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आशंका : मिलीभगत से हुआ राइस मिल में करोड़ों का गबन
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पूरनपुर। करोड़ों रुपये के सीएमआर (कस्टम मिलिंग राइस) के गबन पर दो राइस मिल मालिकों के पार्टनर पर एफआईआर दर्ज कराई गई। तीन राइस मिल मालिकों को आरसी जारी हुई। मगर गोदाम में चावल क्यों नहीं पहुंचा। इसकी परवाह क्यों नहीं की गई। आशंका जताई जा रही है कि विभाग के कुछ लोगों की मिलीभगत से करोड़ों का गबन हुआ है।
धान खरीद केंद्रों पर खरीदे गए धान को कुटाई के लिए राइस मिलों को दिया जाता है। इसके लिए राइस मिलर्स से अनुबंध होता है। दिए गए धान पर राइस मिलर को 67 प्रतिशत चावल देना होता है। राइस मिलर को इसके बदले 10 रुपये प्रति क्विंटल कुटाई, अगर राइस मिलर कूटे धान का चावल 45 दिन के अंदर गोदाम में उतार करवा देता है। तब उसे 20 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से प्रोत्साहन राशि दी जाती है। इसके अलावा धान सूखने के नाम पर एक प्रतिशत दिया जाता है। 45 दिन के अंदर धान का चावल बनाकर गोदाम में उतार न होने पर मिलर से एक रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से होल्डिंग चार्ज वसूला जाता है।
चावल का राइस मिलर गबन न कर सके। इसकी जिम्मेदारी संबंधित खरीद केंद्र प्रभारी सहित अन्य अफसरों की भी होती हैै। सीजन में दिए गए धान का चावल उतार कराने की शुरू में 31 मार्च तिथि निर्धारित की गई थी। इसके बाद 30 जून तिथि तय की गई। बाद में एक बार फिर इसमें छूट देकर 30 अगस्त तक चावल उतार कराने के निर्देश थे। दिए गए धान का चावल राइस मिलरों पर है या नहीं। इसके लिए बरेली से आई एफसीआई टीम ने दो महीने पहले जांच किया था। इसके बाद एसडीएम ने चावल का सत्यापन किया। एसडीएम के पहली बार सत्यापन करने पर राइस मिलों पर चावल मिला। मगर दूसरी बार सत्यापन में एक राइस मिल में तो चावल मिला। जिसे सील कर दिया गया। ताकि चावल की कीमत की वसूली की जा सके। दो राइस मिलों पर चावल का स्टाक ही गायब मिला। चावल गबन करने के आरोप पर दो राइस मिलों के पार्टनरों पर रिपोर्ट दर्ज कराई गई। मगर अन्य जिम्मेदारों पर कार्रवाई से हाथ खींच लिए गए।
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कार्रवाई से बचने को दिया के लिए उधार भी फंसा
पूरनपुर। धान की कुटाई में राइस मिलर्स को इस बार खास लाभ नहीं हो सका। वजह 50 प्रतिशत तक कुटाई में चावल टूट गया। जैसे-तैसे कार्रवाई से बचने को राइस मिलर्स ने चावल का इंतजाम किया। उतार शुरू हुआ। कुछ दिन उतार होने के बाद उतार नहीं कराया गया। चावल का स्टाक कहीं खराब न हो जाए। इसको लेकर कुछ राइस मिलरों ने चावल के स्टाक की बिक्री कर ली। ताकि नोटिस मिलने पर चावल की कीमत को जमा किया जा सके। कुछ राइस मिलरों पर चावल न होने पर उसकी खरीद में कुछ जिम्मेदार कर्मचारियों ने भी चावल खरीद को राइस मिलर्स को रकम दी। ताकि राइस मिलर के साथ कहीं उन पर भी गाज न गिर जाए। चावल गबन में राइस मिलरों ने सभी चावल की बिक्री कर दी। इससे कार्रवाई से बचने को जिम्मेदारों की ओर से दिए गए रुपये भी फंस गए। मामला खाद्यान्न व्यापारियों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
