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जर्जर मार्ग से गुजरने को मजबूर हैं बाशिंदे

Mon, 17 Oct 2016 12:16 AM IST
ब्यूरो /पीलीभीत
ब्यूरो /पीलीभीत Updated Mon, 17 Oct 2016 12:16 AM IST
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Residents are forced to go through the shabby way
जर्जर मार्ग से गुजरने को मजबूर हैं बाशिंदे - फोटो : पीलीभ्‍ाीत/उत्‍ततर प्रदेश्‍ा
तहसील व जिला मुख्यालय से जोड़ने वाले मुख्य मार्ग का हाल बेहाल है। तराई क्षेत्र की करीब एक लाख आबादी सालों से इसी ऊबड़ खाबड़ रास्ते से गुजरने को मजबूर है। यहां की जनता ने जनप्रतिनिधियों से मार्ग निर्माण की गुहार लगाई है। जिसके बाद केंद्रीय मंत्री से लेकर विधायक तक ने सड़क निर्माण की घोषणा भी की, लेकिन यह घोषणा हवाई ही साबित हुई है।
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आठ साल पहले बनाया गया था मार्ग
तराई क्षेत्र की नेपाल सीमा से लेकर करीब 30-35 गांवों की आबादी के लिए आवागमन का एकमात्र रास्ता शारदा डैम से बाइफरकेशन होकर जाने वाला मार्ग है। इस मार्ग को तराईवासियों की मांग पर तत्कालीन प्रमुख सचिव वित्त मंजीत सिंह के प्रयासों से करीब आठ साल पहले प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनाया गया था। बताते हैं कि ग्रामीण क्षेत्र में बनने वाली इस सड़क की गुणवत्ता पर उस दौरान कोई ध्यान नहीं दिया गया। नतीजा यह निकला कि एक वर्ष में ही यह सड़क उखड़ने लगी थी। इधर ठेकेदार भी जमानत राशि बचाने को उखड़े मार्ग पर पैच लगवाता रहा, लेकिन अनुबंध समाप्त होते ही उसने भी हाथ खींच लिए।
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मात्र झूठी घोषणाएं करते रहे जनप्रतिनिधि
तराई जाने वाले मार्ग को लेकर क्षेत्र के प्रधानों व जनता ने जनप्रतिनिधियों से समय-समय पर गुहार भी लगाई, लेकिन जनप्रतिनिधि घोषणाएं करने के बाद सड़क बनवाना भूल गए। क्षेत्र के प्रधान शंकर राय, प्रशांत साना, आशा मिस्त्री, परितोष राय, आशीष राय कहते हैं कि ब्लाक प्रमुखी के चुनाव के दौरान मंत्री व विधायक ने सड़क बनवाने की घोषणा की थी, लेकिन घोषणा झूठी साबित हो रही है। केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी और शिवपाल सिंह यादव के सामने सड़क निर्माण की मांग रखी गई, लेकिन जनता की आवाज को अनसुना कर दिया गया।
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