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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pilibhit News ›   Remember the rules comes after incidents

हादसों के बाद आती हैं नियमों की याद

Fri, 10 Jul 2015 11:23 PM IST
Pilibhit
Pilibhit Updated Fri, 10 Jul 2015 11:23 PM IST
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जिले के तमाम प्राइवेट स्कूलों में बच्चों को लाने और ले जाने के लिए लगे वाहन शासन से जारी नियमों का खुलेआम उल्लंघन कर रहे हैं। ट्रैफिक पुलिस और एआरटीओ विभाग को बड़ा हादसा होने के बाद नियमों और वाहनों की जांच करने की याद आती है। स्कूली वाहनों वाले बच्चों को ठूस-ठूसकर भरते हैं। इनमें ज्यादातर स्कूलों के वाहनों के स्थिति बदहाल है।

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जब कभी स्कूली वाहनों से हादसे होते हैं तो पुलिस और एआरटीओ को यातायात नियमों की याद आती है। जिम्मेदार विभाग कुछ डग्गामार वाहनों पर कार्रवाई करके अपना गुडवर्क दिखा देते हैं। पिछले शैक्षिक सत्र में बिलसंडा में स्कूली बस की चादर निकलने से एक मासूम छात्र की चलती बस से नीचे गिरकर पहिए से कुचलकर मौत हो गई थी। इससे पहले मझोला में स्कूली वैन पलटने से करीब एक दर्जन बच्चे घायल हो गए थे। इस घटना में भी एक बच्चे की मौत हुई थी। नए शैक्षिक सत्र की शुरुआत हो चुकी है। जिले भर में स्कूली बसों, मैजिकों, टेंपों और रिक्शों से बच्चों को ढोया जा रहा है। शहर में ही कई मारूती वैन और टाटा मैजिक बच्चों को ढोने का काम कर रही हैं। इन वैनों में 16 से 20 बच्चों को ठूंसकर भरा जाता है। बसों में भी क्षमता से दोगुने बच्चे बैठाए जाते हैं। अधिकांश बसों में ड्राइवर पांच वर्ष से कम अनुभव वाले हैं। कुछ स्कूलों के वाहन करीब 20 वर्ष के युवा चलाते हैं। फस्ट एड किट, स्पीड गवर्नर, बच्चों का नाम और ब्लड ग्रुप आदि तमाम चीजें सिर्फ कागजों तक ही सीमित हैं। देश का भविष्य कहे जाने वाले बच्चों के जीवन से खिलवाड़ करने वाले इन वाहनों पर सख्ती से ध्यान नहीं दिया जाता है।
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