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Pilibhit News: जंगल में बसे चलतुआ गांव को खाली कराने की तैयारी
Fri, 20 Dec 2024 12:17 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Fri, 20 Dec 2024 12:17 AM IST
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पूरनपुर क्षेत्र के गांव चलतुआ में आयोजित बैठक में मौजूद ग्रामीण।स्रोत: वन विभाग
पूरनपुर। जंगल में बसे गांव चलतुआ के लोगों को दूसरे स्थान पर बसाने की कवायद तेज हो गई है। वन और राजस्व टीम ने सर्वे शुरू कर दिया। बुधवार को गांव में बैठक कर लोगों से बसने के लिए जमीन या 15 लाख रुपये में से एक चुनने के लिए कहा गया। टीम सर्वे पूरा कर सप्ताह भर में अपनी रिपोर्ट देगी। सर्वे के दौरान गांव के लोगों से लिखित विकल्प मांगा जाएगा।
थाना सेहरामऊ उत्तरी थाना क्षेत्र का चलतुआ गांव किशनपुर सेंच्युरी में जंंगल के बीच बसा है। गांव में पहुंचने के लिए जंगल में चार किलोमीटर दूरी तय करनी पड़ती है। आवागमन के लिए पगडंडी बनी है। गांव में प्राथमिक विद्यालय जरूर है, मगर बिजली, सड़कें, मोबाइल नेटवर्क आदि का अभाव है। चारों ओर जंगल से घिरे गांव में अक्सर जंगली जानवरों का भय बना रहता है।
ढाई साल पहले खेत की रखवाली कर रहे बुजुर्ग को हाथी ने पटककर मार डाला था। करीब पांच साल पहले मानव-वन्य जीव संघर्ष में लोगों ने बाघ को लाठियों से पीटकर मौत के घाट उतार दिया था। करीब छह महीने पहले गांव पहुंचे डीएम संजय सिंह को लोगों ने समस्याएं बताई थी। डीएम ने ग्रामीणों की समस्या से शासन को अवगत कराया।
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बाद में डीएम ने एसडीएम पूरनपुर, डीएफओ, एसडीओ वन को शामिल कर टीम गठित की थी। गांव के लोगों को जंगल के बाहर बसाने की प्रक्रिया अब शुरू की गई है। गांव छोड़ने वालों को 15 लाख रुपये या दो हेक्टेयर जमीन देने का विकल्प तय किया गया है। बुधवार को गांव में एसडीएम अजीत प्रताप सिंह की मौजूदगी में बैठक हुई।
गांव के अधिकांश लोगों का कहना है कि वे लोग खुद गांव में नहीं रहना चाहते, मगर गांव में उनके घर व आसपास खेत हैं। सरकार गांव छोड़ने के बदले खेती और रहने को जमीन दें। एसडीएम अजीत प्रताप सिंह ने बताया कि गांव में राजस्व, वन और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सर्वे शुरू कर दिया। कितने परिवार और घर गांव में है, टीम अपनी रिपोर्ट सात दिन में देगी। बैठक में किशनपुर सेंच्युरी के वन्यजीव प्रतिपालक धर्मेंद्र द्विवेदी, चलतुआ के रेंजर मोहम्मद अयूब हसन, कुर्रैया सीएचसी के चिकित्सक डॉ. छत्रपाल आदि थे।
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52 लोगों को पट्टा देकर बसाया गया था गांव में
चतलुआ गांव में दशकों पहले 52 लोगों को जमीन का पट्टा देकर बसाया गया था। उस समय आसपास वन्यजीवों की संख्या कम थी। संख्या बढ़ने पर अब वन्य जीव अक्सर आबादी क्षेत्र में आ रहे है। फसलों की रखवाली करने के लिए किसानों को रातों में जागना पड़ता है।
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थाना सेहरामऊ उत्तरी थाना क्षेत्र का चलतुआ गांव किशनपुर सेंच्युरी में जंंगल के बीच बसा है। गांव में पहुंचने के लिए जंगल में चार किलोमीटर दूरी तय करनी पड़ती है। आवागमन के लिए पगडंडी बनी है। गांव में प्राथमिक विद्यालय जरूर है, मगर बिजली, सड़कें, मोबाइल नेटवर्क आदि का अभाव है। चारों ओर जंगल से घिरे गांव में अक्सर जंगली जानवरों का भय बना रहता है।
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ढाई साल पहले खेत की रखवाली कर रहे बुजुर्ग को हाथी ने पटककर मार डाला था। करीब पांच साल पहले मानव-वन्य जीव संघर्ष में लोगों ने बाघ को लाठियों से पीटकर मौत के घाट उतार दिया था। करीब छह महीने पहले गांव पहुंचे डीएम संजय सिंह को लोगों ने समस्याएं बताई थी। डीएम ने ग्रामीणों की समस्या से शासन को अवगत कराया।
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बाद में डीएम ने एसडीएम पूरनपुर, डीएफओ, एसडीओ वन को शामिल कर टीम गठित की थी। गांव के लोगों को जंगल के बाहर बसाने की प्रक्रिया अब शुरू की गई है। गांव छोड़ने वालों को 15 लाख रुपये या दो हेक्टेयर जमीन देने का विकल्प तय किया गया है। बुधवार को गांव में एसडीएम अजीत प्रताप सिंह की मौजूदगी में बैठक हुई।
गांव के अधिकांश लोगों का कहना है कि वे लोग खुद गांव में नहीं रहना चाहते, मगर गांव में उनके घर व आसपास खेत हैं। सरकार गांव छोड़ने के बदले खेती और रहने को जमीन दें। एसडीएम अजीत प्रताप सिंह ने बताया कि गांव में राजस्व, वन और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सर्वे शुरू कर दिया। कितने परिवार और घर गांव में है, टीम अपनी रिपोर्ट सात दिन में देगी। बैठक में किशनपुर सेंच्युरी के वन्यजीव प्रतिपालक धर्मेंद्र द्विवेदी, चलतुआ के रेंजर मोहम्मद अयूब हसन, कुर्रैया सीएचसी के चिकित्सक डॉ. छत्रपाल आदि थे।
52 लोगों को पट्टा देकर बसाया गया था गांव में
चतलुआ गांव में दशकों पहले 52 लोगों को जमीन का पट्टा देकर बसाया गया था। उस समय आसपास वन्यजीवों की संख्या कम थी। संख्या बढ़ने पर अब वन्य जीव अक्सर आबादी क्षेत्र में आ रहे है। फसलों की रखवाली करने के लिए किसानों को रातों में जागना पड़ता है।