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41 साल के बाद होंगे 15 घंटे के सबसे लंबे रोजे
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पीलीभीत। माहे रमजान 25 अप्रैल से शुरू होने जा रहे हैं। वर्ष 1979 के बाद इस बार तकरीबन साढ़े 15 घंटे का सबसे लंबा रोजा होगा। 41 साल के बाद इस तरह का संयोग पड़ रहा है। लगातार कई बरस तक लंबे रोजे रखने होंगे।
पूरनपुर कादरी दारूल इफ्ता (इस्लामिक न्यायालय) के मुफ्ती और इस्लामिक स्कॉलर मुफ्ती साजिद हसनी कादरी ने रमजान शरीफ की फजीलत पर चर्चा करते हुए बताया कि रमजान शरीफ में जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं और दौजख (जहन्नुम) के दरवाजे बंद हो जाते हैं। रमजान के महीने में एक नेकी करने के बदले 70 नेकियों का शवाब मिलता है। सभी मुसलमानों पर रोजा रखना फर्ज है। जान बूझकर एक रोजा छोड़ने के बदले 60 रोजे लगातार रखने होंगे। अगर किसी में रोजा रखने की ताकत नहीं है तो वह 60 दिन तक लगातार गरीब और मिसकीन को भर पेट खाना खिलाए। कोई बीमार है तो ऐसी हालत में इंजेक्शन लगवाने से रोजा नहीं टूटेगा। सर में तेल डालने, सुर्मा लगाने से रोजा नहीं टूटता है। मुफ्ती साजिद हसनी कादरी ने बताया कि वर्ष 1979 के बाद पहली बार 16 घंटे का रोजा होगा। पहले रोजा की सहरी 4.07 बजे इफ्तार शाम 6.46 बजे होगा। आखिरी रोजा की सहरी 3.40 बजे पर और इफ्तार 7.02 बजे होगा। पहला रोजा 14 घंटे 39 मिनट और आखिरी रोजा 15 घंटे 22 मिनट का होगा।
लॉकडाउन का करें पालन
मुफ्ती साजिद हसनी ने मुसलमानो से अपील की है कि लॉकडाउन में तरावीह-नमाज और अन्य इबादते घरों में ही रहकर करें। लाकडाउन के दिनों में मस्जिदों में सिर्फ चार या पांच लोग ही तरावीह-जुमा और अन्य नमाजे अदा कर सकेंगे। शासन प्रशासन का सहयोग करें। मास्क और सैनैटराइजर का प्रयोग करें। घरों से बाहर न निकलें।
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पूरनपुर कादरी दारूल इफ्ता (इस्लामिक न्यायालय) के मुफ्ती और इस्लामिक स्कॉलर मुफ्ती साजिद हसनी कादरी ने रमजान शरीफ की फजीलत पर चर्चा करते हुए बताया कि रमजान शरीफ में जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं और दौजख (जहन्नुम) के दरवाजे बंद हो जाते हैं। रमजान के महीने में एक नेकी करने के बदले 70 नेकियों का शवाब मिलता है। सभी मुसलमानों पर रोजा रखना फर्ज है। जान बूझकर एक रोजा छोड़ने के बदले 60 रोजे लगातार रखने होंगे। अगर किसी में रोजा रखने की ताकत नहीं है तो वह 60 दिन तक लगातार गरीब और मिसकीन को भर पेट खाना खिलाए। कोई बीमार है तो ऐसी हालत में इंजेक्शन लगवाने से रोजा नहीं टूटेगा। सर में तेल डालने, सुर्मा लगाने से रोजा नहीं टूटता है। मुफ्ती साजिद हसनी कादरी ने बताया कि वर्ष 1979 के बाद पहली बार 16 घंटे का रोजा होगा। पहले रोजा की सहरी 4.07 बजे इफ्तार शाम 6.46 बजे होगा। आखिरी रोजा की सहरी 3.40 बजे पर और इफ्तार 7.02 बजे होगा। पहला रोजा 14 घंटे 39 मिनट और आखिरी रोजा 15 घंटे 22 मिनट का होगा।
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लॉकडाउन का करें पालन
मुफ्ती साजिद हसनी ने मुसलमानो से अपील की है कि लॉकडाउन में तरावीह-नमाज और अन्य इबादते घरों में ही रहकर करें। लाकडाउन के दिनों में मस्जिदों में सिर्फ चार या पांच लोग ही तरावीह-जुमा और अन्य नमाजे अदा कर सकेंगे। शासन प्रशासन का सहयोग करें। मास्क और सैनैटराइजर का प्रयोग करें। घरों से बाहर न निकलें।
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