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Pilibhit News: हांफ रही पूरनपुर की सहकारी चीनी मिल
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पूरनपुर। जिले में गन्ना उत्पादन की अधिकता होने के बावजूद चीनी मिलें इसका फायदा नहीं उठा पा रहीं हैं। जिले की शहर, बरखेड़ा व बीसलपुर की चीनी मिल तो ठीक चल रही है, लेकिन सहकारी चीनी मिल पूरनपुर की हालत खस्ता है। चार दिसंबर को चीनी मिल शुरू हुई, लेकिन अब तक यहां पेराई ठीक से नहीं हो पा रही है। कभी खराबी तो कभी नोकेन में मिल नहीं चल पा रही है।
जिले में 2.26 लाख गन्ना किसान हैं। यहां चार चीनी मिले हैं। इनमें सबसे ज्यादा पीलीभीत की एलएच चीनी मिल की पेराई क्षमता 1.25 लाख क्विंटल प्रतिदिन है। दूसरे नंबर पर बरखेड़ा की बजाज हिंदुस्थान चीनी मिल 75000 क्विंटल, तीसरे नंबर पर बीसलपुर की सहकारी चीनी मिल 27500 क्विंटल व चौथे नंबर पर पूरनपुर की सहकारी चीनी मिल हैं, जिसकी क्षमता 25 हजार क्विंटल प्रतिदिन गन्ना पेरने की है। इस बार किसान सबसे ज्यादा पूरनपुर चीनी मिल से परेशान हैं।
पूरनपुर चीनी मिल को करीब 14693 किसान गन्ना सप्लाई करते हैं। पूरनपुर चीनी मिल क्षेत्र में इस बार 6266.854 हेक्टेयर जमीन पर गन्ने की फसल हुई है। ऐसे में क्षेत्र में गन्ने की कमी नहीं है। पूरनपुर चीनी मिल के पेराई सत्र शुभारंभ 28 नवंबर को किया गया। मगर चीनी मिल नहीं चल पाई। चार दिसंबर की शाम को चीनी मिल के पेराई सत्र को शुरू किया गया। शुरू होने के दो घंटे बाद ही चीनी मिल में खराबी आ गई। इसके बाद नोकेन व खराबी में मिल कई बार बंद हुई। चीनी मिल को 19 दिन में क्षमता के अनुसार पौने पांच लाख क्विंटल गन्ना पेर लेना चाहिए था, लेकिन शुक्रवार तक चीनी मिल 2.96900 लाख क्विंटल गन्ना ही पेर सकी। गन्ना की पर्चियों का मेसेज समय से न मिलने पर गन्ना काटकर गेहूं बोने वाले किसानों को गन्ने की फसल औने पौने दामों में बेचनी पड़ रही है।
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चीनी मिलों पर नहीं कोई बकाया
जिला गन्ना अधिकारी खुशीराम भार्गव ने बताया कि जिले में भुगतान की स्थिति बिल्कुल ठीक है। सात-सात दिन के भीतर भुगतान किया जा रहा है। बरखेड़ा की बजाज हिंदुस्थान चीनी मिल का भी भुगतान करवा दिया गया है।
खास बात
जिले में गन्ना किसान 2.26 लाख
चीनी मिले- चार
गन्ना क्रय केंद्र- 188
शुरू में पूरनपुर की चीनी मिल में दिक्कत आई थी। अब ठीक चल रही है। गन्ना किसानों को पर्ची का संकट की बात सामने नहीं आई है। इसे दिखवाया जाएगा। खुशीराम भार्गव, जिला गन्ना अधिकारी
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जिले में 2.26 लाख गन्ना किसान हैं। यहां चार चीनी मिले हैं। इनमें सबसे ज्यादा पीलीभीत की एलएच चीनी मिल की पेराई क्षमता 1.25 लाख क्विंटल प्रतिदिन है। दूसरे नंबर पर बरखेड़ा की बजाज हिंदुस्थान चीनी मिल 75000 क्विंटल, तीसरे नंबर पर बीसलपुर की सहकारी चीनी मिल 27500 क्विंटल व चौथे नंबर पर पूरनपुर की सहकारी चीनी मिल हैं, जिसकी क्षमता 25 हजार क्विंटल प्रतिदिन गन्ना पेरने की है। इस बार किसान सबसे ज्यादा पूरनपुर चीनी मिल से परेशान हैं।
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पूरनपुर चीनी मिल को करीब 14693 किसान गन्ना सप्लाई करते हैं। पूरनपुर चीनी मिल क्षेत्र में इस बार 6266.854 हेक्टेयर जमीन पर गन्ने की फसल हुई है। ऐसे में क्षेत्र में गन्ने की कमी नहीं है। पूरनपुर चीनी मिल के पेराई सत्र शुभारंभ 28 नवंबर को किया गया। मगर चीनी मिल नहीं चल पाई। चार दिसंबर की शाम को चीनी मिल के पेराई सत्र को शुरू किया गया। शुरू होने के दो घंटे बाद ही चीनी मिल में खराबी आ गई। इसके बाद नोकेन व खराबी में मिल कई बार बंद हुई। चीनी मिल को 19 दिन में क्षमता के अनुसार पौने पांच लाख क्विंटल गन्ना पेर लेना चाहिए था, लेकिन शुक्रवार तक चीनी मिल 2.96900 लाख क्विंटल गन्ना ही पेर सकी। गन्ना की पर्चियों का मेसेज समय से न मिलने पर गन्ना काटकर गेहूं बोने वाले किसानों को गन्ने की फसल औने पौने दामों में बेचनी पड़ रही है।
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चीनी मिलों पर नहीं कोई बकाया
जिला गन्ना अधिकारी खुशीराम भार्गव ने बताया कि जिले में भुगतान की स्थिति बिल्कुल ठीक है। सात-सात दिन के भीतर भुगतान किया जा रहा है। बरखेड़ा की बजाज हिंदुस्थान चीनी मिल का भी भुगतान करवा दिया गया है।
खास बात
जिले में गन्ना किसान 2.26 लाख
चीनी मिले- चार
गन्ना क्रय केंद्र- 188
शुरू में पूरनपुर की चीनी मिल में दिक्कत आई थी। अब ठीक चल रही है। गन्ना किसानों को पर्ची का संकट की बात सामने नहीं आई है। इसे दिखवाया जाएगा। खुशीराम भार्गव, जिला गन्ना अधिकारी