हाथ पीछे खींच लिए है। इसका खामियाजा आम लोगों को झेलना पड़ रहा है।
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तीन महीने पहले ही हुई थी मरम्मत
शहर के बीचोबीच से होकर गुजरने वाले टनकपुर हाईवे की सड़क की तीन महीने पहले ही लाखों रुपये खर्च करके मरम्मत कराई गई थी। इसमें मरम्मत कार्य में निर्धारित मानक के अनुरूप निर्माण सामग्री नहीं लगाई गई। इसका नतीजा यह निकला कि हाईवे की सड़क पर कई स्थानों पर गड्ढे हो गए। कई स्थानों पर पक्की सड़क उखड़ने लगी हैं। सड़क पर पड़े पत्थर और बजरी कोलतार से अलग होकर इधर-उधर छितराने लगे हैं। नकटादाना चौराहा से लेकर असम चौराहा तक सड़क की हालत बहुत खराब हो चुकी है। गड्ढा मुक्त अभियान में तीन माह पहले गड्ढों में भरी गई सामग्री बरसात के पानी में बह गई। पीडब्ल्यूडी के एक इंजीनियर ने नाम न प्रकाशित करने की गुजारिश पर बताया कि अगर सड़क निर्माण में गुणवत्तापूर्ण सामग्री लगी होती तो इतनी जल्दी सड़क पर फिर से गड्ढे नहीं होते। मरम्मत के दौरान गड्ढों में न तो निर्धारित मानक के अनुरूप पत्थर की लेयर डाली गई। न ही पर्याप्त मात्रा में कोलतार और बजरी का इस्तेमाल किया गया।
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टनकपुर हाइवे शहर के मुख्य मार्गों में से एक है। इस पर आम लोगों के अलावा विभिन्न विभागों के इंजीनियर और प्रशासनिक अधिकारी भी गुजरते हैं, मगर उन्हें गड्ढे नहीं दिखते। राष्ट्रीय राजमार्ग की दशा ऐसी नहीं होनी चाहिए। - सौरभ माथुर, खकरा
हाइवे पर गड्ढों में फंसकर कार की दशा खराब हो गई। वाहन सवार गड्ढा देखकर अचानक ब्रेक लगा देते हैं। इससे पीछे आ रहे वाहन टकराने के साथ ही चोट भी लगती है। गड्ढों में गिरकर तमाम बाइक सवार चोटिल भी हो चुके हैं। - अंकुर कौशिक, तिरुपति गोल्डन पार्क
टनकपुर हाइवे के गड्ढे कुछ समय पहले ही भरवाए गए थे। अब बरसात चल रही है। इसलिए गड्ढे भरने और अस्थायी मरम्मत करने को ठेकेदार से कह दिया गया है। बरसात बाद हाईवे की स्थायी मरम्मत की जाएगी। - प्रवीन बांगड़ी, अधिशासी अभियंता, नेशनल हाईवे विंग