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रालोद के प्रांतीय नेता समेत दो की जिपं सदस्यता खतरे में 

Tue, 22 Nov 2016 10:50 PM IST
ब्यूरो /पीलीभीत
ब्यूरो /पीलीभीत Updated Tue, 22 Nov 2016 10:50 PM IST
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Provincial RLD leader and two of Ursae en: GEIPAN membership at risk
रालोद के प्रांतीय नेता समेत दो की जिपं सदस्यता खतरे में  - फोटो : पीलीभ्‍ाीत/उत्‍ततर प्रदेश्‍ा
रालोद के प्रांतीय नेता मंजीत सिंह समेत पिछड़ी जाति आरक्षित सीट से जिला पंचायत सदस्य निर्वाचित हुए दो जिपं सदस्यों की सदस्यता पर तलवार लटकती न"ार आ रही है। पिछड़ी जाति के लिए आरक्षित क्षेत्र वार्ड-एक और वार्ड-दो से निर्वाचित दोनों सदस्यों द्वारा चुनाव के दौरान जो जाति प्रमाण पत्र नामांकन पत्र के साथ दायर किया गया वह तहसील से जारी ही नहीं हुआ था। एक शिकायतकर्ता की तहरीर पर एसडीएम द्वारा की जांच में यह तथ्य सामने आने के बाद जिले के राजनीतिक हलको में अफरा-तफरी का माहौल का है। शिकायतकर्ता ने दोनों जिपं सदस्यों की सदस्यता समाप्त करने के साथ उनके खिलाफ धोखाधड़ी समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कराने की मांग की है। 
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जिला पंचायत चुनाव में वार्ड-एक और वार्ड-दो पिछड़ी जाति के सदस्य पद के लिए आरक्षित थे। चुनाव में वार्ड नं. एक से मंजीत सिंह और वार्ड दो से गुरजीत सिंह मल्ली सदस्य निर्वाचित हुए। पूरनपुर के मोहल्ला गनेशगंज निवासी वसीम बेग ने एडीएम अजयकांत सैनी को कुछ माह पूर्व एक प्रार्थना पत्र देकर बताया कि दोनों ही निर्वाचित सदस्य पिछड़ी जाति के नहीं हैं। आरोप लगाया कि दोनों ने फर्जी जाति प्रमाण पत्र लगाकर चुनाव लड़ा है। लिहाजा उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। 
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एडीएम ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच एसडीएम से स्वयं कर रिपोर्ट सौपने के निर्देश दिए थे। एसडीएम ने मामले की जांच की तो पता चला कि संबंधित दोनों सदस्यों के पक्ष में पिछड़ी जाति का प्रमाण पत्र तहसील कार्यालय से जारी ही नहीं हुआ। एसडीएम ने अपनी रिपोर्ट में यह भी लिखा कि दोनों की जाति उनके परिवार रजिस्टर में हिंदू सिख दर्शाई गई है। एसडीएम ने कुछ दिन पहले ही यह रिपोर्ट एडीएम को अग्रिम कार्रवाई के लिए भेजी है। जिसके बाद से दोनों निर्वाचित सदस्यों की सदस्यता पर तलवार लटकती नजर आ रही है। 
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लग रही कोई साजिश: मंजीत सिंह
मेरे नामांकन के दौरान विरोध में चुनाव लड़ रहे पूर्व जिपं अध्यक्ष गुरदयाल सिंह ने भी मेरे ऊपर पिछड़ी जाति का प्रमाण पत्र फर्जी होने का आरोप लगाया था। नामांकन पत्रों की जांच के दौरान भी उसने आपत्ति दायर की थी। जिसे प्रशासन ने ही खारिज कर दिया था। अगर पिछड़ी जाति का प्रमाण पत्र फर्जी था तो उसी समय प्रशासन को उसे खारिज कर देना चाहिए था। मुझे यह साजिश लग रही है। 
मंजीत सिंह, आरोपी जिपं सदस्य
 
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