दो बार सत्यापन में राइस मिलों पर चावल का स्टाक मिला। मगर अचानक दो राइस मिलरों ने चावल की बिक्री कर दी। इससे सीधे राइस मिलर दोषी मिले। उन पर रिपोर्ट दर्ज कराई गई। जिम्मेदार कर्मचारियों का इसमें कोई दोष नहीं पाया गया। इसके बाद अगर उच्च अफसर कोई निर्देश देते हैं। तब उसके हिसाब से कार्रवाई होगी।
- प्रिंस चौधरी, डिप्टी आरएमओ
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धान खरीद केंद्रों पर खरीदे गए धान को कुटाई के लिए राइस मिलों को दिया जाता है। इसके लिए राइस मिलर्स से अनुबंध होता है। दिए गए धान पर राइस मिलर को 67 प्रतिशत चावल देना होता है। राइस मिलर को इसके बदले 10 रुपये प्रति क्विंटल कुटाई, अगर राइस मिलर कूटे धान का चावल 45 दिन के अंदर गोदाम में उतार करवा देता है। तब उसे 20 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से प्रोत्साहन राशि दी जाती है। इसके अलावा धान सूखने के नाम पर एक प्रतिशत दिया जाता है। 45 दिन के अंदर धान का चावल बनाकर गोदाम में उतार न होने पर मिलर से एक रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से होल्डिंग चार्ज वसूला जाता है।
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चावल का राइस मिलर गबन न कर सके। इसकी जिम्मेदारी संबंधित खरीद केंद्र प्रभारी सहित अन्य अफसरों की भी होती हैै। सीजन में दिए गए धान का चावल उतार कराने की शुरू में 31 मार्च तिथि निर्धारित की गई थी। इसके बाद 30 जून तिथि तय की गई। बाद में एक बार फिर इसमें छूट देकर 30 अगस्त तक चावल उतार कराने के निर्देश थे। दिए गए धान का चावल राइस मिलरों पर है या नहीं। इसके लिए बरेली से आई एफसीआई टीम ने दो महीने पहले जांच किया था। इसके बाद एसडीएम ने चावल का सत्यापन किया। एसडीएम के पहली बार सत्यापन करने पर राइस मिलों पर चावल मिला। मगर दूसरी बार सत्यापन में एक राइस मिल में तो चावल मिला। जिसे सील कर दिया गया। ताकि चावल की कीमत की वसूली की जा सके। दो राइस मिलों पर चावल का स्टाक ही गायब मिला। चावल गबन करने के आरोप पर दो राइस मिलों के पार्टनरों पर रिपोर्ट दर्ज कराई गई। मगर अन्य जिम्मेदारों पर कार्रवाई से हाथ खींच लिए गए।
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कार्रवाई से बचने को दिया के लिए उधार भी फंसा
पूरनपुर। धान की कुटाई में राइस मिलर्स को इस बार खास लाभ नहीं हो सका। वजह 50 प्रतिशत तक कुटाई में चावल टूट गया। जैसे-तैसे कार्रवाई से बचने को राइस मिलर्स ने चावल का इंतजाम किया। उतार शुरू हुआ। कुछ दिन उतार होने के बाद उतार नहीं कराया गया। चावल का स्टाक कहीं खराब न हो जाए। इसको लेकर कुछ राइस मिलरों ने चावल के स्टाक की बिक्री कर ली। ताकि नोटिस मिलने पर चावल की कीमत को जमा किया जा सके। कुछ राइस मिलरों पर चावल न होने पर उसकी खरीद में कुछ जिम्मेदार कर्मचारियों ने भी चावल खरीद को राइस मिलर्स को रकम दी। ताकि राइस मिलर के साथ कहीं उन पर भी गाज न गिर जाए। चावल गबन में राइस मिलरों ने सभी चावल की बिक्री कर दी। इससे कार्रवाई से बचने को जिम्मेदारों की ओर से दिए गए रुपये भी फंस गए। मामला खाद्यान्न व्यापारियों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
दो बार सत्यापन में राइस मिलों पर चावल का स्टाक मिला। मगर अचानक दो राइस मिलरों ने चावल की बिक्री कर दी। इससे सीधे राइस मिलर दोषी मिले। उन पर रिपोर्ट दर्ज कराई गई। जिम्मेदार कर्मचारियों का इसमें कोई दोष नहीं पाया गया। इसके बाद अगर उच्च अफसर कोई निर्देश देते हैं। तब उसके हिसाब से कार्रवाई होगी।
- प्रिंस चौधरी, डिप्टी आरएमओ