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Pilibhit News: घेरा रिछोला वेटलैंड का प्रस्ताव अटका, गौहनिया वेटलैंड के विकास की जगी उम्मीद
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पीलीभीत। जिले में वेटलैंडों के संरक्षण और उन्हें पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की वन विभाग की योजना को झटका लगा है। पीलीभीत रेंज में करीब 20 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैले घेरा रिछोला वेटलैंड के विकास के लिए भेजे गए 40 लाख रुपये के प्रस्ताव को शासन से मंजूरी नहीं मिल सकी है। शासन ने पूर्व में इस वेटलैंड के लिए 30 लाख रुपये का बजट मिलने का हवाला देते हुए दोबारा धनराशि देने से इन्कार कर दिया है। साथ ही किसी अन्य वेटलैंड का प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए हैं।
घेरा रिछोला वेटलैंड को इको टूरिज्म और बर्ड वॉचिंग के लिए विकसित करने की योजना बनाई गई थी। इसके लिए वन एवं वन्यजीव प्रभाग की ओर से शासन को प्रस्ताव भेजा गया था। प्रस्ताव में वेटलैंड के विकास के साथ प्रवासी पक्षियों के अनुकूल प्राकृतिक पर्यावास तैयार करने, जलीय जीवों के लिए विशेष पौंड, एप्रोच रोड, पर्यटकों के बैठने की व्यवस्था और कैंटीन बनाने की योजना शामिल थी। वेटलैंड की निगरानी के लिए वॉचरों की तैनाती का भी प्रस्ताव था।
बीते वर्ष मुख्य वन संरक्षक इको डेवलपमेंट नीरज कुमार ने घेरा रिछोला वेटलैंड का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान वेटलैंड की स्थिति और जैवविविधता का जायजा लेने के बाद इसे पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा था। हालांकि पूर्व में बजट मिल चुके होने के कारण इस बार प्रस्ताव को स्वीकृति नहीं मिल सकी। वेटलैंड को अतिक्रमण से बचाने और निगरानी व्यवस्था मजबूत करने के लिए शासन से वॉचरों की तैनाती की मांग की गई है।
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डीएफओ भरत कुमार डीके ने बताया कि घेरा रिछोला वेटलैंड के लिए 40 लाख रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था, लेकिन उसे मंजूरी नहीं मिल सकी। शासन ने किसी अन्य वेटलैंड का प्रस्ताव भेजने को कहा है। गौहनिया वेटलैंड का प्रस्ताव पहले से शासन में लंबित है। इसकी वित्तीय स्वीकृति का इंतजार किया जा रहा है। संवाद
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घेरा रिछोला वेटलैंड को इको टूरिज्म और बर्ड वॉचिंग के लिए विकसित करने की योजना बनाई गई थी। इसके लिए वन एवं वन्यजीव प्रभाग की ओर से शासन को प्रस्ताव भेजा गया था। प्रस्ताव में वेटलैंड के विकास के साथ प्रवासी पक्षियों के अनुकूल प्राकृतिक पर्यावास तैयार करने, जलीय जीवों के लिए विशेष पौंड, एप्रोच रोड, पर्यटकों के बैठने की व्यवस्था और कैंटीन बनाने की योजना शामिल थी। वेटलैंड की निगरानी के लिए वॉचरों की तैनाती का भी प्रस्ताव था।
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बीते वर्ष मुख्य वन संरक्षक इको डेवलपमेंट नीरज कुमार ने घेरा रिछोला वेटलैंड का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान वेटलैंड की स्थिति और जैवविविधता का जायजा लेने के बाद इसे पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा था। हालांकि पूर्व में बजट मिल चुके होने के कारण इस बार प्रस्ताव को स्वीकृति नहीं मिल सकी। वेटलैंड को अतिक्रमण से बचाने और निगरानी व्यवस्था मजबूत करने के लिए शासन से वॉचरों की तैनाती की मांग की गई है।
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डीएफओ भरत कुमार डीके ने बताया कि घेरा रिछोला वेटलैंड के लिए 40 लाख रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था, लेकिन उसे मंजूरी नहीं मिल सकी। शासन ने किसी अन्य वेटलैंड का प्रस्ताव भेजने को कहा है। गौहनिया वेटलैंड का प्रस्ताव पहले से शासन में लंबित है। इसकी वित्तीय स्वीकृति का इंतजार किया जा रहा है। संवाद